कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.9

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वस्तु को लेंस के दूसरी ओर से लेंस के माध्यम से देखिए (चित्र 10.17, क) और अपने अवलोकनों को अपनी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

वस्तु को उत्तल लेंस के पीछे अल्प दूरी पर रखकर देखने पर वह सीधी और आवर्धित दिखाई पड़ती है — नंगी आँख से देखने की तुलना में स्पष्ट रूप से बड़ी, और सीधी।

इस दूरी पर आवर्धन क्यों: उत्तल लेंस वस्तु से आती किरणों को भीतर की ओर मोड़ता है, किंतु इतनी कम दूरी में वे आँख तक पहुँचते समय भी फैली ही रहती हैं। आँख उन्हें सीधी रेखाओं में पीछे बढ़ाकर वस्तु से अधिक दूर और अधिक चौड़े स्थान पर ले जाती है — इसलिए वस्तु बड़ी दिखती है, और सीधी भी।
संकेत: प्रत्येक अवलोकन के साथ वास्तविक दूरी सेंटीमीटर में अवश्य लिखिए। दूरी के बिना उस अवलोकन की किसी और से तुलना ही नहीं हो सकती।
प्र2.
अब धीरे-धीरे वस्तु को लेंस से दूर हटाते जाइए और अवलोकन करते जाइए कि प्रतिबिंब किस प्रकार परिवर्तित होता है (चित्र 10.17, ख)। उत्तल लेंस से वस्तु की दूरी का परिवर्तन प्रतिबिंब को किस प्रकार प्रभावित करता है?
उत्तर

दूरी ही सब कुछ तय करती है —

  1. अल्प दूरी — सीधी और आवर्धित।
  2. एक विशेष दूरी पर — दृश्य धुँधला पड़ जाता है और कोई स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं दिखता।
  3. उससे आगे — वस्तु उल्टी दिखने लगती है, आरंभ में तब भी आवर्धित।
  4. और दूर — वह उल्टी ही रहती है और अब लगातार छोटी होती जाती है।
पलटाव क्यों होता है: उत्तल लेंस प्रकाश को सदैव अभिसरित करता है। वस्तु समीप हो तो किरणें इतनी तेज़ी से फैल रही होती हैं कि यह अभिसरण उन्हें आपकी आँख से पहले मिला नहीं पाता — दृश्य सीधा रहता है। एक निश्चित वस्तु-दूरी के बाद किरणें आपकी ओर आते-आते मिलकर एक-दूसरे को काट देती हैं, और प्रकाश के कट जाने पर ऊपर-नीचे बदल जाते हैं। यही वह बिंदु है जहाँ चित्र पलट जाता है।
प्र3.
अब इन्हीं चरणों को अवतल लेंस के साथ दोहराइए (चित्र 10.17, ग)।
उत्तर

अवतल लेंस के साथ हर दूरी पर उत्तर एक ही है — वस्तु सीधी और लघुकृत दिखाई देती है। लेंस से दूर हटाते जाने पर वह और छोटी होती जाती है। वह न कभी पलटती है और न कभी आवर्धित होती है।

और कुछ हो ही नहीं सकता, क्यों: अवतल लेंस बीच में पतला होता है, इसलिए उससे गुज़रती किरणें पहले से भी अधिक फैल जाती हैं। जो किरणें दूर धकेली जा रही हों वे कभी मिलकर कट नहीं सकतीं, और कटान के बिना न उल्टा दृश्य संभव है न आवर्धन। यह उत्तल दर्पण का लेंस-रूप है।
ध्यान दीजिए: पृष्ठ 163 के मूल पाठ में अवतल लेंस के लिए ‘सदैव उल्टा और आमाप में छोटा’ छपा है, जबकि पृष्ठ 165 के सारांश में ठीक-ठीक ‘सदैव सीधा और आमाप में वस्तु से छोटा’ लिखा है। प्रयोग और अंग्रेज़ी संस्करण दोनों सीधा की पुष्टि करते हैं — पृष्ठ 163 की पंक्ति मुद्रण की भूल है।
प्र4.
अपनी अभ्यास पुस्तिका में अभिलेखित अपने प्रेक्षणों का विश्लेषण कीजिए और दोनों लेंसों से देखे गए प्रतिबिंबों की तुलना कीजिए। आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?
उत्तर
उत्तल लेंसअवतल लेंस
आकृतिबीच में अधिक मोटाकिनारों पर अधिक मोटा
वस्तु अल्प दूरी परसीधी, आवर्धितसीधी, लघुकृत
वस्तु अधिक दूरी परउल्टी, फिर छोटी होती हुईसीधी, छोटी होती हुई
समांतर किरणपुंज पर प्रभावअभिसरित करता हैअपसरित करता है
किस दर्पण जैसा व्यवहारअवतल दर्पणउत्तल दर्पण

निष्कर्ष. उत्तल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब आवर्धित, लघुकृत अथवा वस्तु के बराबर आमाप का हो सकता है और सीधा या उल्टा भी — यह लेंस से वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है। अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव सीधा और लघुकृत होता है।

पूरी तालिका के पीछे एक ही विचार है: अभिसारी युक्तियाँ (अवतल दर्पण, उत्तल लेंस) किरणों को काट सकती हैं, इसलिए वे उल्टे और आवर्धित प्रतिबिंब बना सकती हैं। अपसारी युक्तियाँ (उत्तल दर्पण, अवतल लेंस) किरणों को कभी कटने ही नहीं देतीं, इसलिए वे सीधे और लघुकृत प्रतिबिंब तक सीमित हैं।
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