पहले नींबू के ताँबे का तार और अंतिम नींबू के लोहे की कील के मध्य संयोजन तारों का उपयोग करके एल.ई.डी. जोड़िए। आप क्या अवलोकन करते हैं? क्या एल.ई.डी. दीप्त हो जाती है?
उत्तर
यदि एल.ई.डी. सही दिशा में जुड़ी है तो वह दीप्त हो जाती है — मंद प्रकाश के साथ, पर कक्ष के छायादार कोने में स्पष्ट दिखाई देती है। एक दीप्त हुई एल.ई.डी. इंगित करती है कि आपका सेल कार्य कर रहा है।
नींबू के सेल ताँबे से कील की ओर शृंखला में जोड़े जाते हैं; एल.ई.डी. पहले नींबू के ताँबे और अंतिम नींबू की कील के मध्य लगती है।
यह दीप्त क्यों होती है: प्रत्येक नींबू में ताँबे का तार और लोहे की कील दो भिन्न इलेक्ट्रोड हैं तथा नींबू का रस विद्युत-अपघट्य है, अतः प्रत्येक नींबू एक छोटा वोल्टीय सेल है। दोनों धातुओं पर होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ बाह्य परिपथ में धारा प्रवाहित करती हैं और यही धारा एल.ई.डी. को दीप्त करती है। कई नींबुओं को शृंखला में जोड़ने पर उनके प्रेरण जुड़ जाते हैं और एल.ई.डी. दीप्त करने के लिए पर्याप्त हो जाते हैं।
प्र2.
यदि एल.ई.डी. दीप्त नहीं होती है तो इसके सिरों को उलट दीजिए। क्या अब एल.ई.डी. दीप्त होती है?
उत्तर
हाँ। परिपथ में एल.ई.डी. को उलटकर जोड़ते ही वह दीप्त हो जाती है।
दिशा क्यों महत्त्वपूर्ण है: एल.ई.डी. से विद्युत धारा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित हो सकती है। जैसा आप पहले सीख चुके हैं, धारा एल.ई.डी. से तभी प्रवाहित होती है जब उसका धनात्मक सिरा (लंबा तार) बैटरी के धनात्मक सिरे से और ऋणात्मक सिरा (छोटा तार) बैटरी के ऋणात्मक सिरे से जुड़ा हो। यदि वह उल्टी जुड़ी थी तो कोई धारा प्रवाहित ही नहीं हुई — सेल तो आरंभ से ही कार्य कर रहा था।
संकेत: अतः एल.ई.डी. का दीप्त न होना यह प्रमाण नहीं है कि नींबू का सेल असफल रहा। यह निष्कर्ष निकालने से पहले सदैव एक बार एल.ई.डी. उलटकर देख लीजिए।
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