कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.7

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दर्पण और कागज के बीच की दूरी को समंजित कीजिए जब तक कि इस पर एक स्पष्ट चमकदार धब्बा न बन जाए जैसे चित्र 10.12 में दर्शाया गया है।
उत्तर

कागज को दर्पण की ओर और उससे दूर धीरे-धीरे ले जाइए। प्रकाश का धब्बा पहले छोटा होता है, फिर एक छोटा, अत्यंत चमकदार और तीखे किनारों वाला धब्बा बनता है, और उसके बाद फिर चौड़ा होने लगता है। जिस स्थिति पर धब्बा सबसे छोटा और सबसे चमकदार हो, वहीं रुक जाइए।

एक ही सर्वोत्तम दूरी क्यों होती है: सूर्य इतना दूर है कि उसकी किरणें दर्पण तक व्यावहारिक रूप से समांतर पहुँचती हैं। अवतल दर्पण समांतर किरणपुंज को अपने सामने एक विशेष बिंदु पर लाकर मिलाता है, जिसे दर्पण का फोकस कहते हैं। कागज को इससे पास रखिए तो किरणें अभी मिली ही नहीं होतीं; दूर रखिए तो वे मिलकर फिर फैलने लगती हैं। केवल फोकस पर ही सारा परावर्तित प्रकाश एक छोटे धब्बे में सिमटता है।
संकेत: जो दूरी आपने अभी पाई है वही आपके दर्पण की फोकस दूरी है। दर्पण से कागज तक की दूरी नापकर अभ्यास पुस्तिका में लिख लीजिए — अधिक गहरे दर्पण की फोकस दूरी कम होती है।
प्र2.
कुछ समय तक दर्पण एवं कागज की स्थितियाँ स्थिर बनाए रखिए। क्या कागज जलने लगता है और इससे धुआँ उठने लगता है?
उत्तर

हाँ। स्थिर पकड़े रखने पर चमकदार धब्बे वाला कागज पहले भूरा पड़ता है, फिर उससे धुएँ की पतली लट उठती है, और अंततः वह जल भी सकता है।

कागज जलता क्यों है: दर्पण अपने पूरे मुख पर पड़ी धूप समेटकर कुछ मिलीमीटर चौड़े धब्बे पर उड़ेल देता है। अब उस धब्बे पर प्रति सेकंड आने वाली ऊर्जा उससे कई गुना है जो उसी कागज को खुले में मिलती, जबकि कागज ऊष्मा वायु को उतनी ही धीमी गति से दे पाता है। इसलिए ऊष्मा एकत्र होती जाती है, उस छोटे भाग का ताप कागज के जलने के ताप से ऊपर चला जाता है और वह जल उठता है। उतने ही आमाप का समतल दर्पण यह नहीं कर सकता — वह उसी ऊर्जा को पहले जितने ही बड़े क्षेत्र पर फैला देता है, इसलिए कुछ भी अधिक गर्म नहीं होता।
सुरक्षा सर्वप्रथम: यह क्रियाकलाप सदैव शिक्षक अथवा किसी वयस्क के मार्गदर्शन में ही करें, सूर्य की ओर या दर्पण में उसके प्रतिबिंब की ओर न देखें, प्रकाश केवल कागज पर संकेंद्रित करें और पास में जल रखें।
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