प्र1.
अवतल दर्पण प्रकाश किरणपुंज को अभिसरित करता है तो क्या इससे प्रकाश एक छोटे क्षेत्र में संकेंद्रित नहीं हो जाएगा?
उत्तर
हाँ, ठीक यही होता है। अवतल दर्पण अपने पूरे पृष्ठ पर पड़ा प्रकाश समेटकर एक बहुत छोटे धब्बे पर पहुँचा देता है।
दर्पण पर आपतित प्रकाश : पूरे पृष्ठ पर फैला हुआ
परावर्तन के बाद : कुछ मिलीमीटर के धब्बे में सिमटा हुआ
→ उस धब्बे पर प्रति एकांक क्षेत्रफल प्रकाश ऊर्जा कई गुना अधिक
परावर्तन के बाद : कुछ मिलीमीटर के धब्बे में सिमटा हुआ
→ उस धब्बे पर प्रति एकांक क्षेत्रफल प्रकाश ऊर्जा कई गुना अधिक
संकेंद्रण से ऊष्मा क्यों उत्पन्न होती है: प्रकाश ऊर्जा वहन करता है। बड़ा दर्पण उसे बड़ी मात्रा में रोकता है। यदि वह सारी ऊर्जा कागज के अत्यंत छोटे भाग पर डाल दी जाए तो कागज प्रति सेकंड इतनी ऊर्जा पाने लगता है जितनी वह आस-पास की वायु को नहीं दे पाता, इसलिए उसका ताप बढ़ता जाता है — और अंततः वह जलने योग्य ताप तक पहुँच जाता है। क्रियाकलाप 10.7 यही प्रयोग है।
सुरक्षा सर्वप्रथम: सूर्य की ओर अथवा सूर्य को परावर्तित करते दर्पण की ओर कभी सीधे न देखें, और संकेंद्रित प्रकाश कभी किसी के चेहरे पर न डालें।