प्र1.
क्या आपको स्मरण है कि प्रकाश सरल रेखा के अनुदिश गमन करता है?
उत्तर
हाँ। एक ही समांगी माध्यम में प्रकाश सरल रेखा के अनुदिश चलता है, और ठीक इसीलिए हम उसे बाणाग्र युक्त सरल रेखाओं — अर्थात किरणों — के रूप में निरूपित कर पाते हैं।
प्रमाण चारों ओर हैं —
- छाया की रूपरेखा वस्तु जैसी ही तीखी होती है, और बड़ी वस्तु की छाया बड़ी बनती है — यही सरल रेखीय गमन की भविष्यवाणी है।
- टॉर्च का प्रकाश झिरी से निकलकर कागज पर सीधी पट्टी बनाता है, कभी वक्र नहीं।
- हम मोड़ के पार नहीं देख पाते, और मुड़ी हुई नली के दूसरे सिरे से प्रकाश बाहर नहीं आता।
किरण मॉडल यहाँ इतना उपयोगी क्यों है: एक बार यह मान लेने पर कि प्रकाश सरल रेखा में चलता है, पूरा आरेख रेखनी से खींचा जा सकता है। दर्पण से पहले का पथ एक सरल रेखा, दर्पण के बाद का पथ दूसरी सरल रेखा — और शेष केवल इतना जानना है कि इन दोनों के बीच कोण कितना है, जो परावर्तन के नियम बता देते हैं।