वैज्ञानिक सबसे पहले उन सभी बातों की सूची बनाता है जो दोलनकाल को बदल सकती हैं, और फिर उन्हें एक-एक करके बदलता है। ये बातें हो सकती हैं:
- लोलक की लंबाई (आधार से गोलक के केंद्र तक),
- गोलक का द्रव्यमान,
- गोलक का पदार्थ (लोहा, पत्थर, काँच),
- गोलक को एक ओर कितना विस्थापित किया गया (दोलन का विस्तार),
- वह स्थान जहाँ प्रयोग किया जा रहा है।
पूछने योग्य प्रश्न: क्या लंबा धागा धीमे दोलन कराता है? क्या भारी गोलक तेज दोलन करता है? दोलन छोटा होने पर क्या वह धीमा पड़ता है? क्या दिल्ली और किसी पहाड़ी पर दोलनकाल एक-सा रहेगा?
क्या सभी लोलकों के दोलनकाल समान होते हैं? नहीं। भिन्न लंबाई के लोलकों के दोलनकाल भिन्न होते हैं। किंतु एक ही लंबाई के सभी लोलकों का किसी एक स्थान पर दोलनकाल समान होता है, चाहे गोलक किसी भी पदार्थ का हो।