कुतूहल अध्याय 10 प्रकाश — दर्पण एवं लेंस के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

गोलीय दर्पण वह दर्पण है जिसका परावर्तक पृष्ठ किसी खोखले गोले के एक भाग जैसा होता है। यदि यह भीतर की ओर वक्रित है तो अवतल दर्पण , और यदि बाहर की ओर वक्रित है तो उत्तल दर्पण कहलाता है। अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आवर्धित, लघुकृत अथवा वस्तु के बराबर आमाप का हो सकता है और सीधा या उल्टा भी — यह दर्पण से वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है। उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब सदैव सीधा और लघुकृत होता है। परावर्तन के दो नियम — (i) आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है, तथा (ii) आपतित किरण, आपतन बिंदु पर अभिलंब और परावर्तित किरण सभी एक ही समतल में होते हैं। दोनों कोण अभिलंब से मापे जाते हैं। ये नियम समतल, अवतल और उत्तल — सभी दर्पणों पर लागू होते हैं। गोलीय पृष्ठ वक्रित होने के कारण प्रत्येक बिंदु पर अभिलंब की दिशा भिन्न होती है, इसीलिए समांतर किरणपुंज अभिसरित (अवतल) या अपसरित (उत्तल) हो जाता है। लेंस पारदर

  1. खोजबीन और विचार करें
  2. क्रियाकलाप 10.1
  3. क्रियाकलाप 10.2
  4. पाठ्य प्रश्न
  5. क्रियाकलाप 10.3
  6. पाठ्य प्रश्न
  7. एक सोपान ऊपर
  8. पाठ्य प्रश्न
  9. क्रियाकलाप 10.4
  10. पाठ्य प्रश्न
  11. क्रियाकलाप 10.5
  12. पाठ्य प्रश्न
  13. क्रियाकलाप 10.6
  14. पाठ्य प्रश्न
  15. क्रियाकलाप 10.7
  16. एक सोपान ऊपर
  17. पाठ्य प्रश्न
  18. क्रियाकलाप 10.8
  19. पाठ्य प्रश्न
  20. क्रियाकलाप 10.9
  21. पाठ्य प्रश्न
  22. क्रियाकलाप 10.10
  23. क्रियाकलाप 10.11
  24. पाठ्य प्रश्न
  25. जिज्ञासा बनाए रखें
  26. खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