कुतूहल अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

स्वास्थ्य का अर्थ है पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति, न कि मात्र रोगों की अनुपस्थिति। एकाकीपन, तनाव और प्रदूषित परिवेश भी स्वास्थ्य को उतना ही हानि पहुँचाते हैं जितना रोगाणु। लक्षण वह है जिसे हम अनुभव करते हैं — दर्द, थकान, चक्कर आना। संकेत वह है जिसे देखा या मापा जा सकता है — ज्वर, दाने, उच्च रक्तचाप, शोथ। संचरणीय रोग रोगजनकों (जीवाणु, विषाणु, कवक, कृमि, प्रोटोजोआ) से होते हैं और वायु, दूषित जल तथा भोजन, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष संपर्क, और मच्छर तथा मक्खी जैसे रोगवाहकों द्वारा फैलते हैं। असंचरणीय रोग — मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, अस्थमा तथा स्कर्वी, एनीमिया और घेंघा जैसे अभावजन्य रोग — रोगजनकों से नहीं होते। ये जीवनशैली, आहार और पर्यावरण से जुड़े हैं और आज भारत में अधिकांश मृत्यु इन्हीं से होती है। प्रतिरक्षा शरीर की रोगों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता है। टीका रोगाणु के मृत

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  9. पाठ्य प्रश्न
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  11. क्रियाकलाप 3.6
  12. पाठ्य प्रश्न
  13. पाठ्य प्रश्न
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  15. जिज्ञासा बनाए रखें
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