(ii) एक धारावाही कुंडली चुंबक की भाँति व्यवहार करती है।
- विद्युत-अपघट्य — वोल्टीय सेल में दोनों इलेक्ट्रोड एक द्रव में आंशिक रूप से डूबे रहते हैं जो प्रायः दुर्बल अम्ल अथवा लवण का विलयन होता है। इलेक्ट्रोडों और इसी द्रव के मध्य होने वाली रासायनिक अभिक्रिया विद्युत उत्पन्न करती है, और इस द्रव को विद्युत-अपघट्य कहते हैं।
- चुंबक — कुंडली में प्रवाहित धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। तब कुंडली दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करती है, लोहे की क्लिपें आकर्षित करती है और छड़ चुंबक की भाँति उसके उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव भी होते हैं। ऐसी कुंडली विद्युत-चुंबक कहलाती है।