जिस भी कार्य पर समाज निर्भर है, वह महत्वहीन नहीं — और प्रश्न स्वयं जो कसौटी सुझाता है, वही इसे सिद्ध कर देती है। किसी भी कार्य से पूछिए : यदि यह रुक जाए तो क्या होगा? जिन कार्यों को लोग सबसे नीचे रखते हैं, उन्हीं की अनुपस्थिति सबसे शीघ्र अनुभव होती है।
| यदि यह कार्य रुक जाए | कितनी शीघ्र पता चलेगा | क्या होगा |
|---|---|---|
| सड़कों की सफाई और कूड़ा उठाना | कुछ ही दिनों में | नालियाँ अवरुद्ध, मक्खियाँ और चूहे, दूषित जल, रोगों का प्रकोप — और फिर बच्चे विद्यालय से तथा श्रमिक कार्य से दूर |
| कृषि | एक ऋतु में | सर्वत्र खाद्य संकट। भोजनालय, किराने की दुकानें और सब्जी विक्रेता — पृष्ठ 165 की पूरी तालिका — के पास बेचने को कुछ नहीं बचेगा |
| चिकित्सक और परिचारिकाएँ | तत्काल | उपचार योग्य रोग प्राणघातक हो जाएँगे; वह स्वास्थ्य सेवा ही समाप्त हो जाएगी जो मानव पूँजी बनाती है |
| विद्युत, जलापूर्ति, परिवहन | कुछ घंटों में | कारखाने, अस्पताल, विद्यालय और दुकानें एक साथ रुक जाएँगे — ये सबके इनपुट हैं |
तो फिर लोगों को कुछ कार्य अधिक महत्वपूर्ण लगते क्यों हैं? प्रायः वेतन और प्रतिष्ठा के कारण, और ये दोनों महत्व से भिन्न वस्तु मापते हैं। वेतन मुख्यतः दुर्लभता दर्शाता है — प्रशिक्षण में कितने वर्ष लगते हैं और कितने कम लोग वह कार्य कर सकते हैं। हृदय शल्य चिकित्सक को सफाईकर्मी से कहीं अधिक इसलिए मिलता है कि एक शल्य चिकित्सक बनने में पंद्रह वर्ष लगते हैं, इसलिए नहीं कि नगर सफाईकर्मियों के बिना अधिक दिन चल सकता है। दुर्लभता को महत्व समझ लेना ही वह भूल है जिसकी ओर यह बॉक्स ध्यान दिलाता है।