प्र1.
आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि उत्पादन की स्वदेशी तकनीकों में अत्यधिक गिरावट आ चुकी है? कक्षा में चर्चा करें।
उत्तर
क्योंकि जो बाजार उनका मूल्य चुकाता था, वह समाप्त हो गया; और जब कोई शिल्प कमाना बंद कर देता है, तो उसे आगे पहुँचाने वाली कड़ी टूट जाती है। अध्याय एक उदाहरण विस्तार से देता है : 16वीं शताब्दी में हिंद महासागर में यूरोपीय आगमन के पश्चात सिले हुए जहाज निर्माण की कला का पतन धीरे-धीरे हुआ, और अब यह तकनीक केवल मछली पकड़ने वाली छोटी नावों के निर्माण में प्रयुक्त होती है।
| कारण | यह कैसे काम करता है |
|---|---|
| बाजार का लुप्त होना | भारतीय 2000 वर्ष से अधिक समय से सिले हुए जहाजों का प्रयोग हिंद महासागर में समुद्री व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए करते थे। जब यूरोपीय शक्तियों ने उस समुद्री व्यापार पर नियंत्रण कर लिया, तो बड़े भारतीय जहाजों की माँग ही गिर गई — और जिस तकनीक का कोई खरीदार न हो, उसका अभ्यास बंद हो जाता है |
| बड़े पैमाने के उत्पादन से प्रतिस्पर्धा | कारखाने की वस्तु प्रति इकाई सस्ती और बड़ी मात्रा में उपलब्ध होती है। हस्तनिर्मित वस्तु में प्रति इकाई कहीं अधिक श्रम लगता है, इसलिए वह चाहे कितनी भी अच्छी हो, मूल्य में टिक नहीं पाती |
| नई सामग्री और विधियाँ | कीलों से जुड़े, फिर लोहे और इस्पात के, और आज फाइबरग्लास के ढाँचों ने सिले हुए काष्ठ-पट्टों की जगह ले ली; मशीन से बना धागा हाथ के धागे की जगह और कृत्रिम रंग प्राकृतिक रंगों की जगह आ गए |
| हस्तांतरण की कड़ी टूटी | यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था। आय घटते ही अगली पीढ़ी दूसरा काम अपना लेती है — और एक छूटी हुई पीढ़ी किसी शिल्प को सदा के लिए समाप्त कर सकती है, क्योंकि सिखाने वाला ही नहीं बचता |
| बहुत कुछ लिखा नहीं गया | कुछ शिल्पों के पास शिल्पशास्त्र जैसे ग्रंथ थे, किंतु अधिकांश तकनीक कारीगर के हाथों में ही रहती थी। बिना लिखा ज्ञान अंतिम कारीगर के साथ चला जाता है |
| बदलती रुचि और सामाजिक प्रतिष्ठा | क्रेता मशीन-निर्मित वस्तु को आधुनिक और हस्तनिर्मित को पुराना मानने लगे, और शिल्प का काम प्रायः कम आय वाला था, इसलिए परिवार उससे बाहर निकल गए |
इसे केवल एक दुखद कथा नहीं, आर्थिक समस्या की तरह पढ़िए: कोई तकनीक तभी जीवित रहती है जब चारों कारक उसकी ओर बहते रहें — मूल्य चुकाने वाला बाजार, उसे सीखने को तैयार श्रमिक, सामग्री के लिए पूँजी, और उसे बेचने के लिए कोई संगठनकर्ता। इनमें से एक भी टूटे तो शिल्प मर जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि उसे पुनर्जीवित कैसे करें, और अध्याय एक उपाय बताता भी है : त्रिआयामी मुद्रण (3-डी प्रिंटिंग) बड़े पैमाने पर हथकरघा उत्पाद तैयार करके वस्त्र क्षेत्र की लुप्त होती कला-शैलियों को पुनर्जीवित कर सकती है। जिस प्रौद्योगिकी ने किसी शिल्प को हटाया, वही कभी-कभी उसे बाजार लौटा भी देती है।
क्या आप जानते हैं? कीलों के स्थान पर डोरियों से सिले जाने के कारण ये ढाँचे लचीले बनते थे, और इसीलिए हिंद महासागर में उनका आवागमन सरल था — लचीला ढाँचा लहरों और प्रवाल भित्तियों का धक्का सोख लेता है, टूटता नहीं। यह तकनीक पिछड़ी नहीं थी; अपने समुद्र के लिए उपयुक्त थी।