अन्वेषण अध्याय 7 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप कुछ ऐसे प्रौद्योगिकी विकास के विषय में सोच सकते हैं, जिसने आपके आस-पास के लोगों और समुदाय के जीवन को प्रभावित किया है? इस विषय पर अपने घर और आस-पड़ोस के वरिष्ठ सदस्यों से चर्चा करें।
उत्तर

वरिष्ठ सदस्यों से वास्तविक उत्तर कैसे निकालें। यह मत पूछिए कि “क्या प्रौद्योगिकी ने जीवन बदला?” — सब हाँ कहेंगे। किसी विशेष कार्य और विशेष समय के विषय में पूछिए :

  • पहले दूसरे नगर में रहने वाले रिश्तेदार को धन कैसे भेजते थे?
  • जल कहाँ से लाते थे और कितना समय लगता था?
  • भोजन किस पर पकता था और ईंधन कौन लाता था?
  • यह कैसे पता चलता था कि कहीं नौकरी निकली है, या कोई रिश्तेदार बीमार है?
  • रात में कोई बीमार पड़ जाए तो परिवार क्या करता था?
प्रौद्योगिकी विकाससमुदाय के लिए क्या बदला
मोबाइल फोन और यू.पी.आई.प्रवासी श्रमिक उसी शाम घर धन भेज देता है, नकद लेकर यात्रा नहीं करनी पड़ती; सब्जी विक्रेता बिना खुले पैसे के भुगतान ले लेता है
एल.पी.जी. संयोजनईंधन बीनने में लगने वाले प्रतिदिन के घंटे बचे — जो प्रायः महिलाओं और बालिकाओं के थे — और घर के भीतर का धुआँ बहुत घटा
विद्युत, और अब सौर पैनल एवं एल.ई.डी.अँधेरे के बाद पढ़ाई; दुकान में शीतलन; सिंचाई के लिए पंप
नलकूप, बूँद-सिंचाई, ट्रैक्टर, थ्रेशरकृषि में प्रति श्रमिक अधिक उत्पादन — अध्याय की वही बात कि मशीनों का बढ़ता उपयोग श्रम पर निर्भरता कम करता है
मौसम की पूर्व-सूचना और जी.पी.एस.किसान कार्य की योजना बनाते हैं; परिवहन करने वाले लघुत्तम मार्ग खोजते हैं
ऑनलाइन अधिगम और टेली-चिकित्सा (चित्र 7.22)जिस गाँव में न महाविद्यालय है न अस्पताल, वहाँ पाठ्यक्रम और विशेषज्ञ की राय पहुँच जाती है
स्वयं (SWAYAM) और नेशनल करियर सर्विसकक्षा 9 से आगे रोबोटिक्स, जल-कृषि, वस्त्र-मुद्रण के निःशुल्क पाठ्यक्रम; प्लंबिंग से लेखांकन तक रोजगार की सूचनाएँ
नमूना उत्तर: “मेरी दादी ने कहा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा परिवर्तन फोन नहीं, अपितु बस मार्ग और पक्की सड़क थी। उससे पहले बीमार व्यक्ति को खाट पर मुख्य सड़क तक ले जाया जाता था। सड़क बनने के बाद प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बीस मिनट की दूरी पर आ गया, बालिकाएँ पास के कस्बे के उच्च विद्यालय जाने लगीं, और सब्जी उगाने वाले उसी सुबह मंडी भेज पाने लगे, सस्ते में गाँव में बेचने के बदले। आधारभूत संरचना के एक ही टुकड़े ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आय — तीनों बदल दिए।”
दोनों पक्षों के साथ न्याय कीजिए। इन्हीं साक्षात्कारों में हानियाँ भी निकलती हैं — वह बुनकर जो मिल के कपड़े से नहीं लड़ सका, वह पत्र-लेखक जिसका काम समाप्त हो गया, वह तालाब जो सबके बोरवेल खोदने पर सूख गया। अध्याय भी यही संतुलन चाहता है : प्रौद्योगिकी सहायक है, किंतु पृष्ठ 180 स्मरण कराता है कि उत्पादन उन्हीं संसाधनों को क्षति भी पहुँचा सकता है जिन पर वह टिका है। अच्छा प्रतिवेदन दोनों दर्ज करता है।
प्र2.
किसी ऐसे आविष्कार के विषय में सोचें जिसे आप किसी समस्या के समाधान के लिए बनाना चाहेंगे। उससे संबंधित जानकारी जैसे— उसका नाम, उसका काम, वह क्या करता है, उसके स्वरूप का चित्र या रेखाचित्र आदि एक कागज पर अंकित करें और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें।
उत्तर

