कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 6 दाब, पवन, झंझावात एवं चक्रवात के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं , दाब = बल / क्षेत्रफल । समान बल कम क्षेत्रफल पर लगे तो दाब अधिक होता है — इसी कारण नुकीली कील सरलता से ठुकती है और तीक्ष्ण धार वाला चाकू सरलता से काटता है। दाब का SI मात्रक न्यूटन/मीटर 2 (N/m 2 ) है, जिसे पास्कल (Pa) भी कहते हैं। द्रव पात्र के तल पर ही नहीं, उसकी दीवारों पर भी — वस्तुत: सभी दिशाओं में — दाब डालता है। यह दाब द्रव स्तंभ की ऊँचाई पर निर्भर करता है, पात्र की चौड़ाई या उसमें भरे जल की मात्रा पर नहीं। इसी कारण उपरिवर्ती टंकियाँ ऊँचाई पर रखी जाती हैं और बाँध का आधार उसके ऊपरी भाग से चौड़ा बनाया जाता है। वायु भी अपने चारों ओर की प्रत्येक वस्तु पर दाब डालती है। हमारे चारों ओर की वायु द्वारा लगाया गया दाब वायुमंडलीय दाब कहलाता है; केवल 15 cm × 15 cm क्षेत्रफल पर वायु स्तंभ लगभग 2250 N बल लगाता है — अर्थात् 225 kg द्रव्यमान पर लग
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | पुस्तक से उदाहरण |
|---|---|---|---|
| दाब | किसी पृष्ठ पर लंबवत लगने वाला बल, उस पृष्ठ के क्षेत्रफल से भाग देने पर: दाब = बल/क्षेत्रफल | खंड 6.1, पृष्ठ 81–82 | चौड़ी पट्टियों वाला बस्ता संकरी पट्टियों वाले बस्ते की तुलना में कंधों पर कम दाब डालता है (चित्र 6.1) |
| पास्कल (Pa) | दाब का SI मात्रक; 1 Pa = 1 N/m2 | खंड 6.1, पृष्ठ 82 | 2 m2 के गत्ते पर 100 N का बल = 50 N/m2 = 50 Pa |
| मिलीबार (mb) / हैक्टोपास्कल (hPa) | वायुदाब के प्रायोगिक मात्रक; 1 mb = 1 hPa = 100 Pa | एक सोपान ऊपर, पृष्ठ 87 | चित्र 6.19 में 994 mb, 996 mb, 998 mb, 1008 mb की समदाब रेखाएँ |
| द्रव का दाब | द्रव स्तंभ द्वारा लगाया गया दाब; यह स्तंभ की ऊँचाई के साथ बढ़ता है और सभी दिशाओं में कार्य करता है | क्रियाकलाप 6.1 एवं 6.2, पृष्ठ 83–85 | समान ऊँचाई का जल स्तंभ दोनों गुब्बारों में समान फैलाव देता है (चित्र 6.5); बोतल के चारों पार्श्व छिद्रों से जल निकलता है (चित्र 6.7) |
| वायुमंडल | पृथ्वी के चारों ओर वायु का आवरण — नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, ऑर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा अल्प मात्रा में अन्य गैसें | खंड 6.2, पृष्ठ 85 | यह पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर तक विस्तारित है |
| वायुमंडलीय दाब | हमारे चारों ओर की वायु द्वारा लगाया गया दाब | खंड 6.2, पृष्ठ 86–87 | वायु रबड़ के चूषक को चिकने पृष्ठ पर दबाए रखती है (क्रियाकलाप 6.4, चित्र 6.11) |
| पवन | उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर गतिमान वायु | खंड 6.3, पृष्ठ 87–89 | नलिका द्वारा फूले हुए गुब्बारे से बिना फूले गुब्बारे में वायु का जाना (क्रियाकलाप 6.5, चित्र 6.12) |
| समुद्र समीर एवं स्थल समीर | दिन में समुद्र से स्थल की ओर तथा रात्रि में स्थल से समुद्र की ओर चलने वाली पवन, जो दाब के अंतर से उत्पन्न होती है | खंड 6.3, पृष्ठ 88–89 | दिन में स्थल तीव्रता से गरम होता है, अत: निम्न दाब का क्षेत्र स्थल पर बनता है |
| झंझावात | तीव्र वायु के साथ होने वाली वर्षा | खंड 6.5, पृष्ठ 90 | भारत जैसे गरम, आर्द्र एवं उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में झंझावात प्राय: आते रहते हैं |
| तड़ित-झंझावात | तड़ित एवं गर्जन के साथ आने वाला झंझावात | खंड 6.5, पृष्ठ 91 | पश्चिम बंगाल, बिहार एवं झारखंड में कालबैशाखी; असम में बोदोइसिला; केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में आम वर्षा |
| तड़ित | आवेश की अधिक मात्रा एकत्र होने पर वायु का विद्युतरोधी गुण समाप्त होने से उत्पन्न क्षणदीप्त प्रकाश | खंड 6.5, पृष्ठ 91 | बादल के भीतर, बादलों के मध्य अथवा बादल और धरातल के मध्य (चित्र 6.16) |
| तड़ित चालक | भवन की दीवारों के साथ लगाई गई धातु की छड़, जिसका नुकीला सिरा भवन के उच्चतम बिंदु से ऊँचा और दूसरा सिरा भूमि में गहराई तक दबा होता है | क्या आपके संज्ञान में है…, पृष्ठ 92 | यह वैद्युत आवेशों को भूमि में जाने का सरल मार्ग देती है (चित्र 6.18) |
| चक्रवात | महासागर के गरम जल के ऊपर, अत्यधिक निम्न दाब के केंद्र के चारों ओर बनने वाला बादल, पवन एवं वर्षा का चक्रण करता तंत्र | खंड 6.6, पृष्ठ 92–93 | वर्ष 2020 में आए अम्फान चक्रवात की उच्चतम गति 270 km/h थी |
| चक्रवात अक्षि | चक्रवात के केंद्र में अत्यधिक निम्न दाब का क्षेत्र, जहाँ वायु शांत होती है | खंड 6.6, पृष्ठ 92 | इसके आस-पास के क्षेत्र में तीव्र वायु और भारी वर्षा होती है (चित्र 6.20) |
| जल की दीवार (उत्प्रवाह) | चक्रवात की तीव्र वायु द्वारा तट की ओर धकेला गया महासागरीय जल, जो 3 से 12 मीटर तक ऊँचा हो सकता है | खंड 6.6, पृष्ठ 93 | यह तटीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में बाढ़ लाता है तथा पीने योग्य जल स्रोतों को प्रदूषित करता है |
| IMD | भारत मौसम विज्ञान विभाग, जो चक्रवात एवं तड़ित-झंझावात का अनुवीक्षण कर चेतावनियाँ जारी करता है | खंड 6.6, पृष्ठ 93 | मौसम निगरानी उपग्रहों से चक्रवात की पूर्व सूचना और उसके मार्ग का पूर्वानुमान मिलता है |
अभ्यास
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