प्र1.
क्या आपने देखा है कि किस प्रकार पुरानी प्रौद्योगिकी को एक नई और उत्तम प्रौद्योगिकी से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है?
उत्तर
हाँ — और अध्याय का तर्क यह है कि ऐसा इसलिए होता है कि नई प्रौद्योगिकी वही काम सरल, शीघ्र या सस्ते ढंग से कर देती है, इसलिए नहीं कि पुरानी काम करना बंद कर देती है।
| पुरानी प्रौद्योगिकी | किसने स्थान लिया | वास्तव में क्या सुधरा |
|---|---|---|
| डाक से पत्र भेजना | ई-मेल | अध्याय का अपना उदाहरण — हम शीघ्रता से और कम लागत में संपर्क कर पाते हैं |
| नकद ले जाना, बिल के लिए पंक्ति में खड़े रहना | यू.पी.आई. (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) | एक बटन दबाकर भुगतान |
| रास्ता पूछना, कागज का नक्शा | जी.पी.एस. | यह माल ढोने के लिए लघुत्तम मार्ग खोज सकता है — अर्थात वही ट्रक एक दिन में अधिक पहुँचाता है |
| अनुभव से मौसम का अनुमान | फोन पर पहले से मौसम की जानकारी | किसान बुवाई, छिड़काव या कटाई का समय तय कर सकता है |
| हाथ से उर्वरक का छिड़काव | ड्रोन (चित्र 7.18) | अधिक क्षेत्र शीघ्र, और श्रमिक का रसायनों से संपर्क कम |
किंतु अध्याय तुरंत एक चेतावनी भी जोड़ता है, और वही अधिक रोचक है : प्रौद्योगिकी की प्रगति का अर्थ सदैव पुरानी प्रौद्योगिकियों को बदलना नहीं होता। कुछ, जैसे चरखी (पुली) और ठेलागाड़ी, आज भी उपयोग में हैं — आप उन्हें चित्र 7.20 में निर्माण स्थल पर और चित्र 7.21 में नौकाओं में देख सकते हैं। कुछ प्रारंभिक प्रौद्योगिकियाँ, जो प्राचीन काल से विद्यमान हैं, आज भी काम आ रही हैं।
कुछ पुरानी प्रौद्योगिकियाँ क्यों टिकी रहती हैं: वे सस्ती और सरल हैं, उन्हें विद्युत या नेटवर्क नहीं चाहिए, उपयोग करने वाला ही उन्हें ठीक कर लेता है, और वे ठीक वहीं काम करती हैं जहाँ आधुनिक विकल्प असुविधाजनक हो — नाव पर, मचान पर, बिजली गुल होने पर। ठेलागाड़ी कोई असफल मशीन नहीं जो प्रतिस्थापन की प्रतीक्षा कर रही हो; अपने काम के लिए वह आज भी सर्वोत्तम उत्तर है। कसौटी कभी “यह पुरानी है क्या?” नहीं होती, अपितु “यहाँ, इस लागत पर, क्या कोई और इसे इससे बेहतर करता है?” होती है।
परीक्षा के लिए संकेत: यदि पूछा जाए कि क्या नई प्रौद्योगिकी सदैव पुरानी को हटा देती है, तो उत्तर नहीं है, और पुस्तक के दिए दो उदाहरण — चरखी और ठेलागाड़ी — ही उद्धृत कीजिए।