कुतूहल अध्याय 13 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
बाँस और गन्ने किस प्रकार नए पौधे बनाते हैं? मैंने कभी उनके बीज नहीं देखे।
उत्तर

ये कायिक प्रवर्धन द्वारा बढ़ते हैं — जनक पौधे का एक भाग ही नया पौधा बन जाता है, अत: बीज की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

  • गन्ना तने के छोटे टुकड़ों से उगाया जाता है। प्रत्येक टुकड़े में एक पर्वसंधि होती है जिस पर कली (‘आँख’) होती है। नम मृदा में रखने पर कली से प्ररोह ऊपर निकलता है एवं पर्वसंधि से जड़ें नीचे जाती हैं।
  • बाँस मुख्यत: भूमिगत तनों (प्रकंद) द्वारा फैलता है जो किनारे की ओर बढ़कर नए तने ऊपर भेजते हैं; पर्वसंधि वाला कटा हुआ तना भी जड़ें बना सकता है।
ऐसा क्यों होता है: तने की पर्वसंधि केवल एक गाँठ नहीं है — उसमें विभाजनशील जीवित ऊतक की कली तथा संचित भोजन होता है। नमी, वायु एवं उपयुक्त ताप मिलते ही वह ऊतक नीचे जड़ें एवं ऊपर प्ररोह बना लेता है, और पौधे को स्वतंत्र होने के लिए इतना ही चाहिए। यह अलैंगिक जनन है — एकल जनक, और संतति कोशिका के भीतर के अनुदेशों की दृष्टि से पूर्णत: जनक के समान।
क्या आप जानते हैं? चूँकि खेत का प्रत्येक गन्ना एक ही जनक से आया है, सभी सर्वसमान होते हैं — इसीलिए पूरी फसल एक साथ पकती है, और इसीलिए एक ही रोग पूरे खेत में फैल भी सकता है।
प्र2.
क्या आप अपने आस-पास उपर्युक्त विधि द्वारा उगने वाले पौधों का अवलोकन कर एक सूची बना सकते हैं?
उत्तर

रसोई, बगीचे एवं खेत के अनेक पौधे बीज से नहीं, भागों से उगाए जाते हैं। देखिए कि कौन-सा भाग रोपा जाता है — उसी से पता चलता है कि कायिक प्रवर्धन किस प्रकार का है।

पौधारोपा जाने वाला भागकहाँ देख सकते हैं
आलूकंद, जिस पर ‘आँखें’ (कलियाँ) होती हैंरसोई में अंकुरित आलू
अदरक, हल्दीप्रकंद (भूमिगत तना)रसोई, घरेलू बगीचा
प्याज, लहसुनशल्ककंदरसोई, बाज़ार
गन्नापर्वसंधि युक्त तने की कर्तनगन्ने के खेत
मनी प्लांट, गुलाब, गुड़हल, बोगनवेलियातने की कर्तनविद्यालय का बगीचा, बालकनी के गमले
केलाआधार से निकलने वाला अंत:भूस्तारी (सकर)केले का बगीचा, घर का पिछवाड़ा
ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा)पत्ती — किनारे के खाँचों पर कलियाँ बनती हैंबाड़, गमले
शकरकंद, डहेलियाजड़खेत, फूलों की क्यारी
घास, पुदीनाभूस्तारी — भूमि पर रेंगता तना जो पर्वसंधियों से जड़ें बनाता हैलॉन, घरेलू बगीचा
स्वयं जाँचिए: यह तालिका लेकर विद्यालय के बगीचे में घूमिए। प्रत्येक पौधे के लिए पूछिए — ‘यदि मैं इसका एक टुकड़ा काटकर रोपूँ तो क्या यह उगेगा?’ फिर एक पर करके भी देखिए — काँच के गिलास में रखी मनी प्लांट की कर्तन लगभग एक सप्ताह में जड़ें दिखा देती है।
प्र3.
आप अनुमान लगा सकते हैं कि यदि माता-पिता दोनों अपने आनुवंशिक पदार्थ नए जीव को बनाने में स्थानांतरित करते हैं तो क्या इस नए जीव में आनुवंशिक अनुदेश दोगुने नहीं हो जाएँगे? इसके साथ ही क्या ये आगे आने वाली पीढ़ी में भी दोगुने नहीं होते जाएँगे?
उत्तर

नहीं — और इसका कारण यह है कि प्रत्येक जनक अपना पूरा सेट स्थानांतरित करता ही नहीं। वह विशिष्ट जनन कोशिकाएँ बनाता है जिन्हें युग्मक कहते हैं, और युग्मक में जनक के आनुवंशिक पदार्थ का केवल आधा भाग होता है।

नर युग्मक (आधा सेट) + मादा युग्मक (आधा सेट)
= नई कोशिका जिसमें एक पूरा सेट
प्रत्येक जनक से आधा-आधा — दोगुना नहीं
पितापूरा सेट माँपूरा सेट शुक्राणुआधा सेट अंडाणुआधा सेट युग्मजएक पूरा सेट
प्रत्येक जनक में आधा होना, फिर मिलना — इसी से आनुवंशिक पदार्थ की मात्रा पीढ़ी दर पीढ़ी समान बनी रहती है।
ऐसा क्यों होता है: यदि युग्मकों में पूरा सेट होता तो मात्रा वास्तव में प्रत्येक पीढ़ी में दोगुनी होती जाती — 1, 2, 4, 8 — जो असंभव है। मिलने से पहले आधा होना ही कुल मात्रा को स्थिर रखता है। और चूँकि हर बार भिन्न आधा भाग जाता है, वही चरण मात्रा को स्थिर रखने के साथ-साथ विभिन्नता भी उत्पन्न करता है।
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