कुतूहल अध्याय 4 खोजबीन और विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
विद्युत सेल से विद्युत-परिपथ बनाते समय यदि हमारे पास विद्युत लैंप नहीं है तो क्या हमारे पास कोई अन्य विधि है जिसके द्वारा हम पता लगा सकते हैं कि उस परिपथ में धारा प्रवाहित हो रही है या नहीं?
उत्तर

हाँ। परिपथ के तार के समीप — सर्वोत्तम है ठीक उसके नीचे — एक चुंबकीय दिक्सूचक रखिए और स्विच ऑन करते समय सुई का अवलोकन कीजिए।

  • यदि सुई अपनी सामान्य उत्तर-दक्षिण दिशा से विक्षेपित होती है तो धारा प्रवाहित हो रही है
  • यदि सुई स्थिर रहती है तो धारा प्रवाहित नहीं हो रही है।
  • स्विच ऑफ करने पर सुई पुनः अपनी प्रारंभिक दिशा में लौट आती है।
ऐसा क्यों होता है: धारावाही तार अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक है, अतः वह इस क्षेत्र के कारण घूम जाती है। धारा न होने पर क्षेत्र भी नहीं होता और सुई सामान्य रूप से उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरी रहती है। यही परीक्षण आप क्रियाकलाप 4.1 में करते हैं।
संकेत: दूसरी, अपेक्षाकृत मोटी विधि तापीय प्रभाव है — परिपथ में लगा निक्रोम का पतला तार धारा प्रवाहित होने पर गरम हो जाता है। दिक्सूचक वाली विधि श्रेष्ठ है क्योंकि यह तत्काल परिणाम देती है, इसमें तार छूना नहीं पड़ता और यह अत्यंत अल्प धारा के लिए भी कार्य करती है।
प्र2.
क्या अस्थायी चुंबक बनाना संभव है? इन्हें कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर

हाँ। लोहे की कील पर विद्युतरोधी तार की कुंडली लपेटकर उसमें धारा प्रवाहित करने पर अस्थायी चुंबक बन जाता है — इसे विद्युत-चुंबक कहते हैं।

  1. लगभग 50 cm लंबा लचीला विद्युतरोधी तार और एक लोहे की कील लीजिए।
  2. तार को कील पर एक ही दिशा में, फेरे पर फेरा, कसकर लपेटिए।
  3. तार के दोनों स्वतंत्र सिरों को कुछ सेकंड के लिए ही विद्युत सेल से जोड़िए।
  4. अब कील लोहे की कागज-क्लिपों को उठा लेती है। सेल से वियुक्त करते ही क्लिपें गिर जाती हैं।
यह अस्थायी क्यों है: चुंबकत्व कील का नहीं, धारा का है। कुंडली का प्रत्येक फेरा अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है और सभी फेरे एक ही दिशा में लपेटे होने से ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दिशा में जुड़ जाते हैं। इस क्षेत्र में रखी लोहे की कील स्वयं चुंबक बन जाती है और पूरे विद्युत-चुंबक को और प्रबल बना देती है। धारा रुकते ही कुंडली का क्षेत्र समाप्त हो जाता है और लोहा भी अपना लगभग सारा चुंबकत्व खो देता है — इसलिए क्लिपें गिर जाती हैं।
क्या आप जानते हैं? क्रेन पर लगा उत्थापक विद्युत-चुंबक ठीक इसी प्रकार कार्य करता है। प्रचालक को भार को खींचकर अलग नहीं करना पड़ता — वह केवल धारा ऑफ कर देता है।
प्र3.
हम जीवाश्म ईंधन एवं लकड़ी को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं परंतु विभिन्न प्रकार के विद्युत उपकरणों में ऊष्मा कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर

विद्युत उपकरण में कुछ भी जलता नहीं है। वहाँ ऊष्मा विद्युत धारा के तापीय प्रभाव से प्राप्त होती है।

ऐसा क्यों होता है: जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसे कुछ विरोध अथवा प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है। इस प्रतिरोध के कारण विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग तापीय ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है और चालक गरम हो जाता है। प्रतिरोध जितना अधिक होगा, समान धारा के लिए उतनी ही अधिक ऊष्मा उत्पन्न होगी।

इसीलिए प्रत्येक तापन उपकरण में एक छड़ अथवा तार की कुंडली होती है जिसे तापन अवयव कहते हैं और जो प्रायः निक्रोम की बनी होती है, क्योंकि समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार की तुलना में निक्रोम कहीं अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करता है। विद्युत कक्ष-तापक अथवा हीटर में यह अवयव लाल-तप्त चमकता हुआ दिखाई देता है।

लकड़ी अथवा जीवाश्म ईंधन जलानाविद्युत उपकरण
ईंधन की रासायनिक ऊर्जा जलने पर ऊष्मा के रूप में मुक्त होती हैविद्युत ऊर्जा प्रतिरोध के कारण ऊष्मा में बदलती है
धुआँ, कालिख एवं राख उत्पन्न होती हैधुआँ, कालिख अथवा राख नहीं बनती
शीघ्र बंद अथवा नियंत्रित करना कठिनस्विच से ऊष्मा आरंभ एवं बंद हो जाती है
प्र4.
हम कैसे ज्ञात कर सकते हैं कि कोई सेल अथवा बैटरी अब कार्य के योग्य नहीं रह गई है? क्या सभी प्रकार के सेलों अथवा बैटरियों को पुनः आवेशित करके कार्य के योग्य बनाया जा सकता है?
उत्तर

