प्र1.
पुस्तकों, विश्वसनीय वेबसाइटों द्वारा अथवा अपने विज्ञान के शिक्षक से पूछकर सूची में दी गई जानकारी की जाँच कीजिए। कोई अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारी जो छूट गई हो, उसे जोड़िए।
उत्तर
तालिका 3.1 में दी गई जानकारी सही है। अध्याय से जाँच करने पर यह रही सत्यापित तालिका, जिसमें एक उपयोगी स्तंभ जोड़ा गया है — संचरण का माध्यम, क्योंकि उसी से यह तय होता है कि रोग को कैसे रोका जाए।
| रोग | कारक | शरीर में संक्रमण का स्थान | प्रमुख लक्षण | संचरण का माध्यम (जोड़ा गया) |
|---|---|---|---|---|
| वायु के माध्यम से फैलने वाले रोग | ||||
| सर्दी-जुकाम और इन्फ्लूएंज़ा | विषाणु | श्वसन तंत्र | नाक बंद होना और नाक से पानी बहना, गले में खराश, ज्वर, खाँसी, शरीर में दर्द | खाँसने-छींकने से निकली बूँदें; व्यक्तिगत वस्तुएँ साझा करना |
| छोटी माता (चिकनपॉक्स) | विषाणु | श्वसन तंत्र, त्वचा | हल्का ज्वर, त्वचा में खुजली, चकत्ते, फफोले | वायु में बूँदें; फफोलों से संपर्क |
| खसरा (मीजल्स) | विषाणु | त्वचा, श्वसन तंत्र | ज्वर, गले में खराश तथा गर्दन, कान और त्वचा के अन्य भागों पर लाल चकत्ते | वायु में बूँदें |
| क्षय रोग (टीबी) | जीवाणु | फेफड़े | खाँसी, ज्वर, थकान, भूख न लगना, रात में पसीना आना | संक्रमित व्यक्ति की खाँसी से निकली बूँदें |
| दूषित जल और भोजन से फैलने वाले रोग | ||||
| यकृतशोथ (हेपेटाइटिस) ए | विषाणु | यकृत | थकान, ज्वर, भूख न लगना, मतली, वमन, पीलिया, पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्द | उत्सर्जी पदार्थ से दूषित जल अथवा भोजन |
| हैजा (कॉलरा) | जीवाणु | आंत्र | अतिसार और निर्जलीकरण | दूषित पेयजल और भोजन; मक्खियाँ |
| आंत्र ज्वर (टाइफॉइड) | जीवाणु | आंत्र | सिरदर्द, पेट में तकलीफ, ज्वर और अतिसार | दूषित पेयजल और भोजन |
| एस्केरिसता (गोल कृमि संक्रमण) | कृमि | आंत्र | मल में कृमि, भूख न लगना, वृद्धि में कमी, अतिसार, वजन कम होना, रक्ताल्पता | दूषित भोजन, जल अथवा मृदा |
| कीटों द्वारा संचरित रोग | ||||
| मलेरिया (विषम ज्वर) | प्रोटोजोआ | त्वचा, रक्त | तीव्र ज्वर, अत्यधिक पसीना आना, कंपकंपी आना | मच्छर (रोगवाहक) का काटना |
| डेंगू ज्वर (हड्डी तोड़ ज्वर) | विषाणु | त्वचा, रक्त | ज्वर, सिरदर्द, माँसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली | स्वच्छ, रुके हुए जल में पनपने वाले मच्छर का काटना |
जोड़ा गया स्तंभ क्यों उपयोगी है: कारक बताता है कि रोग क्या है; संचरण का माध्यम बताता है कि करना क्या है। टीबी और खसरा दोनों मुँह ढकने से रुकते हैं, हैजा और आंत्र ज्वर उबला जल पीने से, तथा मलेरिया और डेंगू रुका जल हटाने से — यद्यपि इनके रोगजनक चार भिन्न प्रकार के हैं।
ध्यान दीजिए: तालिका में प्रोटोजोआ, जीवाणु, विषाणु और कृमि — चारों आते हैं। ये सभी रोगजनक हैं और कृमि परजीवी के रूप में रहते हैं, अर्थात ऐसे जीव जो किसी दूसरे जीव के शरीर में या शरीर पर रहते हैं।