प्र1.
क्या आप एक साधारण जल-घड़ी बनाना चाहेंगे?
उत्तर
हाँ — और इसके लिए केवल एक प्रयुक्त पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल चाहिए। पूरा क्रियाकलाप क्रम से:
- पारदर्शी प्लास्टिक की एक प्रयुक्त बोतल (1/2 लीटर की अथवा बड़ी) लीजिए जिसमें ढक्कन भी लगा हो।
- इसे लगभग बीच से काटकर दो भागों में विभाजित कीजिए [चित्र 8.5 (क)]।
- एक ड्राइंग-पिन से ढक्कन के बीच में एक छोटा छिद्र बनाइए [चित्र 8.5 (ख)]।
- ढक्कन लगी बोतल के ऊपरी भाग को उल्टा करके नीचे वाले आधे भाग के ऊपर रखिए [चित्र 8.5 (ग)]।
- ऊपरी भाग में जल भरिए। जल का स्तर स्पष्ट दिखे, इसके लिए स्याही की कुछ बूँदें अथवा रंग मिला दीजिए [चित्र 8.5 (घ)]।
- जल बूँद-बूँद कर नीचे गिरने लगेगा। घड़ी की सहायता से प्रत्येक मिनट के बाद जल के स्तर को अंकित करते जाइए, जब तक सारा जल नीचे न आ जाए।
अंकन समान दूरी पर क्यों नहीं बनते: जैसे-जैसे ऊपरी भाग का जल घटता है, छिद्र पर जल का दाब कम होता जाता है और टपकने की दर धीमी पड़ जाती है। यही कठिनाई प्राचीन भारत में भी आई थी — अर्थशास्त्र में वर्णित जल-निष्क्रमण प्रकार की घड़ी बहुत यथार्थ नहीं थी, क्योंकि जल का स्तर घटने पर प्रवाह की दर कम हो जाती थी। इसी कारण घटिका यंत्र का विकास हुआ।
स्वयं जाँचिए: छिद्र कील से नहीं, केवल एक ड्राइंग-पिन से बनाइए। बड़ा छिद्र बोतल को कुछ ही सेकंड में खाली कर देगा और कोई उपयोगी अंकन नहीं बन पाएगा।