कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जल की बूँद का अवलोकन कीजिए। इसका पृष्ठ किस आकृति का है? क्या यह समतल है, भीतर की ओर वक्रित है या बाहर की ओर वक्रित है?
उत्तर

बूँद का पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित है — यह एक छोटे गुंबद की भाँति ऊपर उभरा हुआ है। न तो यह समतल है और न भीतर की ओर धँसा।

तेल या मोम की पतली परत क्यों आवश्यक है: बिना परत वाले काँच पर जल फैलकर समतल फिल्म बन जाता है, और समतल फिल्म से कुछ नहीं बदलता। तेल या मोम जल को काँच पर फैलने नहीं देता, इसलिए बूँद सिमटकर गोल हो जाती है — और यही बाहर की ओर उभार उसे लेंस की भाँति व्यवहार करने योग्य बनाता है।
संकेत: छोटी बूँद बड़ी बूँद से अधिक तीखी वक्रता बनाती है, और अधिक वक्रित पृष्ठ अधिक आवर्धन देता है। दो भिन्न आमाप की बूँदें अगल-बगल रखकर देखिए।
प्र2.
अब पट्टिका के नीचे की पाठ्यसामग्री को जल की बूँद के ऊपर से देखिए। क्या आपको जल की बूँद के नीचे के अक्षर या अक्षरों के आमाप में कोई परिवर्तन दिखाई पड़ता है। क्या ये आमाप में बड़े दिखाई पड़ते हैं या छोटे?
उत्तर

हाँ — बूँद के नीचे के अक्षर स्पष्ट रूप से बड़े दिखाई पड़ते हैं, बूँद के ठीक बाहर पड़े उन्हीं अक्षरों से बड़े।

बूँद आवर्धन क्यों करती है: बूँद पारदर्शी पदार्थ का ऐसा टुकड़ा है जिसका पृष्ठ बाहर की ओर वक्रित है — अर्थात जो किनारों की अपेक्षा बीच में मोटा है। यही उत्तल लेंस की आकृति है। यह मुद्रित अक्षर से ऊपर आती किरणों को भीतर की ओर मोड़ देती है, और आपकी आँख उन मुड़ी किरणों को सीधी रेखाओं में पीछे बढ़ाकर अक्षर को उसके वास्तविक आमाप से बड़ा मान लेती है।
क्या आप जानते हैं? आवर्धक लेंस (चित्र 10.14) ठीक वही कर रहा है जो जल की यह बूँद कर रही है — वह केवल काँच का बना बड़ा और स्थायी रूप है।
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