कुतूहल अध्याय 10 खोजबीन और विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या हम ऐसे दर्पण बना सकते हैं जिनसे आवर्धित अथवा लघुकृत प्रतिबिंब बनते हों?
उत्तर

हाँ। इसके लिए बस परावर्तक पृष्ठ को वक्रित करना पड़ता है। समतल दर्पण प्रत्येक किरण को इस प्रकार लौटाता है कि किरणपुंज का फैलाव नहीं बदलता, इसलिए प्रतिबिंब सदैव वस्तु के बराबर आमाप का होता है। गोलीय दर्पण — जिसका पृष्ठ खोखले गोले का एक भाग होता है — इससे भिन्न है, क्योंकि इसका पृष्ठ प्रत्येक बिंदु पर थोड़ी भिन्न दिशा में होता है।

  • अवतल दर्पण (भीतर की ओर वक्रित) परावर्तित किरणों को पास लाता है। चेहरे के समीप रखने पर यह आवर्धित एवं सीधा प्रतिबिंब बनाता है; दूर ले जाने पर प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है और फिर छोटा होता जाता है।
  • उत्तल दर्पण (बाहर की ओर वक्रित) परावर्तित किरणों को फैला देता है, इसलिए इसका प्रतिबिंब सदैव सीधा और लघुकृत होता है।
अवतल दर्पणउत्तल दर्पणपरावर्तक पृष्ठपरावर्तक पृष्ठ
पार्श्व से देखने पर अंतर स्पष्ट हो जाता है — अवतल दर्पण का चमकीला पृष्ठ भीतर की ओर धँसा होता है और उत्तल दर्पण का चमकीला पृष्ठ बाहर की ओर उभरा होता है। छायांकित भाग अपरावर्ती पृष्ठ है।
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक बिंदु पर परावर्तन उसी नियम का पालन करता है — परावर्तन कोण, आपतन कोण के बराबर। किंतु वक्रित पृष्ठ पर आगे बढ़ते ही अभिलंब की दिशा थोड़ी-थोड़ी बदलती जाती है, इसलिए समांतर आई किरणें भिन्न-भिन्न दिशाओं में लौटती हैं। अवतल पृष्ठ पर अभिलंब एक-दूसरे की ओर झुके होते हैं (किरणें अभिसरित), उत्तल पृष्ठ पर एक-दूसरे से दूर (किरणें अपसरित)।
स्वयं जाँचिए: स्टील की चम्मच में दोनों दर्पण एक साथ हैं — इसका भीतरी धँसा पृष्ठ अवतल है और बाहरी उभरा पृष्ठ उत्तल।
प्र2.
वाहनों में लगे पार्श्व-दृश्य दर्पणों पर एक चेतावनी अंकित होती है जिसका हिंदी में अर्थ है — “वस्तुओं के बीच वास्तविक दूरी दर्पण में दिखाई देने वाली दूरी से कम होती है।” उन पर यह चेतावनी क्यों लिखी होती है?
उत्तर

क्योंकि पार्श्व-दृश्य दर्पण उत्तल दर्पण होता है, और उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब सदैव वस्तु से छोटा होता है।

हम किसी वस्तु की दूरी का अनुमान बहुत हद तक उसके दिखाई देने वाले आमाप से लगाते हैं। जिस मोटरसाइकिल का प्रतिबिंब आधा आमाप का दिखे, आँख उसे दुगुनी दूरी पर मान लेती है। इसलिए पीछे आ रही बस वास्तव में उतनी दूर नहीं होती जितनी उसका छोटा प्रतिबिंब सुझाता है। लेन बदलते समय चालक यह भूल न करे, इसी के लिए यह चेतावनी लिखी जाती है।

