कुतूहल अध्याय 13 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सूर्य से दूरी के सापेक्ष दूसरा ग्रह शुक्र है जिसका औसत तापमान सर्वाधिक है एवं यह सबसे गरम ग्रह भी है। ऐसा क्यों है?
उत्तर

इसका कारण उसका वायुमंडल है, दूरी नहीं। शुक्र का वायुमंडल लगभग पूर्णत: कार्बन डाइऑक्साइड से बना है और कार्बन डाइऑक्साइड ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती।

ऊर्जा को तीन चरणों में देखिए —

  1. सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से होकर आता है एवं ग्रह की सतह को गरम करता है।
  2. गरम हुई सतह स्वयं विकिरण उत्सर्जित करती है, जो अंतरिक्ष की ओर जाता है।
  3. सघन वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड उस बाहर जाते विकिरण को अवशोषित कर लेती है, उसे निकलने नहीं देती। ऊष्मा भीतर ही रह जाती है।

इसे हरितगृह प्रभाव कहते हैं। शुक्र पर यह इतना प्रबल है कि वहाँ का तापमान लगभग 450 °C हो जाता है — बुध से भी अधिक, जबकि बुध सूर्य के अधिक निकट है और उसे अधिक प्रकाश मिलता है।

कार्बन डाइऑक्साइड की परत सूर्य सतह द्वारा उत्सर्जित विकिरण अवशोषित होकर पुन: नीचे लौट आता है गरम हुई सतह
हरितगृह प्रभाव। सूर्य का प्रकाश सरलता से भीतर आ जाता है; सतह द्वारा उत्सर्जित ऊष्मा सरलता से बाहर नहीं जा पाती।
ऐसा क्यों होता है: किसी ग्रह का तापमान इस संतुलन से तय होता है कि उसे कितनी ऊर्जा मिलती है और कितनी वह खोता है। दूरी तय करती है कि कितनी आती है; वायुमंडल तय करता है कि कितनी बाहर जा सकती है। शुक्र को बुध से कम मिलती है परंतु वह उससे कहीं कम खोता है, अत: उसका तापमान बहुत ऊँचा स्थिर हो जाता है।
क्या आप जानते हैं? पृथ्वी पर यही प्रभाव मंद है और हम उस पर निर्भर हैं — इसके बिना पृथ्वी अपनी ऊष्मा अंतरिक्ष में खोकर जल को द्रव रखने के लिए बहुत ठंडी हो जाती। आज समस्या हरितगृह प्रभाव नहीं, अपितु जीवाश्म ईंधन जलाकर जोड़ी जा रही अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड है।
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