कुतूहल अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या हम विद्युत धारा का उपयोग चुंबक बनाने में कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ। धारावाही कुंडली ठीक चुंबक की भाँति व्यवहार करती है और ऐसी कुंडली को विद्युत-चुंबक कहते हैं।

यह कैसे संभव होता है: हम अभी देख चुके हैं कि धारावाही तार अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। एक अकेले सीधे तार का क्षेत्र इतना दुर्बल होता है कि वह कुछ भी नहीं उठा सकता। परंतु उसी तार को अनेक फेरों की कुंडली के रूप में लपेट दिया जाए तो प्रत्येक फेरा अपना क्षेत्र जोड़ता है, और सभी फेरे एक ही दिशा में लपेटे होने के कारण ये क्षेत्र कुंडली के भीतर एक ही दिशा में होते हैं। इस प्रकार 50 फेरे उसी छोटे क्षेत्र में लगभग 50 गुना प्रभाव देते हैं — इतना प्रबल कि कुंडली चुंबक की भाँति व्यवहार करे, दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करे और लोहे की क्लिपें उठा ले।

क्रियाकलाप 4.2 एवं 4.3 इसी की जाँच हैं — कुंडली लपेटिए, धारा ऑन कीजिए और देखिए कि कुंडली कागज-क्लिपें उठाती है तथा दिक्सूचक सुई को घुमाती है।

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