कुतूहल अध्याय 8 एक वैज्ञानिक की तरह सोचिए!

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मान लीजिए कि आप गैलीलियो हैं और लोलकों को लेकर प्रयोग कर रहे हैं। सोचिए कि आपके अन्वेषण के क्या-क्या बिंदु होंगे? वे कौन से प्रश्न होंगे जिनके उत्तर पाने के लिए आप प्रयोग करेंगे? क्या सभी लोलकों के दोलनकाल समान होते हैं? इसकी जाँच आप किस प्रकार करेंगे?
उत्तर

वैज्ञानिक सबसे पहले उन सभी बातों की सूची बनाता है जो दोलनकाल को बदल सकती हैं, और फिर उन्हें एक-एक करके बदलता है। ये बातें हो सकती हैं:

  1. लोलक की लंबाई (आधार से गोलक के केंद्र तक),
  2. गोलक का द्रव्यमान,
  3. गोलक का पदार्थ (लोहा, पत्थर, काँच),
  4. गोलक को एक ओर कितना विस्थापित किया गया (दोलन का विस्तार),
  5. वह स्थान जहाँ प्रयोग किया जा रहा है।

पूछने योग्य प्रश्न: क्या लंबा धागा धीमे दोलन कराता है? क्या भारी गोलक तेज दोलन करता है? दोलन छोटा होने पर क्या वह धीमा पड़ता है? क्या दिल्ली और किसी पहाड़ी पर दोलनकाल एक-सा रहेगा?

क्या सभी लोलकों के दोलनकाल समान होते हैं? नहीं। भिन्न लंबाई के लोलकों के दोलनकाल भिन्न होते हैं। किंतु एक ही लंबाई के सभी लोलकों का किसी एक स्थान पर दोलनकाल समान होता है, चाहे गोलक किसी भी पदार्थ का हो।

जाँच कैसे करें — निष्पक्ष प्रयोग का नियम: एक समय में केवल एक ही बात बदलिए, शेष सब वैसा ही रखिए। लंबाई की जाँच के लिए वही गोलक रखकर केवल धागा बदलिए; द्रव्यमान की जाँच के लिए वही लंबाई रखकर केवल गोलक बदलिए। दो बातें साथ बदल दीं तो कभी नहीं कह पाएँगे कि अंतर किसके कारण आया।
क्या आप जानते हैं? गैलीलियो के पास विराम-घड़ी नहीं थी। गिरजाघर में बैठे हुए उन्होंने झूलते लैंप का समय अपनी नाड़ी के स्पंदन से मापा और पाया कि प्रत्येक दोलन में समान समय लगता है। इसी अवलोकन से आगे चलकर हाइगेन्स की लोलक घड़ी बनी।
प्र2.
क्रियाकलाप 8.2 को एक ही गोलक के साथ दो या तीन अलग-अलग लंबाई के लोलक बनाकर दोहराइए। क्या दोलनकाल बदलता है? यदि ऐसा होता है तो दोलनकाल पर लंबाई का क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर

हाँ, दोलनकाल बदलता है। एक ही गोलक के साथ लिए गए प्रतिदर्श पाठ्यांक:

लोलक की लंबाई10 दोलनों में लगा समयदोलनकालप्रेक्षण
25 cm10.0 s1.0 sछोटा लोलक — शीघ्र दोलन करता है
50 cm14.2 s1.42 sअधिक लंबा — धीमा
100 cm20.0 s2.0 sसबसे लंबा — सबसे धीमा

लंबाई का प्रभाव: लोलक जितना लंबा होगा, उसका दोलनकाल उतना ही अधिक होगा। लंबा लोलक धीमे और छोटा लोलक तेज दोलन करता है। यह भी ध्यान दीजिए कि लंबाई दोगुनी करने पर दोलनकाल दोगुना नहीं होता — 25 cm से 100 cm (चार गुनी लंबाई) करने पर दोलनकाल केवल दोगुना हुआ।

यह इतना उपयोगी क्यों है: चूँकि दोलनकाल लंबाई पर एक निश्चित ढंग से निर्भर करता है, इसलिए घड़ी बनाने वाला लोलक घड़ी को समंजित कर सकता है। हाइगेन्स की घड़ी धीमी चलने पर गोलक को थोड़ा ऊपर उठा दिया जाता था (छोटा लोलक, कम दोलनकाल, तेज चाल)। आज भी लोलक घड़ियों में गोलक के नीचे यह समंजन-पेच लगा होता है।
यह भी कीजिए: लगभग 1 मीटर के लोलक का दोलनकाल 2 सेकंड के आस-पास होता है — एक ओर से दूसरी ओर जाने में ठीक एक सेकंड। इसीलिए पुरानी दीवार घड़ियाँ इतनी लंबी होती थीं।
प्र3.
यदि लंबाई बदलने का प्रभाव दोलनकाल पर होता है तो क्या गोलक का द्रव्यमान भी इसको प्रभावित करता है? एक नियत लंबाई की डोरी और भिन्न-भिन्न द्रव्यमान के गोलकों से लोलक बनाइए और प्रत्येक से क्रियाकलाप 8.2 दोहराकर इसकी जाँच कीजिए। क्या आप दोलनकालों में कोई अंतर पाते हैं?
उत्तर

कोई अंतर नहीं मिलता। लंबाई 100 cm पर स्थिर रखकर केवल गोलक बदलने पर:

प्रयुक्त गोलक (लंबाई 100 cm नियत)10 दोलनों में लगा समयदोलनकाल
लोहे की छोटी गेंद (हल्की)20.0 s2.0 s
धातु की भारी गेंद20.1 s2.01 s
लगभग उसी आमाप का पत्थर19.9 s1.99 s

यह मामूली अंतर केवल मापन-त्रुटि है। अतः बॉक्स का निष्कर्ष सिद्ध होता है: सरल लोलक का दोलनकाल इसकी लंबाई पर निर्भर करता है किंतु गोलक के द्रव्यमान पर नहीं। किसी एक स्थान पर एक ही लंबाई के सभी लोलकों का दोलनकाल समान होता है।

भारी गोलक पीछे क्यों नहीं रह जाता: भारी गोलक को गुरुत्व अधिक बल से खींचता है, किंतु भारी होने के कारण उसे गति में लाना भी उतना ही कठिन होता है। दोनों प्रभाव आपस में कट जाते हैं, इसलिए दोलन में उतना ही समय लगता है। इसी कारण एक साथ गिराए गए भारी और हल्के पत्थर धरती पर एक साथ पहुँचते हैं — यह भी गैलीलियो से जुड़ी खोज है।
स्वयं जाँचिए: डोरी की लंबाई सदैव गोलक के केंद्र तक मापिए। छोटे गोलक के स्थान पर बहुत बड़ा गोलक बाँधकर यदि लंबाई फिर से न मापी जाए तो लंबाई चुपके से बदल जाती है और आप गलती से यह निष्कर्ष निकाल लेंगे कि द्रव्यमान का प्रभाव पड़ता है।
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