कुतूहल अध्याय 4 विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

जब किसी चालक (जैसे — तार) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो यह उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। इसी कारण धारावाही तार के नीचे रखी दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है और धारा रुकते ही चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है। चुंबक की भाँति व्यवहार करने वाली धारावाही कुंडली विद्युत-चुंबक कहलाती है। कुंडली का प्रत्येक फेरा अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और सभी फेरे एक ही दिशा में लपेटे होने के कारण ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दिशा में जुड़ जाते हैं — इसीलिए 50 फेरों की कुंडली एक सीधे तार से कहीं अधिक प्रबल होती है। छड़ चुंबक की भाँति विद्युत-चुंबक के भी दो ध्रुव — उत्तर एवं दक्षिण होते हैं। धारा का परिमाण बढ़ाकर (अधिक सेल) अथवा फेरों की संख्या बढ़ाकर इसकी प्रबलता बढ़ाई जा सकती है तथा धारा की दिशा उलटकर इसके ध्रुव उत्क्रमित किए जा

  1. खोजबीन और विचार करें
  2. क्रियाकलाप 4.1
  3. पाठ्य प्रश्न
  4. क्रियाकलाप 4.2
  5. क्रियाकलाप 4.3
  6. पाठ्य प्रश्न
  7. क्रियाकलाप 4.4
  8. वैज्ञानिक की भाँति सोचें
  9. एक सोपान ऊपर
  10. पाठ्य प्रश्न
  11. क्रियाकलाप 4.5
  12. वैज्ञानिक की भाँति सोचें
  13. पाठ्य प्रश्न
  14. क्रियाकलाप 4.6
  15. जिज्ञासा बनाए रखें
  16. खोजें, अभिकल्पित करें एवं चर्चा करें
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