कुतूहल अध्याय 4 जिज्ञासा बनाए रखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
रिक्त स्थान भरिए— (i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन ______________ कहलाता है। (ii) एक धारावाही कुंडली ______________ की भाँति व्यवहार करती है।
उत्तर
(i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन विद्युत-अपघट्य कहलाता है।
(ii) एक धारावाही कुंडली चुंबक की भाँति व्यवहार करती है।
ये उत्तर क्यों:
  • विद्युत-अपघट्य — वोल्टीय सेल में दोनों इलेक्ट्रोड एक द्रव में आंशिक रूप से डूबे रहते हैं जो प्रायः दुर्बल अम्ल अथवा लवण का विलयन होता है। इलेक्ट्रोडों और इसी द्रव के मध्य होने वाली रासायनिक अभिक्रिया विद्युत उत्पन्न करती है, और इस द्रव को विद्युत-अपघट्य कहते हैं।
  • चुंबक — कुंडली में प्रवाहित धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। तब कुंडली दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करती है, लोहे की क्लिपें आकर्षित करती है और छड़ चुंबक की भाँति उसके उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव भी होते हैं। ऐसी कुंडली विद्युत-चुंबक कहलाती है।
प्र2.
सही विकल्प चुनिए— (i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य) (ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य) (iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)
उत्तर
कथनउत्तरकारण
(i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है।असत्यशुष्क सेल में द्रव होता ही नहीं — उसका विद्युत-अपघट्य जस्ते के बंद पात्र में भरी गाढ़ी नम लेई है। वोल्टीय सेल के लिए काँच अथवा प्लास्टिक के खुले पात्र में द्रव चाहिए जो छलक सकता है और जिसे सीधा रखकर ले जाना पड़ता है। अतः शुष्क सेल अधिक सुवाह्य है — इसीलिए दैनिक उपयोग में उसने वोल्टीय सेल का स्थान ले लिया।
(ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है।सत्यचुंबकत्व धारा से ही उत्पन्न होता है। धारा रोकते ही क्षेत्र समाप्त हो जाता है और क्लिपें गिर जाती हैं — विद्युत-चुंबक एक अस्थायी चुंबक है।
(iii) एक सेल से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी वाले उसी विद्युत-चुंबक से अधिक क्लिपें आकर्षित करता है।असत्यवास्तव में इसका उल्टा होता है। दो सेल अधिक धारा प्रवाहित करते हैं, अतः चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है और अधिक क्लिपें थमी रहती हैं। एकल सेल कम धारा और दुर्बल क्षेत्र देता है।
प्र3.
किसी निक्रोम के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। (i) तार गरम हो जाता है। (ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है। सही विकल्प का चयन कीजिए— (क) केवल विकल्प (i) सही है। (ख) केवल विकल्प (ii) सही है। (ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं। (घ) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नही हैं।
उत्तर

सही विकल्प है (ग) विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।

दोनों एक साथ क्यों होते हैं: एक ही धारा उसी तार में एक ही समय पर दोनों प्रभाव उत्पन्न करती है।
  • तापीय प्रभाव — निक्रोम धारा प्रवाह में प्रतिरोध उत्पन्न करता है, अतः विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में बदलता है और तार गरम हो जाता है। यही क्रियाकलाप 4.5 है।
  • चुंबकीय प्रभाव — वही धारा तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करती है, अतः नीचे रखे दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है। यही क्रियाकलाप 4.1 है।
कोई भी प्रभाव दूसरे को समाप्त नहीं करता। निक्रोम केवल तापन को सरलता से अनुभव करने योग्य बना देता है; वह चालक भी भली प्रकार है, अतः दिक्सूचक भी विक्षेपित होता है।
प्र4.
स्तंभ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तंभ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए। स्तंभ ‘क’ — (i) वोल्टीय सेल (ii) विद्युत इस्तरी (iii) निक्रोम तार (iv) विद्युत-चुंबक। स्तंभ ‘ख’ — (क) विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्त (ख) विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती है। (ग) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है। (घ) रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती है।
उत्तर
स्तंभ ‘क’मिलानस्तंभ ‘ख’कारण
(i) वोल्टीय सेल(घ)रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करती हैविद्युत-अपघट्य में डूबे दो भिन्न इलेक्ट्रोड; इनके मध्य की अभिक्रिया धारा उत्पन्न करती है
(ii) विद्युत इस्तरी(ग)विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती हैधारा प्रवाहित होने पर उसका तापन अवयव गरम होता है और तप्त तली कपड़े प्रेस करती है
(iii) निक्रोम तार(क)विद्युत तापक हेतु सर्वाधिक उपयुक्तयह अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करता है, अतः दी हुई धारा के लिए अधिक ऊष्मा देता है और पिघले बिना लाल-तप्त हो सकता है
(iv) विद्युत-चुंबक(ख)विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करती हैकुंडली में प्रवाहित धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, अतः कुंडली चुंबक की भाँति व्यवहार करती है
(i) → (घ)   (ii) → (ग)   (iii) → (क)   (iv) → (ख)
प्र5.
सामान्यतः विद्युत-तापन युक्तियों में निक्रोम तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह— (i) विद्युत का सुचालक है। (ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है। (iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता है। (iv) विद्युत का कुचालक है।
उत्तर

