कुतूहल अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने जल आपूर्ति हेतु स्थानीय क्षेत्रों में तथा घरों की छतों पर रखी उपरिवर्ती टंकियों को देखा होगा (चित्र 6.4)। इन टंकियों को सदैव ऊँचाई पर ही क्यों रखा जाता है?
उत्तर

क्योंकि द्रव द्वारा लगाया गया दाब उसके स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है, और यही दाब नलों से जल को बाहर निकालता है।

टंकी का जल पाइपों द्वारा घर के प्रत्येक नल से जुड़ा होता है। नल के ऊपर जल का स्तंभ जितना ऊँचा होगा, उस नल पर दाब उतना ही अधिक होगा। टंकी को छत पर रखने से यह स्तंभ अधिकतम ऊँचा हो जाता है, अत: नलों से जल तीव्र धार के रूप में निकलता है और ऊपरी तलों के नलों तक भी पहुँच पाता है।

ऐसा क्यों होता है: क्रियाकलाप 6.1 दिखाता है कि ऊँचा जल स्तंभ गुब्बारे को अधिक फुलाता है, जबकि पाइप चौड़ा करने से कोई अंतर नहीं पड़ता। अत: निकास पर दाब केवल ऊँचाई से तय होता है — टंकी के आमाप या उसमें भरे जल की मात्रा से नहीं।
प्र2.
क्या द्रव भी दाब डालते हैं?
उत्तर

हाँ। द्रव अपने पात्र के तल पर, पात्र की दीवारों पर, वस्तुत: सभी दिशाओं में दाब डालता है।

क्रियाकलाप 6.1 तल पर लगने वाले दाब को दिखाई देने योग्य बना देता है — जल से भरे पाइप के निचले सिरे पर बँधा गुब्बारा बाहर की ओर फूल जाता है, और जल स्तंभ ऊँचा करने पर और अधिक फूलता है। क्रियाकलाप 6.2 पार्श्व दाब दिखाता है — बोतल की दीवार में बने छिद्रों से जल बाहर की ओर निकलता है। दोनों मिलकर सिद्ध करते हैं कि द्रव जहाँ भी पात्र को छूता है वहाँ दाब डालता है।

स्वयं जाँचिए: बाँध का आधार उसके ऊपरी भाग से इसीलिए बहुत चौड़ा बनाया जाता है। एकत्रित जल का क्षैतिज दाब तल के समीप सबसे अधिक होता है, और उसे सहने के लिए चौड़ा आधार चाहिए (चित्र 6.8)।
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