प्र1.
परंतु पृथ्वी एक चुंबक की भाँति व्यवहार क्यों करती है?
उत्तर
क्योंकि पृथ्वी के भीतर गहराई में विद्युत धाराएँ प्रवाहित होती हैं। पृथ्वी के क्रोड में उपस्थित तरल लोहा निरंतर गतिशील रहता है और यह गति विद्युत धाराओं का निर्माण करती है। ये धाराएँ भी, ठीक आपकी कुंडली की धारा की भाँति, चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती हैं — और यह क्षेत्र पृथ्वी की सतह से बहुत दूर तक फैला होता है।
यह अध्याय से कैसे जुड़ता है: यह वही सिद्धांत है जिसकी जाँच आपने क्रियाकलाप 4.1 में की थी। धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। पृथ्वी उसी बात का एक विशाल रूप है — इसीलिए स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक अथवा दिक्सूचक सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरती है।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के दो परिणाम—
- अनेक प्रवासी पक्षी, मछलियाँ और पशु महाद्वीपों और महासागरों के पार यात्रा करने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
- यह एक परिरक्षक की भाँति कार्य करते हुए अंतरिक्ष से आने वाले हानिकारक कणों को रोकता है और पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में सहायता करता है।