कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 13 हमारा आवास — पृथ्वी एक अद्वितीय जीवनदायी ग्रह के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पृथ्वी पर समस्त जीवन एक अत्यंत पतली परत में सीमित है। सबसे ऊँचे शिखर से सबसे गहरी गर्त तक की दूरी लगभग 20 km है जबकि पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6400 km है — यदि पृथ्वी सेब के आकार की होती तो भू-पर्पटी सेब के छिलके जितनी पतली होती। पृथ्वी वासयोग्य क्षेत्र (गोल्डीलॉक्स जोन) में स्थित है — तारे से वह दूरी जहाँ जल द्रव अवस्था में रह पाता है। इसकी लगभग वृत्ताकार कक्षा के कारण वर्ष भर प्रकाश एवं ऊष्मा लगभग समान बनी रहती है, अत: अधिकांश स्थानों पर अत्यधिक गरमी या ठंड नहीं होती। पृथ्वी का आकार भी उपयुक्त है। इसका गुरुत्व वायुमंडल को रोके रखने के लिए पर्याप्त है — मंगल का वायुमंडल 100 गुना कम सघन है एवं बुध पर वायुमंडल है ही नहीं — परंतु इतना अधिक नहीं कि हम अपने ही भार से दब जाएँ। वायुमंडल तीन कार्य करता है — श्वसन के लिए ऑक्सीजन , पराबैंगनी किरणों को रोकने वाली ओजोन परत (ऑक्सीजन के तीन परमाणु वाला अ
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| पद | अर्थ | जीवन के लिए महत्त्व | अध्याय में कहाँ |
|---|---|---|---|
| भू-पर्पटी | पृथ्वी की पतली ठोस बाहरी परत | समस्त जीवन इसी पर अथवा इसके ठीक ऊपर है — यह सेब के छिलके जितनी पतली है | चित्र 13.1, खंड 13.1 |
| वासयोग्य क्षेत्र (गोल्डीलॉक्स जोन) | तारे से वह दूरी जहाँ जल द्रव अवस्था में रह पाता है | हमारी अब तक की जानकारी के अनुसार जीवन के विकास के लिए द्रव जल आवश्यक है | चित्र 13.4, खंड 13.3.1 |
| हरितगृह प्रभाव | कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें सूर्य से गरम हुई पृथ्वी द्वारा उत्सर्जित विकिरण को अवशोषित कर ऊष्मा रोक लेती हैं | पृथ्वी पर मंद रूप में यह जल को द्रव अवस्था में बनाए रखता है; शुक्र पर यही 450 °C तक ले जाता है | चित्र 13.2, खंड 13.2 |
| ओजोन परत | वायुमंडल का वह भाग जिसमें ओजोन (ऑक्सीजन के तीन परमाणु वाला अणु) होती है | सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकने वाली ढाल, जो जीवित कोशिकाओं का क्षय करती हैं | खंड 13.3.2 |
| कॉस्मिक किरणें एवं सौर पवन | दूर ब्रह्मांड से तथा सूर्य से आने वाले उच्च ऊर्जा वाले कण | ये वायुमंडल को क्षति एवं ओजोन परत का क्षय कर सकते हैं; पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र इन्हें दूर धकेलता है | खंड 13.3.3 |
| पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र | पृथ्वी के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ उसका चुंबकीय प्रभाव अनुभव होता है; इसका कारण क्रोड में पिघले लोहे की गति मानी जाती है | वायुमंडल के लिए एवं इस प्रकार जीवन के लिए सुरक्षा कवच | खंड 13.3.3 |
| जलमंडल | पृथ्वी का समस्त जल — तालाब, झील, नदी, झरने, समुद्र, महासागर एवं भूमिगत जल; सतह का लगभग 70 प्रतिशत | जल अच्छा विलायक है, पौधों में पोषक तत्वों का संचरण करता है, जंतुओं में तापमान नियंत्रित करता है, तथा करोड़ों जीवों का आवास है | खंड 13.4.1 |
| भूमंडल | पृथ्वी का ठोस भाग — चट्टानें, मृदा एवं खनिज | नाइट्रोजन एवं पोटैशियम जैसे पोषक तत्व तथा लवण, कोयला, तेल, आयरन एवं कॉपर देता है | खंड 13.4.2 |
| भूविविधता | भू-आकृतियों, चट्टानों एवं मृदा की विविधता तथा उन्हें आकार देने वाले प्रक्रम | इससे अद्वितीय पर्यावासों का सर्जन होता है जहाँ भिन्न-भिन्न प्रकार के जीव पनप सकते हैं | चित्र 13.9, खंड 13.4.2 |
| जैवमंडल | समस्त जीवित प्राणी तथा वे स्थान जहाँ वे रहते हैं — पृथ्वी, जल एवं वायु | यहीं जीव अपने परिवेश के साथ पारस्परिक क्रिया करके अस्तित्व बनाए रखते एवं वृद्धि करते हैं | खंड 13.4.3 |
| आनुवंशिक पदार्थ (जीन) | प्रत्येक कोशिका के भीतर संगृहित अनुदेश जो बताते हैं कि विकास कैसे होना है | इन्हीं से बछिया गाय बनती है; इनमें आए छोटे परिवर्तन अनुकूलन का आधार बनते हैं | खंड 13.5 |
| युग्मक | विशिष्ट जनन कोशिकाएँ जिनमें जनक के आनुवंशिक पदार्थ का आधा भाग ही होता है | दोनों जनकों से आधा-आधा मिलकर एक पूरा सेट बनता है, अत: अनुदेश प्रत्येक पीढ़ी में दोगुने नहीं होते | खंड 13.5.2 |
| कायिक प्रवर्धन | अलैंगिक जनन जिसमें पत्ती, तना या जड़ को मृदा में रोपने से नया पौधा बनता है | बाँस, गन्ना, आलू, अदरक एवं मनी प्लांट इसी विधि से बिना बीज के उगते हैं | चित्र 13.11, खंड 13.5.1 |
| त्रिग्रहीय संकट | जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का हनन एवं प्रदूषण — तीनों एक साथ | आज पृथ्वी पर जीवन के समक्ष ये सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं | खंड 13.6 |
अभ्यास
- खोजबीन और विचार करें
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 13.1
- क्रियाकलाप 13.2
- पाठ्य प्रश्न
- एक सोपान ऊपर
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 13.3
- पाठ्य प्रश्न
- जिज्ञासा बनाए रखें
- खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें