अन्वेषण अध्याय 7 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
राजकीय विद्यालय के कक्षा 8 के विद्यार्थी हर्ष को दो वर्ष पूर्व अपना विद्यालय छोड़ना पड़ा क्योंकि उसके पिताजी की नौकरी चली गई थी। विद्यालयी शिक्षा के दो वर्षों की हानि ने शिवाय को कैसे प्रभावित किया होगा?
उत्तर

वे दो वर्ष जीवन भर हर नौकरी के आवेदन में उसका पीछा करेंगे। विद्यालय छूटने का अर्थ केवल कम जानना नहीं है; इसका अर्थ है कि शिक्षा और प्रशिक्षण जिस मानव पूँजी का निर्माण करने वाले थे, वह बनी ही नहीं — और उस पर टिकी हर बात कठिन हो जाती है।

वह क्या खोता हैउसका परिणाम
बुनियादी अधिगमकक्षा 8 के आस-पास ही पढ़ना, गणना और तर्क अन्य विषयों के औजार बनते हैं। इनका छूटना दो वर्ष के ज्ञान की हानि नहीं, अपितु आगे के वर्षों को असीखने योग्य बना देना है, क्योंकि हर वर्ष पिछले वर्ष पर टिका होता है
प्रमाणपत्र और पात्रताअधिकांश प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के लिए विद्यालयी प्रमाणपत्र चाहिए। स्वयं (SWAYAM) के निःशुल्क पाठ्यक्रम भी कक्षा 9 और उससे आगे के लिए बने हैं। प्रमाणपत्र के बिना कौशल के द्वार बंद रह जाते हैं
कौशल, और इसलिए आयवह प्रायः अकुशल कार्य तक सीमित रह जाएगा — दैनिक मजदूरी, सहायक का काम — जो कम वेतन देता है, असुरक्षित है और जिसमें प्रशिक्षण भी कम मिलता है
मोल-भाव की शक्ति और सुरक्षाजो श्रमिक अनुबंध या सुरक्षा-सूचना नहीं पढ़ सकता, उसे कम पारिश्रमिक देना सरल है और दुर्घटना की संभावना अधिक
अगली पीढ़ीकम आय के कारण संभावना बढ़ जाती है कि अगली बार संकट आने पर उसके अपने बच्चे भी विद्यालय छोड़ें। इस प्रकार एक नौकरी का जाना एक चक्र बन जाता है

और यह हानि केवल उसकी नहीं है। अध्याय कहता है कि भारत का जनांकिकीय लाभांश इस बात पर निर्भर है कि व्यक्तियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशिक्षण एवं कौशल प्रशिक्षण तक पहुँच मिले। प्रत्येक ड्रॉपआउट उस लाभांश में से घटा हुआ एक युवा है — और भारत को इसे लाखों से गुणा करना पड़ता है।

यह निराशाजनक क्यों नहीं है: मानव पूँजी पुनः बनाई जा सकती है, बस धीमे और अधिक लागत पर। मुक्त विद्यालय एवं सेतु पाठ्यक्रम प्रमाणपत्र लौटा सकते हैं; नेशनल करियर सर्विस उसे काम से जोड़ सकती है; कौशल पाठ्यक्रम उसे एक हुनर दे सकता है। इस प्रश्न का उद्देश्य भविष्यवाणी नहीं, यह दिखाना है कि बच्चे को विद्यालय में बनाए रखना बाद की भरपाई से सस्ता है।
प्रश्न पर एक टिप्पणी: पाठ्यपुस्तक पहली पंक्ति में विद्यार्थी का नाम हर्ष और दूसरी में शिवाय लिखती है। यह एक ही विद्यार्थी है — मुद्रण की चूक है। उत्तर उसी विद्यार्थी के विषय में लिखिए जिसने विद्यालय छोड़ा।
प्र2.
जब किसी व्यवसाय में आवश्यक कौशलयुक्त श्रमिक नहीं मिलते तो उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
उत्तर

व्यवसाय के पास भूमि, पूँजी और प्रौद्योगिकी तो रह जाती है, किंतु उन्हें ठीक से चलाने वाला कोई नहीं। यही अध्याय का सामान्य नियम एक कारक पर लागू होता है — कारक की अनुपस्थिति या दुरुपयोग की स्थिति में उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है या उत्पादन पूरी तरह रुक सकता है

  • उत्पादन घटता या रुकता है। संचालक के अभाव में मशीनें खड़ी रहती हैं; आदेश देर से पूरे होते हैं; कभी-कभी पूरी पाली रद्द करनी पड़ती है। यही ‘अकुशल’ और ‘ठप’ व्यवसाय का अंतर है।
  • गुणवत्ता गिरती है और अपव्यय बढ़ता है। अप्रशिक्षित श्रमिक कच्चा माल बिगाड़ता है, औजार क्षतिग्रस्त करता है और दोषपूर्ण वस्तुएँ बनाता है, जिन्हें फेंकना पड़ता है — अतः हर अच्छी वस्तु की लागत बढ़ जाती है।
  • दुर्घटनाएँ बढ़ती हैं। सुरक्षा प्रक्रियाएँ प्रशिक्षण का ही भाग हैं। जहाँ प्रशिक्षण नहीं, वहाँ जोखिम सीधे श्रमिकों पर आ जाता है।
  • प्रशिक्षण की लागत बढ़ती है। अब वह काम व्यवसाय को स्वयं करना पड़ता है जो शिक्षा-व्यवस्था नहीं कर पाई — यही कारण है कि अध्याय पृष्ठ 181 पर “कौशल-विकास और प्रशिक्षण” को व्यवसाय का उत्तरदायित्व बताता है।
  • दुर्लभ कौशल का मूल्य चढ़ जाता है। कुछ कुशल व्यक्ति कहीं अधिक वेतन माँग सकते हैं और प्रतिस्पर्धी के पास जा सकते हैं — लागत बढ़ती है, कमी फिर भी बनी रहती है।
  • नई प्रौद्योगिकी अपनाई नहीं जा सकती। ऐसी कंप्यूटर-नियंत्रित मशीन खरीदने का कोई अर्थ नहीं जिसे पूरे क्षेत्र में कोई चला न सके। व्यवसाय पुरानी पद्धतियों में अटका रहता है जबकि प्रतिस्पर्धी आगे निकल जाते हैं।
  • व्यवसाय स्थान बदल सकता है। उद्योग वहीं लगते हैं जहाँ कौशल है। जो क्षेत्र कुशल श्रमिक नहीं दे पाता, वह निवेश खो देता है और उसके साथ वे रोजगार भी जिनकी उसे आवश्यकता थी।
गहरी बात: कौशल की कमी भर्ती की समस्या नहीं, उत्पादन के कारक की समस्या है। शेष तीन कारक चौथे के बिना निष्क्रिय हैं। इसीलिए अर्थशास्त्री विद्यालयों, आई.टी.आई. और स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय को मशीनों पर होने वाले व्यय की भाँति निवेश मानते हैं — यह उस इनपुट का निर्माण है जिसके बिना मशीन चल ही नहीं सकती।
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