सही उत्तर है (ii) किसी निश्चित परिमाण की विद्युत धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।

(ii) ही कारण क्यों है: समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार की तुलना में निक्रोम का तार अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करता है। प्रतिरोध जितना अधिक होगा, धारा प्रवाहित होने पर विद्युत ऊर्जा का उतना ही अधिक भाग ऊष्मा में परिवर्तित होगा। अतः समान धारा के लिए निक्रोम ताँबे से कहीं अधिक ऊष्मा देता है — तापक, हीटर अथवा इस्तरी को ठीक यही चाहिए।
विकल्पनिर्णयकारण
(i) विद्युत का सुचालक हैसत्य है, पर कारण नहींताँबा तो और भी अच्छा चालक है, फिर भी तापन अवयव ताँबे का नहीं बनाया जाता — क्योंकि वह बहुत कम गरम होता है
(ii) दी हुई धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता हैसहीयही गुण इसे तापन अवयव बनाता है
(iii) ताँबे की अपेक्षा सस्ता हैकारण नहींइसका चयन मूल्य के आधार पर नहीं, दी जाने वाली ऊष्मा के आधार पर होता है
(iv) विद्युत का कुचालक हैगलतकुचालक से धारा प्रवाहित ही नहीं होगी, अतः ऊष्मा भी उत्पन्न नहीं होगी। निक्रोम चालक है
प्र6.
विद्युत-तापन युक्तियों (जैसे — विद्युत कक्ष-तापक अथवा विद्युत हीटर) को प्रायः पारंपरिक तापन विधियों (जैसे — लकड़ी अथवा चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता है। समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण दीजिए।
उत्तर

विद्युत तापन में विद्युत ऊर्जा तापन अवयव के भीतर ही ऊष्मा में बदलती है, अतः कक्ष में कुछ भी जलाना नहीं पड़ता। इसी एक अंतर से उपयोगकर्ताओं के जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है।

