प्र1.
सही बात है। किंतु अपने आस-पास हम उत्तल एवं अवतल दर्पणों का उपयोग कहाँ-कहाँ देखते हैं?
उत्तर
प्रत्येक उपयोग ठीक उसी गुण के कारण चुना गया है जो वह दर्पण प्रकाश पुंज के साथ करता है।
| दर्पण | कहाँ उपयोग होता है | वही दर्पण क्यों |
|---|---|---|
| अवतल | टॉर्च के बल्ब के पीछे परावर्तक; कार और स्कूटर के अग्रदीप | बल्ब को उपयुक्त स्थान पर रखने पर परावर्तक से प्रकाश एक सशक्त समांतर पुंज के रूप में निकलता है जो दूर तक जाता है |
| अवतल | दंत चिकित्सक का दर्पण | दाँत के पास रखने पर दाँत का सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब बनता है |
| अवतल | परावर्तक दूरदर्शक का मुख्य दर्पण; सौर-कुकर और सौर भट्टी | बड़े क्षेत्र से प्रकाश समेटकर एक बिंदु पर संकेंद्रित कर देता है |
| उत्तल | वाहनों का पार्श्व-दृश्य दर्पण | सीधा प्रतिबिंब और पीछे की सड़क का कहीं अधिक विस्तृत दृश्य |
| उत्तल | चौराहों और तीक्ष्ण मोड़ों पर लगा सड़क सुरक्षा दर्पण | दोनों ओर के चालक दूसरी ओर का यातायात देख सकें और टकराने से बच सकें |
| उत्तल | बड़े भंडार गृहों में चौकसी दर्पण | एक ही दर्पण से बड़ा क्षेत्र दृष्टि में रहता है, जिससे चोरी की संभावना घटती है |
सूची के पीछे का नियम: जहाँ प्रकाश को समेटकर संकेंद्रित करना हो, या पास रखी छोटी वस्तु को आवर्धित करना हो, वहाँ अवतल दर्पण लगता है। जहाँ सही आमाप से अधिक महत्त्व विस्तृत दृश्य का हो, वहाँ उत्तल दर्पण।