अन्वेषण अध्याय 7 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि उत्पादन की स्वदेशी तकनीकों में अत्यधिक गिरावट आ चुकी है? कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर

क्योंकि जो बाजार उनका मूल्य चुकाता था, वह समाप्त हो गया; और जब कोई शिल्प कमाना बंद कर देता है, तो उसे आगे पहुँचाने वाली कड़ी टूट जाती है। अध्याय एक उदाहरण विस्तार से देता है : 16वीं शताब्दी में हिंद महासागर में यूरोपीय आगमन के पश्चात सिले हुए जहाज निर्माण की कला का पतन धीरे-धीरे हुआ, और अब यह तकनीक केवल मछली पकड़ने वाली छोटी नावों के निर्माण में प्रयुक्त होती है।

कारणयह कैसे काम करता है
बाजार का लुप्त होनाभारतीय 2000 वर्ष से अधिक समय से सिले हुए जहाजों का प्रयोग हिंद महासागर में समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए करते थे। जब यूरोपीय शक्तियों ने उस समुद्री व्यापार पर नियंत्रण कर लिया, तो बड़े भारतीय जहाजों की माँग ही गिर गई — और जिस तकनीक का कोई खरीदार न हो, उसका अभ्यास बंद हो जाता है
बड़े पैमाने के उत्पादन से प्रतिस्पर्धाकारखाने की वस्तु प्रति इकाई सस्ती और बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है। हस्तनिर्मित वस्तु में प्रति इकाई कहीं अधिक श्रम लगता है, इसलिए वह चाहे कितनी भी अच्छी हो, मूल्य में टिक नहीं पाती
नई सामग्री और विधियाँकीलों से जुड़े, फिर लोहे और इस्पात के, और आज फाइबरग्लास के ढाँचों ने सिले हुए काष्ठ-पट्टों की जगह ले ली; मशीन से बना धागा हाथ के धागे की जगह और कृत्रिम रंग प्राकृतिक रंगों की जगह आ गए
हस्तांतरण की कड़ी टूटीयह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था। आय घटते ही अगली पीढ़ी दूसरा काम अपना लेती है — और एक छूटी हुई पीढ़ी किसी शिल्प को सदा के लिए समाप्त कर सकती है, क्योंकि सिखाने वाला ही नहीं बचता
बहुत कुछ लिखा नहीं गयाकुछ शिल्पों के पास शिल्पशास्त्र जैसे ग्रंथ थे, किंतु अधिकांश तकनीक कारीगर के हाथों में ही रहती थी। बिना लिखा ज्ञान अंतिम कारीगर के साथ चला जाता है
बदलती रुचि और सामाजिक प्रतिष्ठाक्रेता मशीन-निर्मित वस्तु को आधुनिक और हस्तनिर्मित को पुराना मानने लगे, और शिल्प का काम प्रायः कम आय वाला था, इसलिए परिवार उससे बाहर निकल गए
इसे केवल एक दुखद कथा नहीं, आर्थिक समस्या की तरह पढ़िए: कोई तकनीक तभी जीवित रहती है जब चारों कारक उसकी ओर बहते रहें — मूल्य चुकाने वाला बाजार, उसे सीखने को तैयार श्रमिक, सामग्री के लिए पूँजी, और उसे बेचने के लिए कोई संगठनकर्ता। इनमें से एक भी टूटे तो शिल्प मर जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि उसे पुनर्जीवित कैसे करें, और अध्याय एक उपाय बताता भी है : त्रिआयामी मुद्रण (3-डी प्रिंटिंग) बड़े पैमाने पर हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र क्षेत्र की लुप्त होती कला-शैलियों को पुनर्जीवित कर सकती है। जिस प्रौद्योगिकी ने किसी शिल्प को हटाया, वही कभी-कभी उसे बाजार लौटा भी देती है।
क्या आप जानते हैं? कीलों के स्थान पर डोरियों से सिले जाने के कारण ये ढाँचे लचीले बनते थे, और इसीलिए हिंद महासागर में उनका आवागमन सरल था — लचीला ढाँचा लहरों और प्रवाल भित्तियों का धक्का सोख लेता है, टूटता नहीं। यह तकनीक पिछड़ी नहीं थी; अपने समुद्र के लिए उपयुक्त थी।
प्र2.
अपने क्षेत्र की कुछ ऐसी तकनीकों और उत्पादों को ढूँढ़ें जिनमें मानव श्रम एवं कौशल का उपयोग हुआ हो। चित्रों एवं पुस्तक का प्रयोग कर कक्षा में इनकी संक्षिप्त व्याख्या करें।
उत्तर