  • घर के भीतर स्वच्छ वायु। लकड़ी और चारकोल धुआँ एवं कालिख देते हैं। प्रतिदिन यह धुआँ साँस के साथ भीतर जाने से खाँसी और फेफड़ों के रोग होते हैं, और सर्वाधिक कष्ट चूल्हे के सबसे पास बैठने वाली महिलाओं तथा छोटे बच्चों को होता है। विद्युत हीटर से धुआँ, कालिख अथवा राख कुछ भी नहीं निकलती।
  • समय की बचत, विशेषकर बालिकाओं के लिए। लकड़ी एकत्र करने और ढोने में प्रति सप्ताह घंटों लगते हैं और यह कार्य प्रायः महिलाओं तथा बच्चों के हिस्से आता है — वे घंटे विद्यालय, अध्ययन अथवा उपार्जन में लग सकते थे। विद्युत उपकरण के लिए केवल एक स्विच चाहिए।
  • तत्काल एवं नियंत्रित ऊष्मा। स्विच ऑन करते ही ऊष्मा आरंभ हो जाती है, ऑफ करते ही रुक जाती है, और उसे घटाया-बढ़ाया भी जा सकता है। लकड़ी की आग को जलाना, सँभालना और फिर बुझाना पड़ता है।
  • कम दुर्घटनाएँ। खुली लौ, उड़ती चिंगारी और दहकते कोयले नहीं होते, अतः जलने की घटनाएँ और आग लगने के प्रकरण कम होते हैं — घनी बस्तियों में यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
  • वन एवं ईंधन। कम लकड़ी और चारकोल का अर्थ है कम वृक्ष कटना, और बाहरी वायु में भी धुआँ न जाना।
  • स्वच्छ घर एवं बर्तन। न राख हटानी पड़ती है, न कालिख से काले हुए बर्तन माँजने पड़ते हैं।
दूसरा पक्ष भी देखिए: विद्युत का उत्पादन तो कहीं न कहीं करना ही पड़ता है। यदि वह कोयला जलाकर बनती है तो प्रदूषण घर से हटकर विद्युत संयंत्र तक चला जाता है — इसीलिए अध्याय के अंत में विद्युत शक्ति के पर्यावरण अनुकूल स्रोतों की बात कही गई है। विद्युत तापन के लिए विश्वसनीय आपूर्ति भी आवश्यक है, तथा तार, प्लग एवं सॉकेट उपकरण की निर्दिष्ट विद्युत-धारा के लिए अनुमोदित होने चाहिए, अन्यथा वे अतितापित हो जाते हैं।
प्र7.
चित्र 4.4 (क) का अवलोकन कीजिए। यदि इसमें कुंडली के समीप रखे दिक्सूचक की सुई में विक्षेपण होता है तो— (i) विद्युत धारा का पथ दर्शाने हेतु आरेख पर तीर का चिह्न लगाइए। (ii) स्पष्ट कीजिए कि कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है? (iii) यदि आप बैटरी के सिरों को उल्टा कर देते हैं तो पूर्वानुमान लगाइए कि विक्षेप पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर

(i) विद्युत धारा का पथ। चित्र 4.4 (क) में सेल कुंडली के नीचे है, जिसका ऋणात्मक सिरा बाईं ओर और धनात्मक सिरा दाईं ओर है। अतः धारा धनात्मक सिरे से निकलकर दाहिने तार से ऊपर सिरे ‘आ’ तक जाती है, कुंडली के फेरों से होती हुई ‘आ’ से ‘अ’ की ओर बहती है, बाएँ तार से नीचे उतरकर ऋणात्मक सिरे में प्रवेश करती है। इसी क्रम में पूरे परिपथ पर तीर लगाइए।

दक्षिणी उत्तरी + धारा ऊपर ‘आ’ की ओर ‘अ’ से नीचे आती धारा दिक्सूचक
प्र.7 — धारा धनात्मक सिरे से निकलकर सिरे ‘आ’ तक जाती है, कुंडली में ‘आ’ से ‘अ’ की ओर बहती है और ऋणात्मक सिरे में लौटती है। सुई का लाल सिरा (उत्तरी ध्रुव) ‘अ’ की ओर आकर्षित होता है, अतः ‘अ’ दक्षिणी ध्रुव है।

(ii) दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है। कुंडली के फेरों में घूमती धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, अतः कुंडली अपने दोनों सिरों पर उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव सहित चुंबक की भाँति व्यवहार करने लगती है। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटा चुंबक है। कुंडली के चुंबकीय क्षेत्र में रखी जाने पर वह घूमकर उस क्षेत्र के अनुदिश आ जाती है — यही आपको विक्षेपण के रूप में दिखाई देता है। धारा रोकते ही क्षेत्र समाप्त हो जाता है और सुई पुनः उत्तर-दक्षिण दिशा में लौट आती है।

(iii) यदि बैटरी के सिरे उल्टे कर दिए जाएँ। तब धारा कुंडली में विपरीत दिशा में घूमेगी, अतः विद्युत-चुंबक के ध्रुव आपस में बदल जाएँगे — सिरा ‘अ’ उत्तरी और सिरा ‘आ’ दक्षिणी हो जाएगा। इसलिए सुई विपरीत दिशा में विक्षेपित होगी। विक्षेप का परिमाण लगभग उतना ही रहेगा, क्योंकि सेल उलटने से धारा की मात्रा नहीं बदलती — केवल उसकी दिशा बदलती है।

