क्या पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने में उसके चुंबकीय क्षेत्र की कोई भूमिका है?
उत्तर
हाँ — यह पूरे ग्रह के चारों ओर एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।
तर्क की शृंखला इस प्रकार है —
ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी के क्रोड में पिघले हुए लोहे की गति ही पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का कारण है; इसीलिए पृथ्वी एक विशाल चुंबक के समान व्यवहार करती है और स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक सदैव एक निश्चित दिशा में स्थिर हो जाता है।
पृथ्वी पर निरंतर अंतरिक्ष से आने वाले सूक्ष्म एवं उच्च ऊर्जा वाले कण टकराते रहते हैं — दूर ब्रह्मांड से आने वाली कॉस्मिक किरणें तथा सूर्य से आने वाली सौर पवन।
ये कण वायुमंडल को क्षति पहुँचा सकते हैं एवं ओजोन परत का क्षय कर सकते हैं, जिससे अधिक हानिकारक पराबैंगनी किरणें भीतर आ जाएँगी।
चुंबकीय क्षेत्र अधिकांश कणों को पृथ्वी से दूर धकेल देता है, जिससे वायुमंडल और इस प्रकार जीवन सुरक्षित रहता है।
सूर्य से एवं दूर ब्रह्मांड से आने वाले उच्च ऊर्जा कण वायुमंडल तक पहुँचने से पहले ही पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा मोड़ दिए जाते हैं।
ऐसा क्यों होता है: सौर पवन एवं कॉस्मिक किरणों के कण आवेशित होते हैं, और चुंबकीय क्षेत्र गतिशील आवेशित कण का पथ बदल देता है। अत: क्षेत्र को उन्हें रोकना नहीं पड़ता — केवल ग्रह के चारों ओर से मोड़ देना पर्याप्त है।
प्र2.
परंतु पृथ्वी पर जीवन कैसे सतत और संचालित है?
उत्तर
किसी एक कारण से नहीं। जीवन चार तंत्रों के निरंतर आदान-प्रदान से बना रहता है — वायुमंडल, जलमंडल, भूमंडल एवं जैवमंडल।
पृथ्वी के चार तंत्र, जिनमें से प्रत्येक शेष को पोषित करता है। किसी एक पर पड़ा दबाव इस पूरे चक्र में घूम जाता है।
वायु, जल एवं सूर्य का प्रकाश। वायुमंडल में वह ऑक्सीजन है जिसका उपयोग मानव, जीव-जंतु एवं पौधे श्वसन के लिए करते हैं। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड एवं मृदा से जल लेकर प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं, जो श्वसन के लिए आवश्यक है। हरितगृह प्रभाव तापमान इतना बनाए रखता है कि जल द्रव अवस्था में रह सके; वायु में उपस्थित जलवाष्प से बादल बनते हैं, वर्षा एवं बर्फ गिरती है और नदियाँ, झीलें व भूमिगत जल पुन: भर जाते हैं।
मृदा, चट्टानें एवं खनिज। भूमंडल नाइट्रोजन एवं पोटैशियम से समृद्ध मृदा देता है — ये पोषक तत्व चट्टानों के मंद अपक्षय तथा पौधों व जंतुओं के अवशेषों से आते हैं — साथ ही लवण, कोयला, तेल एवं आयरन व कॉपर जैसी धातुएँ भी।
जीव। जैवमंडल में पौधे भोजन बनाते हैं, जंतु पौधों या अन्य जंतुओं को खाते हैं, तथा अपघटक मृत जीवों को विघटित करके पोषक तत्व मृदा में वापस कर देते हैं।
ऐसा क्यों होता है: इनमें से प्रत्येक एक चक्र है, एकतरफा आपूर्ति नहीं। पौधों से मुक्त ऑक्सीजन जंतु लेते हैं, जिनकी कार्बन डाइऑक्साइड पुन: पौधों तक पहुँचती है। महासागर से उठा जल वर्षा बनकर लौट आता है। मृदा से लिए पोषक तत्व अपघटक लौटा देते हैं। पदार्थ चक्र में घूमते हैं, समाप्त नहीं होते — इसीलिए एक सीमित आकार के ग्रह पर जीवन अनिश्चित काल तक चल सकता है।
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