प्र1.
सूर्य की किरणों के मार्ग में अवतल दर्पण के स्थान पर उत्तल लेंस रख कर क्रियाकलाप 10.7 को दोहराइए (चित्र 10.19)। क्या आप इसका उपयोग करके कागज को जला सकते हैं?
उत्तर
हाँ। उत्तल लेंस को इस प्रकार पकड़िए कि सूर्य का प्रकाश उससे होकर कागज पर पड़े, और दूरी तब तक समंजित कीजिए जब तक प्रकाश का धब्बा सबसे छोटा और सबसे चमकदार न हो जाए। एक-दो मिनट स्थिर पकड़े रखने पर कागज भूरा पड़ता है, धुआँ देता है और जल भी सकता है — ठीक वैसे ही जैसे अवतल दर्पण के साथ हुआ था।
लेंस यह काम उतनी ही अच्छी तरह क्यों कर लेता है: सूर्य की किरणें समांतर आती हैं। उत्तल लेंस समांतर किरणपुंज को अपने फोकस पर लाकर मिलाता है, इसलिए लेंस के पूरे मुख पर पड़ी सारी प्रकाश ऊर्जा कुछ मिलीमीटर चौड़े धब्बे पर पहुँच जाती है। वहाँ प्रति सेकंड आने वाली ऊर्जा उससे कहीं अधिक होती है जितनी कागज वायु को दे पाता है, इसलिए उसका ताप बढ़ते-बढ़ते जलने के ताप तक पहुँच जाता है। दर्पण यह परावर्तन से करता है और लेंस अपवर्तन से, किंतु भौतिक कारण दोनों में एक ही है — प्रकाश ऊर्जा का संकेंद्रण।
सुरक्षा सर्वप्रथम: सूर्य को सीधे अथवा लेंस के माध्यम से न देखें, इससे नेत्रों को क्षति पहुँच सकती है। यह कार्य वयस्क के मार्गदर्शन में करें और पास में जल रखें।