इसे अच्छे ढंग से कैसे करें। किसी प्रसिद्ध शिल्प के स्थान पर एक ऐसा उत्पाद चुनिए जो सचमुच आपके पास बनता हो, और उसके बनाने वाले से मिलिए। आपकी प्रस्तुति छह प्रश्नों के उत्तर इसी क्रम में दे —

  1. यह क्या है और किस काम आता है?
  2. कच्चा माल क्या है और वह कहाँ से आता है? (यही इसमें निहित भूमि है।)
  3. कच्चे माल से तैयार वस्तु तक के चरण क्या हैं? इन चरणों का प्रवाह-चित्र बनाइए, जैसे चित्र 7.23 मोबाइल फोन के लिए बनाता है।
  4. कौन-से औजार लगते हैं और वह कौशल सीखने में कितना समय लगता है? (यही पूँजी और मानव पूँजी है।)
  5. बनाने वाले को किसने सिखाया, और क्या अगली पीढ़ी इसे सीखेगी?
  6. अब इसे कौन खरीदता है, और माँग बढ़ रही है या घट रही है?

अध्याय स्वयं अपने चित्रों में दो ऐसे उत्पाद दिखाता है — बाँस एवं बेंत के उत्पाद, अरुणाचल प्रदेश (चित्र 7.12) और मृदा के बर्तन, दिल्ली (चित्र 7.14)।

नमूना उत्तर — नीली मिट्टी के बर्तन (ब्लू पॉटरी), जयपुर, राजस्थान: “ब्लू पॉटरी में मिट्टी होती ही नहीं। इसका मिश्रण क्वार्ट्ज का चूर्ण, पिसा हुआ काँच, मुल्तानी मिट्टी, सुहागा, गोंद और जल से बनता है — अर्थात इसका भूमि वाला इनपुट पूरी तरह खनिज है। इसे प्लास्टर ऑफ पेरिस के साँचों में ढाला जाता है, सुखाया जाता है, फिर हाथ से कोबाल्ट-ऑक्साइड की नीली चित्रकारी की जाती है, उस पर काँच की परत चढ़ाकर लगभग 800 डिग्री सेल्सियस पर एक ही बार पकाया जाता है। हमारे कारीगर श्री रामकिशन ने यह अपने पिताजी से सात वर्ष में सीखा; उनके अनुसार सबसे कठिन कौशल हाथ से की जाने वाली चित्रकारी है, जो किसी कक्षा में नहीं सिखाई जा सकती। उनके औजार साधारण हैं — साँचे, ब्रश और भट्ठी — इसलिए पूँजी कम, किंतु मानव पूँजी बहुत अधिक है। वे अधिकतर पर्यटकों और ऑनलाइन ग्राहकों को बेचते हैं, इसलिए माँग फिर बढ़ रही है, किंतु उनकी गली के बारह परिवारों में से अब केवल दो ही यह काम करते हैं।”
यह अभ्यास वास्तव में क्या सिखाता है: यह कि हस्तशिल्प में मूल्य श्रम और मानव पूँजी में बसता है, मशीनों में नहीं — और इसी कारण ऐसे क्षेत्र श्रम-प्रधान कहलाते हैं, जैसा पृष्ठ 178 बताता है। अपने प्रवाह-चित्र को देखिए और गिनिए कि कितने चरण मशीन कर सकती है। ब्लू पॉटरी में उत्तर लगभग शून्य है — यही कारण है कि वह बहुमूल्य है, और यही कारण है कि वह संकट में है।
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