कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.3

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दोनों दर्पणों को मेज पर एक दूसरे के समीप सीधा खड़ा करके रखिए। वस्तु को उनके सामने थोड़ी दूरी (3 – 4 सेंटीमीटर) पर रखिए जैसे चित्र 10.5 (क) में दर्शाया गया है। आप प्रत्येक दर्पण में किस प्रकार का प्रतिबिंब देखते हैं? क्या प्रतिबिंबों का आमाप उतना ही है जितना उनके सामने रखी वस्तु का है? क्या वे सीधे हैं? क्या आप प्रतिबिंबों में पार्श्व परिवर्तन देखते हैं? अपनी अभ्यास पुस्तिका में अपने अवलोकनों को लिखिए।
उत्तर

खिलौना केवल 3–4 सेंटीमीटर दूर रखने पर —

दर्पणआमापसीधा या उल्टा?पार्श्व परिवर्तन?
अवतलआवर्धित — खिलौने से बड़ासीधाहाँ
उत्तललघुकृत — खिलौने से छोटासीधाहाँ

अतः बीच वाले प्रश्न का उत्तर नहीं है — किसी भी दर्पण में प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आमाप का नहीं है, और यही समतल दर्पण से पहला स्पष्ट अंतर है। इस अल्प दूरी पर दोनों प्रतिबिंब सीधे हैं और दोनों में पार्श्व परिवर्तन दिखता है।

पार्श्व परिवर्तन दोनों में क्यों: पार्श्व परिवर्तन वक्रता के कारण होता ही नहीं। यह इसलिए होता है कि हम वस्तु को अपनी ओर से नहीं, दर्पण की ओर से देख रहे होते हैं — खिलौने का जो भाग आपके दाहिने हाथ की ओर है, प्रतिबिंब में वह बाईं ओर आ जाता है। यह उलटाव समतल, अवतल और उत्तल — तीनों दर्पणों में समान रूप से होता है।
प्र2.
अब धीरे-धीरे वस्तु को दर्पणों से दूर ले जाइए (चित्र 10.5, ख)। दोनों दर्पणों के प्रतिबिंबों में आप क्या परिवर्तन देखते हैं? प्रतिबिंब का आमाप घटता है या बढ़ता है? क्या प्रतिबिंब सीधे बने रहते हैं? ये सब प्रेक्षण भी अभ्यास पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर

अवतल दर्पण। सीधा प्रतिबिंब पहले और बड़ा होता है। एक विशेष दूरी पर वह धुँधला पड़ जाता है; उसके आगे प्रतिबिंब उल्टा होकर लौटता है — पहले आवर्धित, और खिलौना जितना दूर जाता जाए उतना ही लगातार छोटा होता जाता है।

उत्तल दर्पण। यहाँ कुछ नाटकीय नहीं होता। प्रतिबिंब पूरे समय सीधा रहता है और खिलौना पीछे ले जाने पर केवल थोड़ा और छोटा हो जाता है।

केवल अवतल दर्पण का प्रतिबिंब ही क्यों पलटता है: अवतल दर्पण परावर्तित किरणों को अभिसरित करता है, इसलिए एक निश्चित वस्तु-दूरी के बाद वे दर्पण के सामने ही एक-दूसरे को काट देती हैं। प्रकाश के कट जाने पर ऊपर और नीचे आपस में बदल जाते हैं और प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है। उत्तल दर्पण परावर्तित किरणों को अपसरित करता है; वे कभी कटती ही नहीं, इसलिए उसका प्रतिबिंब वस्तु कहीं भी रखी जाए, कभी उल्टा नहीं हो सकता।
प्र3.
अपने अवलोकनों का विश्लेषण कीजिए और निष्कर्ष निकालिए।
उत्तर

निष्कर्ष 1. गोलीय दर्पण समतल दर्पण की भाँति व्यवहार नहीं करते। समतल दर्पण सदैव वस्तु के बराबर आमाप का सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जबकि गोलीय दर्पण में वस्तु की दूरी बदलते ही प्रतिबिंब का आमाप बदल जाता है।

निष्कर्ष 2. अवतल दर्पण का प्रतिबिंब आवर्धित, बराबर आमाप का अथवा लघुकृत हो सकता है और सीधा या उल्टा भी — यह पूरी तरह दर्पण से वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष 3. उत्तल दर्पण कहीं अधिक अनुमानयोग्य है — वस्तु की दूरी चाहे जो हो, इसका प्रतिबिंब सदैव सीधा और सदैव लघुकृत होता है।

निष्कर्ष 4. पार्श्व परिवर्तन तीनों प्रकार के दर्पणों में दिखता है, इसलिए इससे दर्पणों में भेद नहीं किया जा सकता।

संकेत: निष्कर्ष लिखते समय परिणाम के साथ शर्त भी लिखिए — ‘वस्तु समीप रखने पर आवर्धित एवं सीधा’ निष्कर्ष है; अकेला ‘आवर्धित’ निष्कर्ष नहीं है।
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