कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 3 स्वास्थ्य — एक अमूल्य निधि के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
स्वास्थ्य का अर्थ है पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति, न कि मात्र रोगों की अनुपस्थिति। एकाकीपन, तनाव और प्रदूषित परिवेश भी स्वास्थ्य को उतना ही हानि पहुँचाते हैं जितना रोगाणु। लक्षण वह है जिसे हम अनुभव करते हैं — दर्द, थकान, चक्कर आना। संकेत वह है जिसे देखा या मापा जा सकता है — ज्वर, दाने, उच्च रक्तचाप, शोथ। संचरणीय रोग रोगजनकों (जीवाणु, विषाणु, कवक, कृमि, प्रोटोजोआ) से होते हैं और वायु, दूषित जल तथा भोजन, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष संपर्क, और मच्छर तथा मक्खी जैसे रोगवाहकों द्वारा फैलते हैं। असंचरणीय रोग — मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, अस्थमा तथा स्कर्वी, एनीमिया और घेंघा जैसे अभावजन्य रोग — रोगजनकों से नहीं होते। ये जीवनशैली, आहार और पर्यावरण से जुड़े हैं और आज भारत में अधिकांश मृत्यु इन्हीं से होती है। प्रतिरक्षा शरीर की रोगों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता है। टीका रोगाणु के मृत
त्वरित पुनरावृत्ति
| पद | इसका अर्थ | अध्याय से उदाहरण | स्मरणीय बात |
|---|---|---|---|
| स्वास्थ्य | पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति, न कि मात्र रोगों की अनुपस्थिति (डबल्यू.एच.ओ.) | क्रियाकलाप 3.1 के विद्यार्थी को कोई संक्रमण नहीं था, फिर भी वह अस्वस्थ था | तीनों आयाम — शरीर, मन और संबंध — का ध्यान रखना आवश्यक है |
| लक्षण | जिसे रोगी स्वयं अनुभव करता है | दर्द, थकान, चक्कर आना | इसे कोई दूसरा माप नहीं सकता |
| संकेत | जिसे देखा या मापा जा सकता है | ज्वर, दाने, उच्च रक्तचाप, शोथ | चिकित्सक इसी को अंकित करता है |
| रोगजनक (रोगाणु) | रोग उत्पन्न करने वाला जीव | जीवाणु, विषाणु, कवक, कृमि, प्रोटोजोआ | सभी संचरणीय रोग रोगजनकों से ही होते हैं |
| रोगवाहक (वेक्टर) | वह कीट जो रोगजनक को एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचाता है | मच्छर मलेरिया और डेंगू फैलाते हैं; मक्खियाँ भोजन तक रोगाणु ले जाती हैं | रोगवाहक को नियंत्रित कीजिए, रोग रुक जाएगा |
| संचरणीय रोग | रोगजनक से होने वाला रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है | आंत्र ज्वर, डेंगू, फ्लू, चेचक, कोविड—19 | संचरण के माध्यम को तोड़िए — वायु, जल, भोजन, संपर्क, रोगवाहक |
| असंचरणीय रोग | वह रोग जो रोगजनक से नहीं होता और दूसरों में नहीं फैलता | मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, अस्थमा | जीवनशैली, आहार और पर्यावरण से जुड़ा; भारत में अधिकांश मृत्यु का कारण |
| अभावजन्य रोग | पोषक तत्व की कमी से होने वाला असंचरणीय रोग | स्कर्वी, एनीमिया, घेंघा (कक्षा 6 में पढ़ा) | आहार सुधारने से ठीक होता है, केवल औषधि से नहीं |
| दीर्घकालिक रोग | लंबे समय तक — 3 महीने से अधिक — बना रहने वाला रोग | कैंसर, मधुमेह, अस्थमा | इसमें निरंतर देखभाल चाहिए, एक सप्ताह की दवा नहीं |
| प्रतिरक्षा | शरीर की रोगों से लड़ने की प्राकृतिक क्षमता | प्रतिरक्षा प्रणाली रोगाणुओं को पहचानकर उन पर आक्रमण करती है | इसी से समझ आता है कि एक ही घर के दो लोग भिन्न रूप से रोगग्रस्त क्यों होते हैं |
| टीका (वैक्सीन) | रोगाणु के मृत, क्षीणीकृत या हानिरहित भाग से बना पदार्थ जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है | पोलियो ड्रॉप्स, खसरा, टेटेनस, हेपेटाइटिस के टीके | उपार्जित प्रतिरक्षा देता है; रोकथाम के लिए, उपचार के लिए नहीं |
| प्रतिजैविक औषधि | जीवाणुओं को नष्ट करने वाली औषधि | पेनिसिलिन, जिसकी खोज 1928 में अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की | विषाणु और प्रोटोजोआ पर निष्प्रभावी |
| प्रतिजैविक प्रतिरोध | पहले जिस प्रतिजैविक से नष्ट होते थे, वही जीवाणु उपचार के बाद भी जीवित रहकर गुणन करते हैं | आवश्यकता न होने पर प्रतिजैविक लेना अथवा पूरी खुराक न लेना | प्रतिजैविक केवल चिकित्सक के परामर्श पर, पूरी खुराक में लीजिए |
अभ्यास
- खोजबीन और विचार करें
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 3.1
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 3.2
- क्रियाकलाप 3.3
- क्रियाकलाप 3.4
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 3.5
- क्रियाकलाप 3.6
- पाठ्य प्रश्न
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 3.7
- जिज्ञासा बनाए रखें
- खोजें, अभिकल्पित करें और चर्चा करें