अन्वेषण अध्याय 7 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऊपर दिए गए उदाहरण से युवा उद्यमी कौन-कौन सी बातें सीख सकते हैं?
उत्तर

जे.आर.डी. टाटा के जीवन से सीधे पाँच सीखें निकलती हैं, और हर एक चित्र 7.16 के किसी कार्य से मेल खाती है।

सीखउदाहरण में इसका प्रमाण
1. ऐसी समस्या हल कीजिए जिसका देश को अभी पता भी नहीं।उन्होंने 1932 में ‘टाटा एयरलाइन्स’ आरंभ की, जब भारत में कोई हवाई सेवा थी ही नहीं। यही आगे चलकर एयर इंडिया बनी। सबसे पहले होना असुविधाजनक है, और वहीं सबसे बड़ा लाभ छिपा होता है
2. व्यवसाय की परख केवल उसके लाभ से नहीं होती।उनका मानना था कि व्यवसायों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, अपितु समाज की सेवा करना भी होना चाहिए — यही विचार भारत ने आगे चलकर 2014 में सी.एस.आर. कानून के रूप में लिखा
3. काम करने वालों का ध्यान रखिए।वे अपने कर्मचारियों की देखभाल करने और उन्हें उत्तम कार्य-परिस्थितियाँ देने के लिए प्रसिद्ध थे — इस अध्याय की भाषा में, उन्होंने अपनी मानव पूँजी में निवेश किया
4. एक सफल उत्पाद पर मत टिकिए, विस्तार बनाइए।उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने इस्पात, वाहन निर्माण, विद्युत उत्पादन एवं वितरण और रसायन निर्माण में विस्तार किया — ऐसा समूह किसी एक उद्योग के बुरे दशक में भी टिका रहता है
5. चरित्र ही दीर्घकालीन संपत्ति है।वे “ईमानदार, परिश्रमी एवं उन्नत विचारों वाले व्यक्ति” थे। 1992 में देश की सेवा के लिए उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया
समय-मान का अनुभव कीजिए
जन्म 1904 · टाटा एयरलाइन्स 1932 में → तब आयु लगभग 28 वर्ष
भारत रत्न 1992 में → हवाई सेवा के 60 वर्ष बाद, लगभग 88 वर्ष की आयु में
इन तिथियों में छिपी सीख: उद्यमिता छोटा खेल नहीं है। जिन कार्यों के लिए वे स्मरण किए जाते हैं, उनमें से किसी का प्रतिफल शीघ्र नहीं मिला। इस उदाहरण से युवा उद्यमी को महत्वाकांक्षा जितना ही धैर्य भी लेना चाहिए — मान्यता जोखिम उठाने के छह दशक बाद आई।
प्र2.
क्या उद्यमी का वर्तमान ज्ञान तात्कालिक समस्या के समाधान में सहायक होता है अथवा इसके लिए उन्हें अन्य स्रोतों की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर

दोनों — और सच्चा उत्तर यह है कि वर्तमान ज्ञान आवश्यक तो है, किंतु कभी पर्याप्त नहीं।

वर्तमान ज्ञान क्या करता है। वही उद्यमी को समस्या पहचानने योग्य बनाता है। रत्ना देख सकी कि राजमार्ग के यात्रियों को अच्छा भोजन नहीं मिलता, क्योंकि वह उस सड़क को और भोजन को जानती थी। जे.आर.डी. टाटा भारतीय हवाई सेवा की कल्पना कर सके, क्योंकि वे स्वयं विमानन को समझते थे। वर्तमान ज्ञान यह भी बताता है कि कौन-सा जोखिम उठाने योग्य है — साहसिक निर्णय और दुस्साहस का अंतर प्रायः केवल जानकारी का होता है।

यह कहाँ कम पड़ जाता है। परिभाषा से ही उद्यमी वह कर रहा होता है जो उस स्थान पर पहले नहीं हुआ, इसलिए किसी के पिछले अनुभव में उसका पूरा उत्तर नहीं होता। अध्याय हर चरण पर उद्यमी को अपने से बाहर जाते दिखाता है —

