अब पतली काँच पट्टिका, उत्तल लेंस और अवतल लेंस पर चित्र 10.18 में दर्शाए अनुसार प्रकाश के अनेक समांतर किरणपुंज आपतित होने दीजिए। क्या इनमें से प्रकाश का समांतर किरणपुंज उसी प्रकार पार होता है जैसे चित्र में दर्शाया गया है?
उत्तर
नहीं — केवल समतल पट्टिका ही किरणपुंज को अछूता छोड़ती है।
पतली पारदर्शी काँच पट्टिका — किरणपुंज यथावत पार हो जाता है और दूसरी ओर भी समांतर रहता है।
उत्तल लेंस — किरणपुंज पास आ जाते हैं; वे अभिसरित होकर एक बिंदु पर मिलते हैं।
अवतल लेंस — किरणपुंज फैल जाते हैं; वे अपसरित हो जाते हैं।
प्रकाश काँच में प्रवेश करते समय और बाहर निकलते समय मुड़ता है। उत्तल लेंस बीच में मोटा होता है, इसलिए बाहरी किरणें भीतर की ओर मुड़कर F पर मिलती हैं। अवतल लेंस बीच में पतला होता है, इसलिए किरणें बाहर की ओर मुड़ती हैं और केवल F से आती हुई प्रतीत होती हैं। बिंदु F को लेंस का फोकस कहते हैं।
समतल पट्टिका कुछ क्यों नहीं बदलती: इसके दोनों फलक समांतर होते हैं, इसलिए किरण भीतर जाते समय जितनी मुड़ती है, बाहर आते समय ठीक उतनी ही वापस मुड़ जाती है। वह अपनी मूल दिशा में ही निकलती है — केवल थोड़ी बगल में खिसकी हुई। लेंस के फलक वक्रित होते हैं और इसलिए समांतर नहीं होते, अतः दोनों मोड़ एक-दूसरे को काटते नहीं; और कितना नहीं काटते यह इस पर निर्भर करता है कि किरण लेंस के मध्य से कितनी दूर से गुज़री। यही समांतर पुंज को अभिसारी या अपसारी बना देता है।
प्र2.
अपने अवलोकनों को अभिलेखित कीजिए और उनका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर
प्रकाश किससे होकर गुज़रा
निकलने वाले किरणपुंज ने क्या किया
नाम
पतली पारदर्शी काँच पट्टिका
समांतर ही रहा — यथावत पार हो गया
—
उत्तल लेंस
एक बिंदु पर मिल गया
अभिसारी लेंस
अवतल लेंस
फैल गया
अपसारी लेंस
विश्लेषण. उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस और अवतल लेंस को अपसारी लेंस भी कहते हैं। क्रियाकलाप 10.6 से तुलना कीजिए — उत्तल लेंस पारगत प्रकाश के साथ वही करता है जो अवतल दर्पण परावर्तित प्रकाश के साथ करता है, और अवतल लेंस वही जो उत्तल दर्पण करता है।
संकेत: दोनों पुस्तकों पर कागज एक ही तल में रखिए और कमरा कुछ अंधेरा रखिए। किरणपुंज मंद हुआ तो उत्तल लेंस का मिलन-बिंदु दिखना कठिन हो जाता है।
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