कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.1: आइए, निर्माण करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप एक साधारण जल-घड़ी बनाना चाहेंगे?
उत्तर

हाँ — और इसके लिए केवल एक प्रयुक्त पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल चाहिए। पूरा क्रियाकलाप क्रम से:

  1. पारदर्शी प्लास्टिक की एक प्रयुक्त बोतल (1/2 लीटर की अथवा बड़ी) लीजिए जिसमें ढक्कन भी लगा हो
  2. इसे लगभग बीच से काटकर दो भागों में विभाजित कीजिए [चित्र 8.5 (क)]।
  3. एक ड्राइंग-पिन से ढक्कन के बीच में एक छोटा छिद्र बनाइए [चित्र 8.5 (ख)]।
  4. ढक्कन लगी बोतल के ऊपरी भाग को उल्टा करके नीचे वाले आधे भाग के ऊपर रखिए [चित्र 8.5 (ग)]।
  5. ऊपरी भाग में जल भरिए। जल का स्तर स्पष्ट दिखे, इसके लिए स्याही की कुछ बूँदें अथवा रंग मिला दीजिए [चित्र 8.5 (घ)]।
  6. जल बूँद-बूँद कर नीचे गिरने लगेगा। घड़ी की सहायता से प्रत्येक मिनट के बाद जल के स्तर को अंकित करते जाइए, जब तक सारा जल नीचे न आ जाए।
अंकन समान दूरी पर क्यों नहीं बनते: जैसे-जैसे ऊपरी भाग का जल घटता है, छिद्र पर जल का दाब कम होता जाता है और टपकने की दर धीमी पड़ जाती है। यही कठिनाई प्राचीन भारत में भी आई थी — अर्थशास्त्र में वर्णित जल-निष्क्रमण प्रकार की घड़ी बहुत यथार्थ नहीं थी, क्योंकि जल का स्तर घटने पर प्रवाह की दर कम हो जाती थी। इसी कारण घटिका यंत्र का विकास हुआ।
स्वयं जाँचिए: छिद्र कील से नहीं, केवल एक ड्राइंग-पिन से बनाइए। बड़ा छिद्र बोतल को कुछ ही सेकंड में खाली कर देगा और कोई उपयोगी अंकन नहीं बन पाएगा।
प्र2.
आपकी जल-घड़ी तैयार है। क्या आप अब अनुमान लगा सकते हैं कि इसे उपयोग में कैसे लाया जाएगा?
उत्तर

जल को नीचे वाले भाग से वापस ऊपर के भाग में उड़ेल लीजिए और बूँद-बूँद कर नीचे गिरते जल के स्तर पर ध्यान दीजिए। हर बार जब जल आपके द्वारा अंकित किसी चिह्न तक पहुँचता है तो इसका अर्थ है कि एक और मिनट व्यतीत हो चुका है।

अर्थात यह घड़ी डायल देखकर नहीं, चिह्न गिनकर पढ़ी जाती है:

  • जल-स्तर पहले चिह्न पर → 1 मिनट पूरा।
  • जल-स्तर पाँचवें चिह्न पर → 5 मिनट पूरे।
  • किसी घटना का समय मापने के लिए — जैसे कोई मित्र 10 सवाल कितनी देर में हल करता है — जल छोड़ते ही आरंभ कीजिए और समाप्ति पर पहुँचा हुआ चिह्न देख लीजिए।
यह काम क्यों करती है: वही बोतल, वही छिद्र और उतना ही जल होने के कारण एक चिह्न से दूसरे चिह्न तक जल को उतना ही समय लगता है जितना अंकन करते समय लगा था। दोहराने योग्य प्रक्रम ही हर घड़ी का आधार है।
यह भी कीजिए: क्रियाकलाप 8.2 में बनाए लोलक के 10 दोलनों का समय अपनी जल-घड़ी से मापिए और कलाई घड़ी से तुलना कीजिए। तब समझ आएगा कि लोग बेहतर घड़ियों की खोज में क्यों लगे रहे।
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