फिर उत्तल दर्पण लगाया ही क्यों जाता है: बाहर की ओर वक्रित होने के कारण यह पीछे की सड़क के बहुत अधिक विस्तृत क्षेत्र का प्रकाश समेटकर उसी छोटे दर्पण में दिखा देता है। उतने ही आमाप का समतल दर्पण आमाप तो सही दिखाता, पर दृश्य क्षेत्र बहुत सीमित रहता और अंध-क्षेत्र (blind spot) बड़ा हो जाता। निर्माता विस्तृत दृश्य के बदले दूरी के इस भ्रम को स्वीकार कर लेता है — और चेतावनी लिख देता है।
क्या आप जानते हैं? अंग्रेज़ी संस्करण में यही चेतावनी “Objects in mirror are closer than they appear” के रूप में दी गई है — बात वही है, कहने का ढंग भिन्न।
प्र3.
कुछ ऐनक के लेंसों पर एक वक्र रेखा क्यों होती है?
उत्तर

वह रेखा उसी लेंस के निचले भाग में बने एक दूसरे लेंस-क्षेत्र की सीमा है। ऐसे लेंस को द्विफोकसी (बाइफोकल) लेंस कहते हैं — एक ही काँच में दो अलग-अलग वक्रता वाले भाग।

  • ऊपर का बड़ा भाग कम वक्रित होता है और दूर की वस्तुएँ देखने के काम आता है।
  • वक्र रेखा से घिरा नीचे का छोटा भाग अधिक वक्रित होता है। अधिक वक्रित उत्तल पृष्ठ होने के कारण यह पास की मुद्रित सामग्री को बड़ा दिखाता है, इसलिए पहनने वाला केवल आँखें नीची करके पढ़ लेता है।
दो वक्रताओं की आवश्यकता क्यों: लेंस प्रकाश को कितना मोड़ेगा, यह उसके पृष्ठों की वक्रता पर निर्भर करता है। एक ही वक्रता 30 सेंटीमीटर दूर रखी पुस्तक और 30 मीटर दूर लगे सूचना-पट्ट — दोनों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। इसलिए दोनों वक्रताएँ एक ही लेंस में घिस दी जाती हैं और उनका जोड़ एक वक्र रेखा के रूप में दिखाई देता है।
संकेत: इस प्रश्न का उत्तर अध्याय में नहीं दिया गया है — यह आपको वास्तविक ऐनक ध्यान से देखने के लिए प्रेरित करता है। किसी बुज़ुर्ग के पढ़ने के चश्मे को तिरछे प्रकाश में देखिए, रेखा सरलता से दिख जाएगी।
प्र4.
अपने प्रश्नों को साझा कीजिए
उत्तर

इस पृष्ठ के चित्र देखकर आपके मन में जो प्रश्न वास्तव में उठते हैं, उन्हें अपनी अभ्यास पुस्तिका के आरंभ में लिखिए। अध्याय पूरा होने तक आपको इनमें से हर प्रश्न का उत्तर देना आ जाना चाहिए।

नमूना प्रश्न:

  • चम्मच के भीतरी पृष्ठ में मेरा चेहरा उल्टा और बाहरी पृष्ठ में सीधा क्यों दिखता है?
  • क्या कोई ऐसी दूरी होती है जिस पर अवतल दर्पण का प्रतिबिंब पलट जाता है? उस दूरी में विशेष क्या है?
  • अवतल दर्पण कागज जला सकता है, पर उतने ही आमाप का समतल दर्पण क्यों नहीं?
  • दर्पण में प्रतिबिंब दिखता है और लेंस के माध्यम से वस्तु दिखती है — यह अंतर क्यों?
  • सड़क के तीखे मोड़ों पर उत्तल दर्पण लगाए जाते हैं। क्या वहाँ अवतल दर्पण काम करेगा?
संकेत: अच्छा प्रश्न वह है जो आपके किसी वास्तविक प्रेक्षण से जुड़ा हो और ‘क्यों’ या ‘यदि ऐसा हो तो’ पूछे। ‘दो दर्पण आमने-सामने रखने पर क्या होगा?’ ‘दर्पण क्या है?’ से कहीं अच्छा प्रश्न है।
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