जब सेल के भीतर के रसायन उपयोग में आ चुके होते हैं तो वह विद्युत आपूर्ति नहीं कर पाता और निष्क्रिय कहलाता है। इसे इन प्रकार से पहचाना जा सकता है—

  • उससे जुड़ा लैंप अथवा एल.ई.डी. दीप्त नहीं होता, या बहुत मंद दीप्त होता है।
  • उससे बना विद्युत-चुंबक कागज-क्लिपें नहीं उठा पाता।
  • परिपथ के तार के समीप रखी दिक्सूचक सुई में विक्षेप बहुत कम अथवा शून्य होता है।
  • जो युक्ति पहले घंटों चलती थी वह अब कुछ ही मिनटों में बंद हो जाती है।

नहीं — सभी सेलों एवं बैटरियों को पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता।

प्रकारक्या पुनः आवेशित हो सकता है?समाप्त होने पर क्या करें
शुष्क सेल (टॉर्च, घड़ी, रिमोट)नहीं — यह एक बार उपयोग वाला सेल हैई-कचरा पुनर्चक्रण सुविधा में निस्तारण कीजिए
पुनः आवेशनीय बैटरी (फोन, लैपटॉप, इनवर्टर, वाहन)हाँ — अनेक बारअनेक बार आवेशित होने के पश्चात यह क्षरित हो जाती है; तब पुनर्चक्रण हेतु भेजिए
पुनः आवेशनीय बैटरी भी सदैव क्यों नहीं चलती: प्रत्येक बार आवेशित एवं उपयोग होने पर उसके भीतर के पदार्थों में थोड़ा-थोड़ा परिवर्तन होता जाता है। एक-दो वर्ष के दैनिक आवेशन के पश्चात ये परिवर्तन जुड़कर बैटरी की क्षमता घटा देते हैं और फोन को अधिक बार आवेशित करना पड़ता है।
स्वयं जाँचिए: कार्य करना बंद कर चुकी बैटरी पूर्णतः ‘निष्प्रयोज्य’ नहीं होती — उसमें अम्ल जैसे पदार्थ तथा सीसा, कैडमियम, निकल अथवा लीथियम जैसी धातुएँ रह जाती हैं। सामान्य कचरे में फेंकने पर ये आग लगने का कारण बन सकती हैं अथवा पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकती हैं, और मूल्यवान पदार्थ व्यर्थ चला जाता है। उपयोग की गई बैटरियाँ सदैव ‘ई-कचरा’ पुनर्चक्रण केंद्र को दीजिए; स्थान ज्ञात न हो तो अपने शिक्षक से पूछिए।
प्र5.
अपने प्रश्नों को साझा कीजिए
उत्तर

ऐसे प्रश्न बनाइए जो क्यों, कैसे अथवा यदि ऐसा हो तो से आरंभ हों और जिन्हें आप एक सेल, एक कुंडली और एक दिक्सूचक से वास्तव में जाँच सकें। कुछ प्रश्न आरंभ करने के लिए नीचे दिए हैं — इनके उत्तर इसी अध्याय में हैं, अतः पढ़ते समय इन्हें अपने पास रखिए।

आपका प्रश्नअध्याय में उत्तर कहाँ है
क्या तार से दूरी बदलने पर भी दिक्सूचक सुई का विक्षेप उतना ही रहता है?खंड 4.1, क्रियाकलाप 4.1
यदि मैं 50 के स्थान पर 100 फेरे लपेटूँ तो क्या कुंडली अधिक क्लिपें उठाएगी?वैज्ञानिक की भाँति सोचें, पृष्ठ 51; खोजें, अभिकल्पित करें एवं चर्चा करें, पृष्ठ 61
कुंडली लोहे की क्लिपें उठा लेती है परंतु प्लास्टिक का बटन अथवा ऐलुमिनियम की पन्नी क्यों नहीं?खंड 4.1.1 — केवल चुंबकीय पदार्थ ही आकर्षित होते हैं
हीटर की तापन कुंडली ताँबे की नहीं, निक्रोम की क्यों बनती है?खंड 4.2, पृष्ठ 53
क्या नींबू की भाँति आलू अथवा टमाटर भी एल.ई.डी. दीप्त कर सकता है?क्रियाकलाप 4.6; खोजें, अभिकल्पित करें एवं चर्चा करें, पृष्ठ 61
यह कीजिए: अध्याय पढ़ने से पहले अपने प्रश्न अभ्यास पुस्तिका में लिखिए और उत्तर मिलने पर उन पर निशान लगाते जाइए। अंत में जो प्रश्न बिना निशान के बचें, वही अपने शिक्षक से पूछने योग्य सर्वोत्तम प्रश्न हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