किसी ऐसी समस्या से आरंभ कीजिए जो आपने वास्तव में किसी को झेलते देखा हो, न कि किसी ऐसी वस्तु से जो आप स्वयं चाहते हैं। चित्र 7.16 भी यही क्रम रखता है — उद्यमी पहले “समस्या की पहचान” करता है, तभी उसका नया समाधान खोजता है।

आपके कागज पर ये सात शीर्षक होने चाहिए —

  1. समस्या, एक वाक्य में, और यह किसकी समस्या है।
  2. आविष्कार का नाम
  3. वह क्या करता है — एक पंक्ति में।
  4. वह कैसे काम करता है — क्रम से चरण।
  5. नामांकित रेखाचित्र। केवल बाहरी आकृति नहीं, भागों के नाम भी लिखिए।
  6. इसे बनाने में कौन-से इनपुट्स लगेंगे — भूमि, श्रम, पूँजी, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी, एक-एक करके। विद्यार्थी प्रायः यही भाग छोड़ देते हैं, और यही भाग यह अध्याय परख रहा है।
  7. इसे कौन खरीदेगा और लगभग किस मूल्य पर, तथा क्या गलत हो सकता है।
नमूना उत्तर — ‘ठंडा ठेला’, सब्जी के ठेले के लिए सौर शीत-पेटी
  • समस्या: हमारे क्षेत्र के पंद्रह सब्जी विक्रेता (देखिए पृष्ठ 165 की तालिका) प्रतिदिन सायं तक अपनी पत्तेदार सब्जियों का एक भाग फेंक देते हैं, क्योंकि वे धूप में मुरझा जाती हैं। उनका पूरा माल शीघ्र नष्ट होने वाला है और उसे रखने की कोई व्यवस्था नहीं।
  • यह क्या करता है: बिना किसी विद्युत संयोजन के, ठेले पर ही लगभग 30 किग्रा पत्तेदार सब्जियों को दिन भर लगभग 10 डिग्री सेल्सियस पर रखता है।
  • यह कैसे काम करता है: ठेले की छत ही 100 वाट का लचीला सौर पैनल है। वह एक छोटी बैटरी चार्ज करता है, जो 12 वोल्ट का पंखा चलाती है; पंखा पेटी के भीतर बर्फ की सिल्लियों के ऊपर से हवा बहाता है। एक साधारण तापनियंत्रक पेटी के पर्याप्त ठंडा होते ही पंखा बंद कर देता है। एक नाली पिघला पानी बोतल में ले जाती है, जिससे सड़क पर कुछ नहीं टपकता।
  • इनपुट्स: भूमि — भूखंड नहीं चाहिए, किंतु इसमें लगा एल्युमिनियम, प्लास्टिक और सिलिकॉन सब खनिजों से आते हैं; श्रम — ढाँचा बनाने वाला और पैनल जोड़ने वाला विद्युतकर्मी; पूँजी — पैनल, बैटरी, पंखा, ऊष्मारोधी पेटी, और एक इकाई बनाने में लगभग ₹12,000; उद्यमिता — मैं पाँच बनवाकर विक्रेताओं को एक महीने निःशुल्क दूँगा और उसके बाद किराया लूँगा; प्रौद्योगिकी — सौर फोटोवोल्टाइक और तापनियंत्रक।
  • कौन खरीदेगा और क्या गलत हो सकता है: विक्रेता तभी देंगे जब यह अपनी लागत से अधिक बचाए, इसलिए पूरा विचार एक ही आँकड़े पर टिका है — वे इस समय प्रतिदिन कितना माल फेंकते हैं। यदि वह ₹50 से कम है, तो आविष्कार असफल है, और ईमानदारी यह है कि बनाने से पहले यह पता कर लिया जाए।
अंतिम बिंदु सबसे महत्वपूर्ण क्यों है: उद्यमी “समय और धन का निवेश कर जोखिम उठाता है”, और उस जोखिम को घटाने का सबसे सस्ता उपाय है — व्यय से पहले अपनी मान्यता को परखना। तीन विक्रेताओं से दस मिनट पूछ लेना, एक सुंदर रेखाचित्र से अधिक मूल्यवान है।
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