कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.4

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पुस्तकों, विश्वसनीय वेबसाइटों द्वारा अथवा अपने विज्ञान के शिक्षक से पूछकर सूची में दी गई जानकारी की जाँच कीजिए। कोई अन्य महत्त्वपूर्ण जानकारी जो छूट गई हो, उसे जोड़िए।
उत्तर

तालिका 3.1 में दी गई जानकारी सही है। अध्याय से जाँच करने पर यह रही सत्यापित तालिका, जिसमें एक उपयोगी स्तंभ जोड़ा गया है — संचरण का माध्यम, क्योंकि उसी से यह तय होता है कि रोग को कैसे रोका जाए।

रोगकारकशरीर में संक्रमण का स्थानप्रमुख लक्षणसंचरण का माध्यम (जोड़ा गया)
वायु के माध्यम से फैलने वाले रोग
सर्दी-जुकाम और इन्फ्लूएंज़ाविषाणुश्वसन तंत्रनाक बंद होना और नाक से पानी बहना, गले में खराश, ज्वर, खाँसी, शरीर में दर्दखाँसने-छींकने से निकली बूँदें; व्यक्तिगत वस्तुएँ साझा करना
छोटी माता (चिकनपॉक्स)विषाणुश्वसन तंत्र, त्वचाहल्का ज्वर, त्वचा में खुजली, चकत्ते, फफोलेवायु में बूँदें; फफोलों से संपर्क
खसरा (मीजल्स)विषाणुत्वचा, श्वसन तंत्रज्वर, गले में खराश तथा गर्दन, कान और त्वचा के अन्य भागों पर लाल चकत्तेवायु में बूँदें
क्षय रोग (टीबी)जीवाणुफेफड़ेखाँसी, ज्वर, थकान, भूख न लगना, रात में पसीना आनासंक्रमित व्यक्ति की खाँसी से निकली बूँदें
दूषित जल और भोजन से फैलने वाले रोग
यकृतशोथ (हेपेटाइटिस) एविषाणुयकृतथकान, ज्वर, भूख न लगना, मतली, वमन, पीलिया, पेट के ऊपरी दाहिने भाग में दर्दउत्सर्जी पदार्थ से दूषित जल अथवा भोजन
हैजा (कॉलरा)जीवाणुआंत्रअतिसार और निर्जलीकरणदूषित पेयजल और भोजन; मक्खियाँ
आंत्र ज्वर (टाइफॉइड)जीवाणुआंत्रसिरदर्द, पेट में तकलीफ, ज्वर और अतिसारदूषित पेयजल और भोजन
एस्केरिसता (गोल कृमि संक्रमण)कृमिआंत्रमल में कृमि, भूख न लगना, वृद्धि में कमी, अतिसार, वजन कम होना, रक्ताल्पतादूषित भोजन, जल अथवा मृदा
कीटों द्वारा संचरित रोग
मलेरिया (विषम ज्वर)प्रोटोजोआत्वचा, रक्ततीव्र ज्वर, अत्यधिक पसीना आना, कंपकंपी आनामच्छर (रोगवाहक) का काटना
डेंगू ज्वर (हड्डी तोड़ ज्वर)विषाणुत्वचा, रक्तज्वर, सिरदर्द, माँसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतलीस्वच्छ, रुके हुए जल में पनपने वाले मच्छर का काटना
जोड़ा गया स्तंभ क्यों उपयोगी है: कारक बताता है कि रोग क्या है; संचरण का माध्यम बताता है कि करना क्या है। टीबी और खसरा दोनों मुँह ढकने से रुकते हैं, हैजा और आंत्र ज्वर उबला जल पीने से, तथा मलेरिया और डेंगू रुका जल हटाने से — यद्यपि इनके रोगजनक चार भिन्न प्रकार के हैं।
ध्यान दीजिए: तालिका में प्रोटोजोआ, जीवाणु, विषाणु और कृमि — चारों आते हैं। ये सभी रोगजनक हैं और कृमि परजीवी के रूप में रहते हैं, अर्थात ऐसे जीव जो किसी दूसरे जीव के शरीर में या शरीर पर रहते हैं।
प्र2.
नीचे दी गई तालिका का अध्ययन कीजिए और विचार कीजिए कि कौन-से सरल उपाय प्रत्येक रोग की रोकथाम में सहायता कर सकते हैं।
उत्तर

रोगों को संचरण के माध्यम के अनुसार समूहित कीजिए — तब उपायों का एक समूह पूरे वर्ग को रोक देता है।

माध्यमरोगरोकथाम के सरल उपाय
वायु द्वारासर्दी-जुकाम और इन्फ्लूएंज़ा, छोटी माता, खसरा, क्षय रोगखाँसते या छींकते समय मुँह और नाक ढकना; भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना; व्यक्तिगत वस्तुएँ साझा न करना; रोगी को अलग रखना; बार-बार हाथ धोना; टीकाकरण करवाना (छोटी माता, खसरा, टीबी)
दूषित जल और भोजन द्वारायकृतशोथ ए, हैजा, आंत्र ज्वर, एस्केरिसताउबला हुआ अथवा सुरक्षित पानी पीना; भली-भाँति पका हुआ भोजन खाना; व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें अपनाना; शौचालय का उपयोग करना; भोजन से पूर्व हाथ धोना; टीकाकरण करवाना (यकृतशोथ ए, हैजा, आंत्र ज्वर)
कीटों (रोगवाहकों) द्वारामलेरिया, डेंगू ज्वरमच्छरदानी और मच्छर प्रतिकर्षियों का उपयोग; पूरी बाँह के कपड़े पहनना; घर और आस-पास मच्छरों के प्रजनन को नियंत्रित करना; रुद्ध जल वाले क्षेत्रों से बचना

दो उपाय हर समूह में आते हैं और इसीलिए सबसे मूल्यवान हैं—

  • साबुन और पानी से हाथ धोना — सूचना पट्ट के अनुसार नियमित रूप से हाथ धोने से संक्रमण 50% तक कम हो जाता है।
  • स्वयं को और अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखना।
ऐसा क्यों होता है: रोगजनक को एक यात्रा पूरी करनी होती है — एक शरीर से निकलना, बाहर जीवित रहना और दूसरे शरीर में प्रवेश करना। ऊपर का प्रत्येक उपाय इस यात्रा को किसी एक बिंदु पर तोड़ता है — मास्क निकास पर, उबालना मार्ग में, मच्छरदानी प्रवेश पर, और टीका उस शरीर को ही रोगजनक के लिए अनुपयोगी बना देता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