प्र1.
अब पत्रक के बाहर निकले हुए भाग को मेज के किनारे से नीचे की तरफ मोड़ दीजिए (चित्र 10.10, ख)। क्या आप अब भी परावर्तित किरणपुंज को पत्रक के बाहर निकले हुए भाग पर देख पाते हैं।
उत्तर
नहीं। मेज के किनारे से चार्ट पत्रक का बाहर निकला भाग नीचे मोड़ते ही उस पर बनी चमकीली पट्टी लुप्त हो जाती है।
वह लुप्त क्यों होती है: परावर्तित किरणपुंज न हिला है, न बुझा है — वह अब भी ठीक उसी दिशा में, मेज के उसी समतल में चल रहा है। मुड़ा हुआ कागज उस समतल से बाहर चला गया है, इसलिए पुंज उस पर पड़ता ही नहीं। प्रकाश में कोई परिवर्तन नहीं हुआ, केवल पर्दा हट गया।
स्वयं जाँचिए: मुड़े हुए भाग से थोड़ा आगे, मेज के तल में ही, एक कागज सीधा पकड़िए। परावर्तित पुंज उस पर फिर दिखने लगेगा — प्रमाण कि वह वहाँ था ही।