  • चित्र 7.23 : अनुसंधान एवं विकास समूह नई विशेषताओं पर विचार-मंथन करता है; सॉफ्टवेयर, विद्युत एवं यांत्रिक अभियंताओं का समूह तथा परियोजना प्रबंधक अपनी विशेषज्ञता से उत्पाद विकसित करते हैं। उद्यमी का कार्य है संसाधनों के उपयोग का मार्गदर्शन देना — सब कुछ स्वयं जानना नहीं।
  • चित्र 7.16 कहता है कि उद्यमी उत्पादन के विभिन्न कारकों को संयोजित करता है। ‘संयोजित करना’ का अर्थ ही है बाहर जाकर वह लाना जो आपके पास नहीं है।
  • पूँजी बैंक या शेयर बाजार से आती है — यह भी एक भिन्न प्रकार का बाहरी स्रोत है।
  • भारत के प्राचीन शिल्पकार भी इसी ढंग से काम करते थे : ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिला “और इसी क्रम में नए ज्ञान का सृजन भी हुआ”, और शिल्पशास्त्र इसीलिए थे कि किसी मूर्तिकार को शून्य से आरंभ न करना पड़े।
इसे स्पष्ट रूप से कहने का तरीका: वर्तमान ज्ञान बताता है कि कौन-सी समस्या उठाई जाए; अन्य स्रोत बताते हैं कि उसे कैसे हल किया जाए। जो उद्यमी दूसरों से पूछने से बचता है, वह केवल उन्हीं समस्याओं तक सीमित रह जाता है जिनसे वह पहले मिल चुका है — और ऐसी समस्याएँ बहुत थोड़ी होती हैं, तथा प्रायः महत्वपूर्ण भी नहीं। आज ऐसे स्रोतों में स्वयं (SWAYAM) जैसे निःशुल्क मंच, विशेषज्ञ कर्मचारी, आपूर्तिकर्ता और सबसे बढ़कर ग्राहक सम्मिलित हैं, जो सबसे शीघ्र बताते हैं कि आपके विचार में कमी कहाँ है।
प्र3.
क्या किसी उद्यमी की एकमात्र प्रेरणा लाभ कमाना ही होना चाहिए? क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर

नहीं — किंतु लाभ एक आवश्यक प्रेरणा अवश्य है, और आवश्यक तथा एकमात्र का अंतर स्पष्ट रखना चाहिए।

लाभ एकमात्र प्रेरणा क्यों नहीं हो सकता। अध्याय बताता है कि उद्यमी और क्या-क्या चाहता है —

  • उद्यमी का उद्देश्य नई वस्तुओं एवं सेवाओं को बाजार में लाकर समस्या का समाधान प्रस्तुत करना होता है, जिससे समाज और देश को लाभ पहुँच सके।
  • वे रोजगार के अवसर सृजित करते हैं और लोगों को आजीविका उपार्जित करने में सहायता करते हैं — रत्ना के सात कर्मचारी।
  • बदले में उन्हें अपने सपनों को साकार होते और लोगों की सेवा करते देख गहरी संतुष्टि मिलती है।
  • चित्र 7.16 “नवाचार के माध्यम से समाज के कल्याण में योगदान” को उद्यमी के पाँच कार्यों में गिनता है।
  • जे.आर.डी. टाटा इसका उदाहरण हैं : उनका मानना था कि व्यवसाय का उद्देश्य केवल लाभ नहीं, समाज की सेवा भी है, और उन्होंने कर्मचारियों की परिस्थितियों का ध्यान रखा।

फिर भी लाभ क्यों आवश्यक है। अधिशेष के बिना व्यवसाय न ऋण और ब्याज लौटा सकता है, न श्रमिकों को उचित पारिश्रमिक दे सकता है, न बेहतर प्रौद्योगिकी खरीद सकता है, और न किसी बुरे वर्ष को झेल सकता है — अर्थात वह किसी की सेवा जारी ही नहीं रख सकता। लाभ वह कसौटी है जो बताती है कि ग्राहक ने उस वस्तु को इनपुट्स की लागत से अधिक मूल्यवान माना। जो व्यवसाय कभी लाभ नहीं कमाता, वह समाज की भूमि, श्रम और पूँजी खपाकर उससे कम लौटा रहा है।

