प्र1.
क्या इसका तात्पर्य यह है कि यदि सतहें अधिक खुरदरी हैं तो उनके बीच घर्षण बल अधिक होगा?
उत्तर
हाँ। खुरदरी सतहों के बीच घर्षण अधिक होता है, और क्रियाकलाप 5.4 यही दर्शाता है — रेत पर डिब्बा लगभग तुरंत रुक जाता है जबकि काँच पर वह दूर तक फिसलता है।
ऐसा क्यों होता है: घर्षण संपर्क में आने वाली दोनों सतहों की अनियमितताओं के कारण उत्पन्न होता है। यहाँ तक कि चिकनी दिखाई देने वाली सतहों में भी बड़ी संख्या में सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं (चित्र 5.6)। संपर्क में आने पर ये एक-दूसरे के पाश में फँस जाती हैं और एक सतह को दूसरी पर फिसलने के प्रयास का विरोध करती हैं। खुरदरी सतह की अनियमितताएँ बड़ी और गहरी होती हैं, अत: उनमें से अधिक संख्या में और अधिक मजबूती से फँसती हैं — फिसलने का विरोध, अर्थात घर्षण, इसीलिए अधिक होता है।
क्या आप जानते हैं? इसी कारण नए खेल-जूते का तला गहरा खाँचेदार होता है और घिसा हुआ तला फिसलता है। इसी कारण गीली ढलान पर रेत या राख बिखेरी जाती है, और कैरम-बोर्ड पर बोरिक पाउडर छिड़का जाता है — जहाँ पकड़ चाहिए वहाँ घर्षण बढ़ाने के लिए और जहाँ नहीं चाहिए वहाँ घटाने के लिए।