मूल विचार: प्रबलता इस पर निर्भर है कि धारा कितनी है (और फेरे कितने हैं); ध्रुवता इस पर कि वह किस दिशा में बहती है। परिमाण बदलिए तो विक्षेप घटेगा-बढ़ेगा; दिशा बदलिए तो विक्षेप उलट जाएगा।
प्र8.
मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श के स्विच को ऑफ करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।
उत्तर

तार अभी भी गरम है, अर्थात कुछ धारा अब भी प्रवाहित हो रही है — परिपथ टूटा नहीं है। जो घटा है वह चुंबकीय प्रभाव की प्रबलता है, परिपथ नहीं।

संभावित कारण

  1. सेल दुर्बल हो गया है — यही सबसे संभावित कारण है। लंबे समय तक जुड़ा रहने से सेल के भीतर के रसायन उपयोग में आ जाते हैं। सेल दुर्बल हो जाता है, धारा घट जाती है, और कम धारा से बना दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र क्लिपों को उनके अपने भार के विरुद्ध थामे रखने के लिए पर्याप्त नहीं रहता। और अधिक समय बीतने पर सेल पूर्णतः निष्क्रिय हो जाता है।
  2. इस बीच ऊष्मा संचित होती रही है। कुंडली में लगातार बहुत देर तक धारा प्रवाहित होती रही है और तापीय प्रभाव उस पूरे समय कार्य करता है। इसलिए कुंडली अब भी गरम है, यद्यपि धारा आरंभ की तुलना में बहुत कम हो चुकी है। कई मिनट तक गरम रहा तार कुछ समय तक गरम बना रहता है।
  3. कोई संयोजन ढीला हो सकता है। गरमाहट से टेप नरम पड़ जाता है और ऐंठकर बनाए गए जोड़ ढीले हो जाते हैं; आंशिक रूप से ढीला जोड़ केवल थोड़ी-सी धारा जाने देता है — तार को गरम रखने भर के लिए पर्याप्त, क्लिपें उठाने के लिए नहीं।
मुख्य बात: धारा के दोनों प्रभाव एक साथ समाप्त नहीं होते। कुछ उठाने के लिए चुंबकीय प्रभाव को पर्याप्त बड़ी धारा चाहिए, जबकि लंबे समय तक बहती अल्प धारा भी तार को गरम रखने के लिए पर्याप्त है। गरम तार के साथ क्लिपों का गिरना ठीक उसी स्थिति का लक्षण है जिसमें धारा घट गई हो, रुकी न हो।
संकेत: इसीलिए क्रियाकलाप 4.2 में चेतावनी दी गई है कि कुंडली को सेल से कुछ सेकंड से अधिक जोड़े न रखें। उपयोग न होने पर विद्युत-चुंबक तत्काल ऑफ कर दीजिए — इससे सेल भी बचता है और कुंडली भी ठंडी रहती है।
प्र9.
चित्र 4.12 (क) और (ख) में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑन) होने पर एल.ई.डी. दीप्त होगी?
उत्तर

एल.ई.डी. चित्र (क) में दीप्त होगी — जिस बीकर में नींबू का रस है। चित्र (ख) में, जहाँ शुद्ध जल है, वह दीप्त नहीं होगी।

