प्र1.
हम अवतल और उत्तल दर्पण में किस प्रकार भेद कर सकते हैं?
उत्तर
तीन शीघ्र परीक्षण हैं, और तीनों अलग-अलग बातें जाँचते हैं।
| परीक्षण | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण |
|---|---|---|
| पार्श्व से देखना (क्रियाकलाप 10.2) | चमकीला पृष्ठ भीतर की ओर धँसा | चमकीला पृष्ठ बाहर की ओर उभरा |
| समीप रखी वस्तु का प्रतिबिंब | सीधा और आवर्धित | सीधा और लघुकृत |
| वस्तु को दूर ले जाने पर | प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है | प्रतिबिंब सीधा ही रहता है, केवल छोटा होता है |
| समांतर किरणपुंज डालने पर | परावर्तित पुंज अभिसरित होता है | परावर्तित पुंज अपसरित होता है |
प्रतिबिंब वाला परीक्षण सबसे भरोसेमंद क्यों है: वक्रता बहुत कम हो तो आकृति वाला परीक्षण चूक सकता है, पर उसी वक्रता का प्रभाव प्रतिबिंब में सरलता से दिख जाता है। और किरणपुंज वाला परीक्षण तो मूल कारण तक पहुँचता है — अभिसरण या अपसरण ही वह एक गुण है जो सीधे इस बात से निकलता है कि पृष्ठ भीतर वक्रित है या बाहर।
संकेत: समतल दर्पण का उत्तर तीसरी पंक्ति में मिलेगा — उसमें प्रतिबिंब हर दूरी पर बराबर आमाप का रहता है और समांतर पुंज समांतर ही रहता है।