कुतूहल अध्याय 13 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्रत्यक्ष रूप से बच्चे को जन्म देने एवं अंडे देने के लाभ एवं हानि क्या हैं?
उत्तर

दोनों एक ही समस्या के उत्तर हैं — विकसित होते भ्रूण को पोषण एवं सुरक्षा कैसे दी जाए। दोनों में सुरक्षा की कीमत भिन्न प्रकार से चुकाई जाती है।

बच्चे को जन्म देनाअंडे देना
लाभभ्रूण माँ के भीतर विकसित होता है, अत: मौसम, परभक्षियों एवं सूखने से सुरक्षित रहता है। खाद्य पदार्थ एवं ऑक्सीजन निरंतर मिलते रहते हैं, अत: शिशु अच्छी तरह विकसित होकर जन्म लेता है।मादा को भार नहीं उठाना पड़ता, अत: वह सामान्य रूप से चल-फिर, खा एवं बच सकती है। एक बार में अनेक अंडे दिए जा सकते हैं, और जल में तो सहस्रों एक साथ।
हानिएक बार में बहुत कम संतति। माँ को भार एवं लागत उठानी पड़ती है तथा लंबे समय तक बँधे रहना पड़ता है। माँ की मृत्यु होने पर संतति भी नहीं बचती।पूरे विकास का भोजन पहले ही अंडे में भरना पड़ता है। अंडा देने के पश्चात वह असुरक्षित रहता है — अनेक अंडे खा लिए या नष्ट हो जाते हैं, अत: अधिकांश से बच्चे नहीं निकलते।
ऐसा क्यों होता है: यहाँ एक अदला-बदली है — भीतर विकास में बहुत कम संतति पर बहुत अधिक व्यय होता है, जबकि अंडे देने में बहुत अधिक संतति पर बहुत कम। दोनों सफल होती हैं और यह परिवेश तय करता है कि कौन-सी। जल में, जहाँ अंडे एवं युग्मक सीधे छोड़े जा सकते हैं, सहस्रों अंडे देना उपयुक्त है; स्थल पर, जहाँ भ्रूण सूख जाएगा, उसे भीतर रखना या कवच में बंद करना अधिक सुरक्षित है।
प्र2.
क्या आपको लगता है कि कुत्ते, गाय या मनुष्य पक्षियों की भाँति अंडे दे सकते हैं? यदि हाँ तो क्यों अथवा क्यों नहीं?
उत्तर

नहीं, वे ऐसा नहीं कर सकते। अंडे देना कोई विकल्प नहीं है जिसे जीव चुनता हो; यह उसके संपूर्ण शरीर की रचना है, और वह रचना उसे मिले अनुदेशों से तय होती है।

तीन कारण, गहराई के क्रम में —

  • शरीर में उसकी व्यवस्था ही नहीं है। मुर्गी का शरीर ऐसा बड़ा अंडा बनाता है जिसमें भ्रूण के संपूर्ण विकास के लिए पर्याप्त खाद्य पदार्थ भरा हो, और फिर उस पर कवच चढ़ाता है। कुत्ता, गाय या मनुष्य अत्यंत छोटा अंडाणु बनाते हैं जिसमें लगभग कोई संचित भोजन नहीं होता, क्योंकि भोजन बाद में माँ के शरीर से मिलना है।
  • पोषण की प्रक्रिया विपरीत है। स्तनधारियों में युग्मज का भ्रूण में विकास मादा के शरीर के भीतर होता है एवं माँ का शरीर जन्म तक खाद्य पदार्थ एवं ऑक्सीजन देता रहता है। बाहर दिए गए अंडे को ऐसी कोई आपूर्ति नहीं मिलती।
  • अनुदेश बदले नहीं जा सकते। बछिया इसलिए गाय बनती है क्योंकि उसे गाय के पूरे अनुदेश मिले हैं। जनन छोटे-छोटे परिवर्तन स्थानांतरित कर सकता है और अनेक पीढ़ियों में वे जुड़ भी सकते हैं — परंतु किसी एक पीढ़ी को पूरी नई शारीरिक रचना नहीं दी जा सकती।
ऐसा क्यों होता है: जनन जनक के पास पहले से उपस्थित अनुदेशों की प्रतिलिपि बनाता एवं उन्हें फेंटता है। वह माँग पर नए अनुदेश नहीं गढ़ता। जनन की पूरी विधि बदलने के लिए बहुत बड़ी संख्या में समन्वित परिवर्तन चाहिए, और वे यदि होते भी हैं तो अत्यंत लंबे समय में।
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