प्र1.
कील को लोहे से बनी कागज-क्लिपों के समीप लाइए और थोड़ा ऊपर उठाइए। क्या क्लिपें कील के सिरों पर चिपक जाती हैं?
उत्तर
हाँ। कुंडली को सेल से जोड़ते ही क्लिपें कील से चिपक जाती हैं और उसके दोनों सिरों पर लटक जाती हैं — आप उनकी छोटी शृंखला मेज से ऊपर उठा सकते हैं।
ऐसा क्यों होता है: कुंडली में प्रवाहित धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है; इस क्षेत्र में रखी लोहे की कील स्वयं चुंबक बन जाती है और अपना चुंबकत्व भी जोड़ देती है, अतः अब कील छड़ चुंबक की भाँति व्यवहार करती है। क्लिपें लोहे की, अर्थात चुंबकीय पदार्थ की बनी हैं, इसलिए वे आकर्षित होती हैं। वे सिरों पर एकत्र होती हैं क्योंकि किसी भी चुंबक की भाँति यहाँ भी चुंबकीय प्रभाव ध्रुवों पर सर्वाधिक प्रबल होता है।
सावधानी: पुस्तक चेतावनी देती है कि तार को सेल से कुछ सेकंड से अधिक संयोजित न रखें, अन्यथा सेल शीघ्र ही दुर्बल हो जाता है — और तार भी गरम होने लगता है।