प्र1.
बाँस और गन्ने किस प्रकार नए पौधे बनाते हैं? मैंने कभी उनके बीज नहीं देखे।
उत्तर
ये कायिक प्रवर्धन द्वारा बढ़ते हैं — जनक पौधे का एक भाग ही नया पौधा बन जाता है, अत: बीज की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
- गन्ना तने के छोटे टुकड़ों से उगाया जाता है। प्रत्येक टुकड़े में एक पर्वसंधि होती है जिस पर कली (‘आँख’) होती है। नम मृदा में रखने पर कली से प्ररोह ऊपर निकलता है एवं पर्वसंधि से जड़ें नीचे जाती हैं।
- बाँस मुख्यत: भूमिगत तनों (प्रकंद) द्वारा फैलता है जो किनारे की ओर बढ़कर नए तने ऊपर भेजते हैं; पर्वसंधि वाला कटा हुआ तना भी जड़ें बना सकता है।
ऐसा क्यों होता है: तने की पर्वसंधि केवल एक गाँठ नहीं है — उसमें विभाजनशील जीवित ऊतक की कली तथा संचित भोजन होता है। नमी, वायु एवं उपयुक्त ताप मिलते ही वह ऊतक नीचे जड़ें एवं ऊपर प्ररोह बना लेता है, और पौधे को स्वतंत्र होने के लिए इतना ही चाहिए। यह अलैंगिक जनन है — एकल जनक, और संतति कोशिका के भीतर के अनुदेशों की दृष्टि से पूर्णत: जनक के समान।
क्या आप जानते हैं? चूँकि खेत का प्रत्येक गन्ना एक ही जनक से आया है, सभी सर्वसमान होते हैं — इसीलिए पूरी फसल एक साथ पकती है, और इसीलिए एक ही रोग पूरे खेत में फैल भी सकता है।