संतुलित स्थिति: लाभ को जीवित रहने की शर्त मानिए और उद्देश्य को जीने का कारण — भोजन आवश्यक है, किंतु दिन का लक्ष्य नहीं। यही कारण है कि भारत 2014 में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पर कानून बनाने वाला विश्व का प्रथम देश बना, जिसमें कंपनियों को पिछले तीन वर्षों के औसत लाभ का 2 प्रतिशत सामाजिक गतिविधियों पर व्यय करना अनिवार्य है। यह कानून लाभ समाप्त नहीं करता; वह चाहता है कि उसका एक अंश उसी समाज को लौटे जिसके संसाधनों से वह बना।
प्र4.
एक सफल उद्यमी बनने के लिए व्यक्तित्व में और कौन-से गुणों की आवश्यकता होती है?
उत्तर

चित्र 7.16 के पाँच कार्यों के आगे, वे गुण जो इन कार्यों को वास्तव में कर पाने योग्य बनाते हैं —

गुणयह कार्य के लिए क्यों आवश्यक है
दृढ़ संकल्प और अटलताअध्याय स्वयं कहता है कि उद्यमी समस्या की पहचान कर उसका समाधान प्रस्तुत करने में डटा रहता है। अधिकांश विचार सफल होने से पहले कई बार असफल होते हैं; उद्यमी को अलग करने वाला गुण प्रतिभा नहीं, रुकने से इनकार है
जोखिम उठाने की क्षमतावह अपना धन और समय बिना किसी वचन के लगाता है — और ऋण चुकता होने तक चैन से सो भी सकना चाहिए
दूरदृष्टि और कल्पनाशीलताजिस देश में कोई हवाई सेवा न हो वहाँ एयरलाइन देख लेना, या सूने राजमार्ग पर भोजनालय
निर्णय-क्षमताचित्र 7.16 : व्यापार संचालन और कार्य प्रणाली से संबंधित प्रमुख निर्णय लेता है — प्रायः तब, जब सारे तथ्य सामने नहीं होते
ईमानदारी और सत्यनिष्ठाजे.आर.डी. टाटा के उदाहरण में नामित। आपूर्तिकर्ता उधार, बैंक ऋण और कर्मचारी अपना समय उसी को देते हैं जिसकी बात टिकती है
लोगों के साथ काम करने की योग्यताअभियंताओं, श्रमिकों, ऋणदाताओं और ग्राहकों को साथ लिए बिना “उत्पादन के विभिन्न कारकों को संयोजित” नहीं किया जा सकता
जिज्ञासा और सीखते रहने की तत्परतापुरानी प्रौद्योगिकी को नई प्रतिस्थापित करती रहती है; जो उद्यमी सीखना बंद कर देता है, वह कल का व्यवसाय चला रहा होता है
संवेदनशीलताउस ग्राहक के प्रति भी जिसकी समस्या हल करनी है और उन श्रमिकों के प्रति भी जो उसे हल करते हैं — यही जे.आर.डी. टाटा की कार्य-परिस्थितियों संबंधी चिंता का आधार था
अनुशासन और बारीकियों पर ध्यानअध्याय में वर्णित जर्मन कार्यनिष्ठा वस्तुतः यही गुण है, राष्ट्र के स्तर पर
कक्षा में इस पर बहस कीजिए: इनमें से लगभग कोई भी गुण जन्मजात नहीं है। अटलता, निर्णय-क्षमता और बारीकियों पर ध्यान अभ्यास से बढ़ते हैं — और यही दावा अध्याय कौशल के विषय में करता है : “किसी गतिविधि या कार्य को अभ्यास और प्रशिक्षण द्वारा सुचारु रूप से करने की क्षमता”। इस दृष्टि से उद्यमिता स्वयं मानव पूँजी का ही एक रूप है।
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