कक्षा 6 में विज्ञान की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा के अध्याय ‘लंबाई एवं गति का मापन’ में हमने एक क्रियाकलाप किया था जिसमें हमने धागे से लटके एक इरेजर/रबड़ की दोलन-गति का अवलोकन किया था। क्या लोलक उसके जैसा ही है?
उत्तर
हाँ — दोनों एक ही हैं। धागे से लटका इरेजर जब दोलन करता है तो वह वास्तव में एक सरल लोलक ही है; केवल नाम और गोलक अलग हैं।
सरल लोलक। गोलक माध्य स्थिति 'अ' पर लटका रहता है और दो चरम स्थितियों 'ब' तथा 'स' के बीच दोलन करता है।
कक्षा 6 का क्रियाकलाप
इस अध्याय का सरल लोलक
धागे से बँधा एक इरेजर/रबड़
धागे से बँधी छोटी धातु की गेंद — गोलक
हाथ में पकड़कर या किसी हुक से लटकाया गया
किसी दृढ़ आधार से लटकाया गया
एक ओर विस्थापित करके छोड़ने पर आगे-पीछे झूलता है
थोड़ा-सा विस्थापित करके छोड़ने पर दोलन-गति करने लगता है
यह झूलना बार-बार दोहराता है
इसकी गति आवर्ती है: यह अपने पथ को एक निश्चित समयावधि के पश्चात दोहराता है
फिर लोलक की अलग चर्चा क्यों: कक्षा 6 में हमने केवल इस गति का अवलोकन किया था। यहाँ हम इसका मापन करते हैं। तनी हुई डोरी पर लटका भारी गोलक बिना डगमगाए लंबे समय तक दोलन करता है, इसलिए एक दोलन में लगा समय — दोलनकाल — यथार्थता से मापा जा सकता है। यही गुण इसे घड़ी के योग्य बनाता है।
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