कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.7

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 3.5 (ख) में दिए गए सूचना आरेख का अध्ययन करें। आपके विचार से जीवाण्विक रोगजनकों में प्रतिजैविक प्रतिरोध कैसे विकसित हुआ?
उत्तर

यह चित्र 3.5 (ख) में दिखाए गए चार चरणों में विकसित होता है, और इसका आरंभ हमारे ही किसी कार्य से होता है— आवश्यकता न होने पर भी प्रतिजैविक लेना अथवा औषधि की पूरी खुराक न लेना

  1. कुछ जीवाणु प्रतिजैविक औषधियों के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं। जीवाणुओं की किसी भी बड़ी संख्या में कुछ ऐसे निकल आते हैं जो औषधि को सह लेते हैं।
  2. जब प्रतिजैविक औषधियाँ रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं को नष्ट करती हैं तो वे शरीर को संक्रमण से बचाने वाले अच्छे जीवाणुओं को भी नष्ट कर देती हैं। इससे वह स्थान और भोजन खाली हो जाता है जिसका उपयोग वे अच्छे जीवाणु कर रहे थे।
  3. प्रतिरोधी जीवाणु वृद्धि करते हैं और छा जाते हैं। प्रतिस्पर्धी हट जाने पर वे थोड़े से बचे हुए जीवाणु गुणन करके बहुसंख्यक हो जाते हैं।
  4. कुछ जीवाणु अन्य जीवाणुओं को प्रतिरोध स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे अधिक समस्याएँ होती हैं। अब प्रतिरोध उन जीवाणुओं तक भी फैल जाता है जिनका कभी उपचार ही नहीं किया गया था।
ऐसा क्यों होता है: प्रतिजैविक औषधि जीवाणुओं को प्रतिरोधी बनाती नहीं। वह उन सभी जीवाणुओं को हटा देती है जो प्रतिरोधी नहीं हैं और इस प्रकार मैदान उन्हीं के लिए खाली छोड़ देती है जो प्रतिरोधी हैं। अधूरी खुराक सबसे बुरी स्थिति है — इतनी औषधि कि संवेदनशील जीवाणु समाप्त हो जाएँ, परंतु इतनी नहीं कि कठिन जीवाणु भी नष्ट हों, जो फिर निर्बाध गुणन करते हैं।

चित्र 3.5 (क) यह भी बताता है कि ये प्रतिरोधी जीवाणु शेष लोगों तक किन मार्गों से पहुँचते हैं— जंतुओं को दी गई प्रतिजैविक औषधियों से जंतु खाद्य उत्पादों के माध्यम से; खाद अथवा पशुमल के माध्यम से मृदा और फसल उत्पादों से होते हुए हमारे पाचन तंत्र तक; तथा चिकित्सालय में गंदी सतहों और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से एक रोगी से दूसरे तक, और फिर रोगी के घर लौटने पर पूरे समुदाय में।

परिणाम वही होता है जो अध्याय कहता है — पहले जिस प्रतिजैविक से नष्ट किए गए जीवाणु उसी औषधि से उपचार के पश्चात भी जीवित रहते हैं और गुणन करते हैं, जिससे सामान्य संक्रमणों की चिकित्सा कठिन हो जाती है और जटिलताओं, दीर्घकालिक रोगों तथा मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है।

प्र2.
प्रतिजैविक प्रतिरोध को कम करने के लिए कौन-कौन सी सावधानियाँ रखी जा सकती हैं?
उत्तर

अध्याय नियम सीधे बताता है— प्रतिजैविक औषधियों का उपयोग समझदारी से कीजिए और केवल चिकित्सक द्वारा प्रदिष्ट किए जाने पर सही मात्रा में और निर्धारित अवधि तक ही इनका सेवन कीजिए।

सावधानीयह क्यों प्रभावी है
प्रतिजैविक औषधि केवल तभी लीजिए जब चिकित्सक लिखेसबसे सामान्य कारण — आवश्यकता न होने पर प्रतिजैविक लेना — समाप्त हो जाता है
अच्छा अनुभव होने पर भी पूरी खुराक समाप्त कीजिएकठिन जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं, उन्हें गुणन का अवसर नहीं मिलता
सही मात्रा में और निर्धारित अवधि तक ही लीजिएअधूरी खुराक संक्रमण ठीक करने के स्थान पर प्रतिरोध को बढ़ावा देती है
सर्दी, खाँसी या फ्लू में प्रतिजैविक कभी न लीजिएये विषाणु जनित हैं — औषधि लाभ नहीं करती, केवल प्रतिरोध बढ़ाती है
किसी दूसरे की बची हुई औषधि न लीजिए और न अपनी दूसरों को दीजिएवह औषधि और मात्रा किसी दूसरे संक्रमण के लिए चुनी गई थी
पशु चिकित्सक की सलाह के बिना मवेशियों को प्रतिजैविक इंजेक्शन न दीजिए (चित्र 3.5 ख)जंतुओं के प्रतिरोधी जीवाणु खाद्य उत्पादों और खाद के माध्यम से हम तक पहुँचते हैं
संक्रमण को आरंभ में ही रोकिए — हाथ धोना, स्वच्छ जल, मास्क, टीकाकरणजो संक्रमण होगा ही नहीं, उसके लिए प्रतिजैविक की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी
चिकित्सालय की सतहें और हाथ स्वच्छ रखिएप्रतिरोधी जीवाणुओं का एक रोगी से दूसरे तक प्रसार रुकता है

अध्याय के शब्दों में, अनावश्यक उपयोग से बचने से प्रतिरोधी जीवाणुओं की वृद्धि रुकती है और प्रतिजैविक औषधियाँ भावी पीढ़ियों के लिए प्रभावी बनी रहती हैं

क्या आप जानते हैं? प्रथम प्रतिजैविक पेनिसिलिन की खोज 1928 में लंदन के जीवाणु विज्ञानी अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की, जब उन्होंने देखा कि एक अप्रयुक्त पेट्री डिश पर लगी फफूँद ने जीवाणु की वृद्धि रोक दी थी। तब से प्रतिजैविक औषधियों ने करोड़ों जीवन बचाए हैं — इसीलिए इनकी रक्षा करना आवश्यक है।
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