प्र1.
धातु की एक चमकदार चम्मच लीजिए और इसके वक्रित पृष्ठ को अपने चेहरे के पास लाइए। क्या आप अपना प्रतिबिंब इसमें देख पाते हैं?
उत्तर
हाँ, स्पष्ट रूप से। पॉलिश की हुई स्टील की चम्मच प्रकाश को दर्पण की ही भाँति नियमित रूप से परावर्तित करती है, इसलिए उसमें चेहरे का प्रतिबिंब बनता है।
ऐसा क्यों होता है: पॉलिश किया हुआ धात्विक पृष्ठ प्रकाश के पैमाने पर चिकना होता है, इसलिए उस पर पड़ा समांतर किरणपुंज परावर्तन के बाद भी व्यवस्थित रहता है — प्रत्येक किरण परावर्तन के नियम का पालन करती है और पड़ोसी किरणें साथ-साथ चलती रहती हैं। यही प्रतिबिंब बनाता है। खुरदरी या खरोंच वाली चम्मच किरणों को सब दिशाओं में बिखेर देती है और उसमें केवल चमकीला धब्बा दिखता है, प्रतिबिंब नहीं।