प्र1.
अब झिरी और टॉर्च को थोड़ा-सा एक ओर हटाइए ताकि प्रकाश पुंज दर्पण पर एक भिन्न कोण पर आपतित हो (चित्र 10.8, ख)। क्या दर्पण के सापेक्ष परावर्तित किरण का कोण भी परिवर्तित हो जाता है?
उत्तर
हाँ। आपतित पुंज का कोण बदलते ही परावर्तित पुंज भी नई दिशा में चला जाता है — और तुरंत, धीरे-धीरे नहीं।
ऐसा क्यों होता है: दर्पण हिला नहीं है, इसलिए आपतन बिंदु पर अभिलंब की दिशा वही है। केवल आपतित किरण घुमाई गई है। परावर्तित किरण को उसी अभिलंब से सदैव उतना ही कोण बनाना है जितना आपतित किरण बनाती है, इसलिए आपतित पुंज को जितने कोण से घुमाया जाए, परावर्तित पुंज भी उतने ही कोण से घूमता है — किंतु अभिलंब की दूसरी ओर।
स्वयं जाँचिए: टॉर्च को अभिलंब के पास लाइए, परावर्तित पुंज भी अभिलंब के पास आ जाएगा। टॉर्च को दर्पण के लगभग समांतर कर दीजिए, परावर्तित पुंज भी दर्पण से सटकर निकलेगा।