कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
जब किसी चालक (जैसे — तार) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो यह उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। इसी कारण धारावाही तार के नीचे रखी दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है और धारा रुकते ही चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है। चुंबक की भाँति व्यवहार करने वाली धारावाही कुंडली विद्युत-चुंबक कहलाती है। कुंडली का प्रत्येक फेरा अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और सभी फेरे एक ही दिशा में लपेटे होने के कारण ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दिशा में जुड़ जाते हैं — इसीलिए 50 फेरों की कुंडली एक सीधे तार से कहीं अधिक प्रबल होती है। छड़ चुंबक की भाँति विद्युत-चुंबक के भी दो ध्रुव — उत्तर एवं दक्षिण होते हैं। धारा का परिमाण बढ़ाकर (अधिक सेल) अथवा फेरों की संख्या बढ़ाकर इसकी प्रबलता बढ़ाई जा सकती है तथा धारा की दिशा उलटकर इसके ध्रुव उत्क्रमित किए जा
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| शब्द | इसका अर्थ | अध्याय में कहाँ | दैनिक जीवन का उदाहरण |
|---|---|---|---|
| चुंबकीय क्षेत्र | चुंबक अथवा धारावाही तार के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसका चुंबकीय प्रभाव अनुभव किया जा सकता है | खंड 4.1, पृष्ठ 48 | चुंबक के समीप लाने पर दिक्सूचक सुई का घूमना |
| विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव | धारा प्रवाहित होने पर चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का उत्पन्न होना | खंड 4.1, पृष्ठ 48 | स्विच ऑन करते ही तार के नीचे रखी दिक्सूचक सुई का विक्षेपित होना |
| विद्युत-चुंबक | चुंबक की भाँति व्यवहार करने वाली धारावाही कुंडली | खंड 4.1.1, पृष्ठ 50 | विद्युत घंटी, पंखे एवं लाउडस्पीकर की कुंडली |
| क्रोड | कुंडली के भीतर रखी लोहे की छड़ अथवा कील जो विद्युत-चुंबक को अधिक प्रबल बनाती है | खंड 4.1.1, पृष्ठ 50 | क्रियाकलाप 4.3 में कुंडली के भीतर प्रविष्ट लोहे की कील |
| विद्युत-चुंबक के ध्रुव | कुंडली के दो सिरे — उत्तर एवं दक्षिण; धारा की दिशा उलटने पर इनकी ध्रुवता उत्क्रमित हो जाती है | क्रियाकलाप 4.4, पृष्ठ 50–51 | चित्र 4.4 में कुंडली के सिरे ‘अ’ एवं ‘आ’ |
| उत्थापक विद्युत-चुंबक | क्रेन से लटका प्रबल विद्युत-चुंबक जो धारा ऑन करने पर उठाता और ऑफ करने पर छोड़ देता है | खंड 4.1.2, पृष्ठ 52 | कचरा स्थलों एवं इस्पात कारखानों में लोहे का कबाड़ छाँटना |
| प्रतिरोध | धारा प्रवाह में चालक द्वारा उत्पन्न किया गया विरोध | खंड 4.2, पृष्ठ 53 | समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे की तुलना में निक्रोम अधिक प्रतिरोध देता है |
| विद्युत धारा का तापीय प्रभाव | धारा प्रवाहित होने के कारण चालक में ऊष्मा का उत्पन्न होना | खंड 4.2, पृष्ठ 53 | तापदीप्त लैंप का तंतु; क्रियाकलाप में तार के सिरों का गरम होना |
| तापन अवयव | उपकरण की वह छड़ अथवा तार की कुंडली जिसका गरम होना अभीष्ट होता है | पृष्ठ 53 | विद्युत कक्ष-तापक अथवा हीटर की लाल-तप्त कुंडली |
| इलेक्ट्रोड (विद्युताग्र) | सेल में विद्युत-अपघट्य में डूबी भिन्न-भिन्न पदार्थों की दो धातु छड़ों में से एक | खंड 4.3.1, पृष्ठ 55 | नींबू सेल में ताँबे का तार और लोहे की कील |
| विद्युत-अपघट्य | वह द्रव अथवा लेई — प्रायः दुर्बल अम्ल या लवण का विलयन — जिसमें इलेक्ट्रोड डूबे रहते हैं | खंड 4.3.1, पृष्ठ 55 | नींबू का रस; लवण का विलयन; शुष्क सेल की नम लेई |
| निष्क्रिय सेल | वह सेल जिसके रसायन उपयोग में आ चुके हों और जो अब विद्युत आपूर्ति न कर सके | पृष्ठ 55 | टॉर्च का वह सेल जो अब लैंप को दीप्त नहीं करता |
| शुष्क सेल | केवल एक बार उपयोग में आने वाला सेल जिसका विद्युत-अपघट्य द्रव नहीं, गाढ़ी नम लेई होती है | खंड 4.3.2, पृष्ठ 57 | दीवार घड़ी अथवा टी.वी. रिमोट का सेल |
| पुनः आवेशनीय बैटरी | वह बैटरी जिसे अनेक बार आवेशित करके पुनः उपयोग में लाया जा सकता है | खंड 4.3.3, पृष्ठ 57 | मोबाइल, लैपटॉप, कैमरा, इनवर्टर एवं विद्युत वाहनों की बैटरी |
अभ्यास
- खोजबीन और विचार करें
- क्रियाकलाप 4.1
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 4.2
- क्रियाकलाप 4.3
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 4.4
- वैज्ञानिक की भाँति सोचें
- एक सोपान ऊपर
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 4.5
- वैज्ञानिक की भाँति सोचें
- पाठ्य प्रश्न
- क्रियाकलाप 4.6
- जिज्ञासा बनाए रखें
- खोजें, अभिकल्पित करें एवं चर्चा करें