जब सेल के भीतर के रसायन उपयोग में आ चुके होते हैं तो वह विद्युत आपूर्ति नहीं कर पाता और निष्क्रिय कहलाता है। इसे इन प्रकार से पहचाना जा सकता है—
- उससे जुड़ा लैंप अथवा एल.ई.डी. दीप्त नहीं होता, या बहुत मंद दीप्त होता है।
- उससे बना विद्युत-चुंबक कागज-क्लिपें नहीं उठा पाता।
- परिपथ के तार के समीप रखी दिक्सूचक सुई में विक्षेप बहुत कम अथवा शून्य होता है।
- जो युक्ति पहले घंटों चलती थी वह अब कुछ ही मिनटों में बंद हो जाती है।
नहीं — सभी सेलों एवं बैटरियों को पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता।
पुनः आवेशनीय बैटरी भी सदैव क्यों नहीं चलती: प्रत्येक बार आवेशित एवं उपयोग होने पर उसके भीतर के पदार्थों में थोड़ा-थोड़ा परिवर्तन होता जाता है। एक-दो वर्ष के दैनिक आवेशन के पश्चात ये परिवर्तन जुड़कर बैटरी की क्षमता घटा देते हैं और फोन को अधिक बार आवेशित करना पड़ता है।
स्वयं जाँचिए: कार्य करना बंद कर चुकी बैटरी पूर्णतः ‘निष्प्रयोज्य’ नहीं होती — उसमें अम्ल जैसे पदार्थ तथा सीसा, कैडमियम, निकल अथवा लीथियम जैसी धातुएँ रह जाती हैं। सामान्य कचरे में फेंकने पर ये आग लगने का कारण बन सकती हैं अथवा पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकती हैं, और मूल्यवान पदार्थ व्यर्थ चला जाता है। उपयोग की गई बैटरियाँ सदैव ‘ई-कचरा’ पुनर्चक्रण केंद्र को दीजिए; स्थान ज्ञात न हो तो अपने शिक्षक से पूछिए।