प्रकरणबीकर में द्रवक्या यह विद्युत-अपघट्य है?एल.ई.डी.
(क)नींबू का रसहाँ — यह दुर्बल अम्ल हैदीप्त होगी
(ख)शुद्ध जलनहींदीप्त नहीं होगी
कारण: दोनों बीकरों में लोहे की कील और ताँबे की पत्ती हैं — भिन्न-भिन्न धातुओं के दो इलेक्ट्रोड। परंतु यह वोल्टीय सेल का केवल आधा भाग है; शेष आधा विद्युत-अपघट्य है। नींबू का रस दुर्बल अम्ल है, अतः (क) में वोल्टीय सेल के तीनों भाग पूरे हो जाते हैं: दोनों धातुओं पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं, परिपथ में धारा प्रवाहित होती है और एल.ई.डी. दीप्त हो जाती है। शुद्ध जल विद्युत-अपघट्य नहीं है, अतः (ख) में न ऐसी अभिक्रिया होती है और न जल स्वयं धारा जाने देता है। स्विच बंद करने से कुछ नहीं बदलता।
यह कीजिए: शुद्ध जल वाले बीकर में एक चम्मच साधारण नमक घोलकर पुनः स्विच बंद कीजिए। लवण का विलयन विद्युत-अपघट्य है, अतः अब एल.ई.डी. दीप्त होनी चाहिए — इससे सिद्ध होता है कि दोष धातुओं में नहीं, द्रव में था।
प्र10.
नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 में ली गई थी किंतु वह इसके भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना में अधिक होगा अथवा कम?
उत्तर

हाँ, कुंडली अब भी दिक्सूचक को विक्षेपित करेगी — परंतु विक्षेपण पहले की तुलना में कम होगा, जब लोहे की कील भीतर थी।

यह अब भी क्यों कार्य करती है: चुंबकीय क्षेत्र कुंडली के फेरों में घूमती धारा से उत्पन्न होता है और धारा में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। यह आपने क्रियाकलाप 4.3 में स्वयं देखा था: चित्र 4.3 (ग) की स्थिति में कुंडली केवल कागज के बेलन पर लपेटी थी और तब भी दोनों दिक्सूचकों की सुइयाँ विक्षेपित हुई थीं — कील प्रविष्ट करने से पहले ही।
यह अब दुर्बल क्यों है: लोहा चुंबकीय पदार्थ है। कुंडली के क्षेत्र के भीतर रखी कील स्वयं चुंबक बन जाती है और अपना चुंबकत्व कुंडली के चुंबकत्व में जोड़ देती है। कील बाहर निकालते ही यह अतिरिक्त योगदान समाप्त हो जाता है और केवल कुंडली का अपना क्षेत्र शेष रहता है। अतः सुई घूमती तो है, पर कम कोण से — और संभव है कि कुंडली अब कागज-क्लिपें न थाम सके।
स्वयं जाँचिए: कागज पर सुई की स्थिर स्थिति अंकित कीजिए, फिर कील सहित और कील रहित विक्षेपित स्थितियाँ अंकित कीजिए। इन दोनों कोणों का अंतर ही लौह क्रोड का योगदान है।
प्र11.
चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी आकृति और आकार की चार कुंडलियाँ हैं। जब कुंडलियों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कुंडलियों के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेप दर्शाएँगी— (i) केवल परिपथ (क) में (ii) केवल परिपथ (क) और (ख) में (iii) केवल परिपथ (क), (ख) और (ग) में (iv) सभी चारों परिपथों में
उत्तर

सही उत्तर है (iv) सभी चारों परिपथों में।

कारण: लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम और निक्रोम — चारों धातुएँ हैं और चारों विद्युत के चालक हैं। अतः प्रत्येक स्विच बंद करने पर चारों में से हर कुंडली में धारा प्रवाहित होगी — और कोई भी धारावाही कुंडली अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसलिए चारों दिक्सूचकों की सुइयाँ विक्षेपित होंगी।
कुंडलीधारा प्रवाहित होगी?चुंबकीय क्षेत्र बनेगा?दिक्सूचक विक्षेपित होगा?
(क) लोहाहाँहाँहाँ
(ख) ताँबाहाँहाँहाँ
(ग) ऐलुमिनियमहाँहाँहाँ
(घ) निक्रोमहाँहाँहाँ
क्या आप जानते हैं? चारों विक्षेप बराबर हों, यह आवश्यक नहीं। निक्रोम सर्वाधिक प्रतिरोध उत्पन्न करता है, अतः उसमें सबसे कम धारा जाती है और विक्षेप सबसे कम होता है — जबकि वह गरम सबसे अधिक होता है। चुंबकीय प्रभाव चारों में उपस्थित है; केवल उसका परिमाण भिन्न है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