अन्वेषण अध्याय 7 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किंतु व्यवसायों को पूँजी कहाँ से प्राप्त होती है?
उत्तर

तीन स्रोतों से, और एक निश्चित आकार-क्रम में। पहले यह स्मरण कीजिए कि किसका भुगतान करना है : पूँजी का अर्थ है धन और मानव निर्मित संसाधन जो वस्तुओं तथा सेवाओं के उत्पादन में उपयोग होते हैं — मशीनें, औजार, उपकरण, वाहन, वेंडिंग कार्ट्स, कंप्यूटर, दुकानें, कारखाने और कार्यालय भवन। यह सब एक भी रुपया कमाने से पहले जुटाना पड़ता है।

स्रोतकौन इसका उपयोग करता हैव्यवसाय को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ती है
व्यक्तिगत बचत, परिवार एवं मित्रव्यवसाय आरंभ करने वाले व्यक्ति के लिए सामान्यतः प्राथमिक स्रोत — रत्ना ने इसी से आरंभ कियाऔपचारिक रूप से कुछ नहीं, किंतु राशि सीमित होती है और जोखिम परिवार उठाता है
बैंक ऋणरत्ना के पास पर्याप्त धन नहीं था, इसलिए उसने कमी पूरी करने के लिए बैंक से ऋण लियाब्याज — ऋण लेने वाले द्वारा ऋण देने वाले को उसका धन एक निश्चित अवधि तक प्रयोग करने के बदले दी जाने वाली राशि, जो ऋण की किस्त के साथ चुकाई जाती है
शेयर बाजारविस्तार के लिए अत्यधिक धन चाहने वाली बड़ी कंपनियाँ इसे शेयर बेचकर जनता से जुटाती हैंलाभांश — कंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को नियमित रूप से लाभ में से दिया जाने वाला अंश
व्यवसाय प्रतीक्षा करके बचत क्यों नहीं करता: क्योंकि पूँजी पहले चाहिए। जब तक रसोई के उपकरण न खरीदे जाएँ और किराया न दिया जाए, रत्ना पहला ग्राहक भी नहीं परोस सकती थी। ऋण व्यवसाय को यह अवसर देता है कि वह कल की कमाई से आज के उपकरण खरीद ले — जो उपयोगी भी है और जोखिमपूर्ण भी, क्योंकि ग्राहक आएँ या न आएँ, ब्याज देना ही पड़ता है। यही उद्यमी का जोखिम है, और इसीलिए चित्र 7.16 में “समय और धन का निवेश कर जोखिम उठाता है” उसके पाँच कार्यों में गिना गया है।
संकेत: दोनों कीमतों का अंतर ध्यान से देखिए। ब्याज एक निश्चित वचन है — बुरे वर्ष में भी देना पड़ता है। लाभांश लाभ का अंश है — लाभ न हो तो बाँटने को कुछ नहीं। इसीलिए ऋणदाता प्रतिभूति माँगता है और शेयरधारक वृद्धि।
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