प्र1.
क्या आपको वह क्रियाकलाप स्मरण है जिसे आपने समतल दर्पण से किसी प्रकाश पुंज के परावर्तन के अवलोकन के लिए किया था।
उत्तर
हाँ। कक्षा 7 में कंघी से झिरी बनाई गई थी — मध्य की एक झिरी छोड़कर बाकी सब काले कागज से ढक दी गई थीं, और टॉर्च का प्रकाश उसी एक झिरी से निकालकर सफेद कागज के अनुदिश एक पतला किरणपुंज प्राप्त किया गया था। उसी कागज पर उस पुंज के मार्ग में समतल दर्पण उर्ध्वाधर खड़ा किया गया था।
पुंज दर्पण से टकराकर एक निश्चित नई दिशा में लौटा — बिखरा नहीं। दर्पण या टॉर्च घुमाने पर लौटने वाले पुंज की दिशा बदल जाती थी, किंतु परावर्तित पुंज सदैव ठीक एक ही होता था।
संकेत: यही व्यवस्था क्रियाकलाप 10.4 में फिर उपयोग होती है, पर इस बार कोण वास्तव में मापे जाते हैं; और क्रियाकलाप 10.6 में अनेक झिरियाँ खुली रखकर अनेक समांतर पुंज एक साथ दर्पण पर डाले जाते हैं।