जे.आर.डी. टाटा के जीवन से सीधे पाँच सीखें निकलती हैं, और हर एक चित्र 7.16 के किसी कार्य से मेल खाती है।
| सीख | उदाहरण में इसका प्रमाण |
|---|---|
| 1. ऐसी समस्या हल कीजिए जिसका देश को अभी पता भी नहीं। | उन्होंने 1932 में ‘टाटा एयरलाइन्स’ आरंभ की, जब भारत में कोई हवाई सेवा थी ही नहीं। यही आगे चलकर एयर इंडिया बनी। सबसे पहले होना असुविधाजनक है, और वहीं सबसे बड़ा लाभ छिपा होता है |
| 2. व्यवसाय की परख केवल उसके लाभ से नहीं होती। | उनका मानना था कि व्यवसायों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, अपितु समाज की सेवा करना भी होना चाहिए — यही विचार भारत ने आगे चलकर 2014 में सी.एस.आर. कानून के रूप में लिखा |
| 3. काम करने वालों का ध्यान रखिए। | वे अपने कर्मचारियों की देखभाल करने और उन्हें उत्तम कार्य-परिस्थितियाँ देने के लिए प्रसिद्ध थे — इस अध्याय की भाषा में, उन्होंने अपनी मानव पूँजी में निवेश किया |
| 4. एक सफल उत्पाद पर मत टिकिए, विस्तार बनाइए। | उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने इस्पात, वाहन निर्माण, विद्युत उत्पादन एवं वितरण और रसायन निर्माण में विस्तार किया — ऐसा समूह किसी एक उद्योग के बुरे दशक में भी टिका रहता है |
| 5. चरित्र ही दीर्घकालीन संपत्ति है। | वे “ईमानदार, परिश्रमी एवं उन्नत विचारों वाले व्यक्ति” थे। 1992 में देश की सेवा के लिए उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया |
जन्म 1904 · टाटा एयरलाइन्स 1932 में → तब आयु लगभग 28 वर्ष
भारत रत्न 1992 में → हवाई सेवा के 60 वर्ष बाद, लगभग 88 वर्ष की आयु में