अन्वेषण अध्याय 7 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने क्षेत्र के किसी कारखाने की पहचान करें। अनुमान लगाएँ कि कारखाने के निर्माण में कितनी पूँजी का निवेश हुआ है। यह भी पता करें कि अपने उत्पाद को अंतिम रूप से उत्पादित करने के लिए कारखाने में किस प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर

अनुमान कैसे बनाएँ। कारखाने का लेखा-जोखा आपको नहीं मिलेगा, इसलिए अनुमान वैसे लगाइए जैसे अर्थशास्त्री लगाता है — मद-दर-मद, और स्पष्ट लिखिए कि यह अनुमान है। प्रबंधक से, किसी आपूर्तिकर्ता से, या स्थानीय भूमि दरों से जानकारी लीजिए। चार मदें अवश्य लीजिए —

  1. भूमि एवं भवन — भूखंड का क्षेत्रफल × स्थानीय दर, और शेड की लागत।
  2. मशीनें एवं उपकरण — मुख्य मशीनों की सूची और उनका लगभग मूल्य।
  3. अन्य स्थिर पूँजी — विद्युत की फिटिंग, जनरेटर, जल संयोजन, कंप्यूटर, फर्नीचर, वाहन।
  4. कार्यशील पूँजी — वह धन जो सदा कच्चे माल, वेतन और बिना बिके माल में फँसा रहता है। लोग इसे भूल जाते हैं, जबकि यह प्रायः कुल का पाँचवाँ से चौथाई भाग होता है।
नमूना उत्तर — हमारे कस्बे के छोर पर स्टील के बर्तनों की एक छोटी इकाई:
पूँजी की मदअनुमानित राशि
भूखंड (लगभग 1,000 वर्ग मीटर) एवं कारखाना शेड₹60 लाख
मशीनें — पावर प्रेस, डीप-ड्रॉइंग प्रेस, खराद, बफिंग एवं पॉलिशिंग मशीनें, वेल्डिंग सेट₹35 लाख
विद्युत फिटिंग, जनरेटर, जल संयोजन₹8 लाख
वितरण का वाहन₹7 लाख
कंप्यूटर, कार्यालय फर्नीचर, तौल एवं परीक्षण उपकरण₹3 लाख
कार्यशील पूँजी (स्टील शीट, वेतन, बिना बिका माल)₹12 लाख
कुल अनुमानित पूँजी
= 60 + 35 + 8 + 7 + 3 + 12  (₹ लाख)
= ₹125 लाख = ₹1.25 करोड़

भूमि एवं भवन का भाग = 60 ÷ 125 = 48%
मशीनों का भाग = 35 ÷ 125 = 28%
“मालिक ने बताया कि धन उनकी अपनी बचत और एम.एस.एम.ई. योजना के अंतर्गत बैंक ऋण से आया, जिस पर वे प्रतिमाह ब्याज देते हैं।”

प्रश्न का दूसरा भाग — उपकरण। मशीनों की सूची उसी क्रम में बनाइए जिस क्रम से माल उनमें से गुजरता है, क्योंकि इससे सूची व्याख्या बन जाती है। इस इकाई में : स्टील शीट शियरिंग मशीन पर कटती है, डीप-ड्रॉइंग प्रेस पर आकार लेती है, खराद पर किनारे बराबर होते हैं, जोड़ वेल्ड होते हैं, सतह बफ और पॉलिश होती है, फिर धुलाई, जाँच और पैकिंग होती है।

ये आँकड़े क्या बता रहे हैं: इस इकाई में लगभग आधी पूँजी भूमि और भवन में बँधी है — जो स्वयं कुछ नहीं बनाते — और केवल लगभग एक-चौथाई उन मशीनों में जो वास्तव में धातु को आकार देती हैं। छोटी निर्माण इकाइयों में यह सामान्य है, और यही एक कारण है कि नया उद्यमी शेड खरीदने के बजाय किराए पर लेना पसंद करता है, ठीक जैसे रत्ना ने भूमि खरीदने के बजाय किराए पर ली। इसकी तुलना पृष्ठ 165 की तालिका के सब्जी विक्रेता से कीजिए, जिसकी पूरी पूँजी एक टोकरी, एक तराजू और एक ठेला है — तब स्पष्ट होगा कि दोनों व्यवसाय धन बिल्कुल अलग-अलग ढंग से क्यों जुटाते हैं।
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