अब तार स्पष्ट रूप से गरम प्रतीत होता है। ऑन-ऑफ की प्रक्रिया दोहराने पर हर बार यही परिणाम मिलता है, जिससे पुष्टि होती है कि गरमाहट धारा के कारण ही है।
ऐसा क्यों होता है: निक्रोम का तार अपने में से प्रवाहित होती धारा के प्रवाह में प्रतिरोध उत्पन्न करता है। इस प्रतिरोध के कारण विद्युत ऊर्जा का कुछ भाग तार में ही तापीय ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है और तार का ताप बढ़ जाता है। धारा प्रवाहित होने पर चालक के इसी प्रकार गरम हो जाने को विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं। इस क्रियाकलाप में निक्रोम इसीलिए चुना गया है क्योंकि समान आमाप एवं लंबाई के ताँबे के तार की तुलना में यह अधिक प्रतिरोध उत्पन्न करता है, अतः 30 सेकंड में ही तापन अनुभव करने योग्य हो जाता है।
सुरक्षा सर्वोपरि (पुस्तक, पृष्ठ 53): किसी भी प्रकार की क्षति से बचने के लिए तार को अधिक समय तक स्पर्श न करें। इसे केवल क्षणभर के लिए छुइए और निक्रोम तार को पकड़ें नहीं।
उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा तार के पदार्थ, मोटाई एवं लंबाई, विद्युत धारा के परिमाण तथा धारा प्रवाह की समय अवधि पर निर्भर करती है।