प्र1.
दर्पण और कागज के बीच की दूरी को समंजित कीजिए जब तक कि इस पर एक स्पष्ट चमकदार धब्बा न बन जाए जैसे चित्र 10.12 में दर्शाया गया है।
उत्तर
कागज को दर्पण की ओर और उससे दूर धीरे-धीरे ले जाइए। प्रकाश का धब्बा पहले छोटा होता है, फिर एक छोटा, अत्यंत चमकदार और तीखे किनारों वाला धब्बा बनता है, और उसके बाद फिर चौड़ा होने लगता है। जिस स्थिति पर धब्बा सबसे छोटा और सबसे चमकदार हो, वहीं रुक जाइए।
एक ही सर्वोत्तम दूरी क्यों होती है: सूर्य इतना दूर है कि उसकी किरणें दर्पण तक व्यावहारिक रूप से समांतर पहुँचती हैं। अवतल दर्पण समांतर किरणपुंज को अपने सामने एक विशेष बिंदु पर लाकर मिलाता है, जिसे दर्पण का फोकस कहते हैं। कागज को इससे पास रखिए तो किरणें अभी मिली ही नहीं होतीं; दूर रखिए तो वे मिलकर फिर फैलने लगती हैं। केवल फोकस पर ही सारा परावर्तित प्रकाश एक छोटे धब्बे में सिमटता है।
संकेत: जो दूरी आपने अभी पाई है वही आपके दर्पण की फोकस दूरी है। दर्पण से कागज तक की दूरी नापकर अभ्यास पुस्तिका में लिख लीजिए — अधिक गहरे दर्पण की फोकस दूरी कम होती है।