दिक्सूचक सुई का निरीक्षण करते समय विद्युत-परिपथ में विद्युत धारा को प्रवाहित करने के लिए स्विच को ‘ऑन’ कीजिए (चित्र 4.1, ख)। आप क्या अवलोकन करते हैं?
उत्तर
स्विच बंद करते ही दिक्सूचक सुई विक्षेपित हो जाती है — वह अपनी उत्तर-दक्षिण दिशा छोड़कर तार से कुछ कोण बनाती हुई ठहर जाती है।
क्रियाकलाप 4.1 — स्विच ऑन करने पर तने हुए तार के नीचे रखे दिक्सूचक की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा से हट जाती है।
ऐसा क्यों होता है: धारावाही तार अपने चारों ओर के क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक है, अतः वह इस क्षेत्र से प्रभावित होकर अपनी स्थिर दिशा से घूम जाती है। यह विक्षेपण इस बात का संकेत है कि धारा प्रवाहित हो रही है — सुई को कोई स्पर्श नहीं करता, और यह प्रभाव तार एवं दिक्सूचक के मध्य रखे गत्ते के आर-पार भी अनुभव होता है क्योंकि गत्ता अचुंबकीय पदार्थ है।
प्र2.
अब पुनः दिक्सूचक सुई का अवलोकन करते समय स्विच को ‘ऑफ’ स्थिति में कर दीजिए। अब आप क्या अवलोकन करते हैं?
उत्तर
सुई अपनी प्रारंभिक दिशा में वापस लौट आती है — घूमकर पुनः उत्तर-दक्षिण रेखा में ठहर जाती है।
ऐसा क्यों होता है: स्विच ऑफ करने पर परिपथ टूट जाता है और धारा रुक जाती है। धारा न होने पर तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र भी नहीं रहता, और सुई पर केवल पृथ्वी का चुंबकत्व ही कार्य करता है। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूमने वाला चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है, अतः सुई वहीं लौट जाती है।
संकेत: ध्यान दीजिए कि सुई कितनी शीघ्र प्रतिक्रिया करती है। चुंबकीय प्रभाव धारा के साथ ही आता और जाता है — यह तार में संचित नहीं होता।
प्र3.
स्विच को ‘ऑन’ और ‘ऑफ’ करने की प्रकिया को कई बार दोहराइए। प्रत्येक बार सावधानीपूर्वक अवलोकन कीजिए कि दिक्सूचक सुई किस प्रकार से व्यवहार करती है?
उत्तर
सुई प्रत्येक बार एक ही प्रकार का व्यवहार करती है — प्रत्येक ‘ऑन’ पर उत्तर-दक्षिण दिशा से विक्षेपित होती है और प्रत्येक ‘ऑफ’ पर वापस लौट आती है।
स्विच
तार में धारा
तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र
दिक्सूचक सुई
ऑन
प्रवाहित
उपस्थित
विक्षेपित
ऑफ
प्रवाहित नहीं
अनुपस्थित
उत्तर-दक्षिण दिशा में वापस
दोहराना क्यों आवश्यक है: एक बार का प्रेक्षण संयोग भी हो सकता है — हवा का झोंका अथवा समीप रखा कोई चुंबक। ऑन-ऑफ की प्रक्रिया कई बार दोहराने पर हर बार वही परिणाम मिलना यह सिद्ध करता है कि विक्षेपण वास्तव में धारा से ही जुड़ा है, किसी और कारण से नहीं। हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने भी 1820 में अपनी खोज प्रकाशित करने से पूर्व यही जाँच की थी।
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