कुतूहल अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पवन कैसे बनती है?
उत्तर

पवन उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर गतिमान वायु ही है। जहाँ भी ऐसा दाब अंतर बनता है, वहाँ वायु बहने लगती है और उसी प्रवाह को हम पवन कहते हैं।

यह दाब अंतर प्राय: असमान रूप से गरम होने से बनता है। जब कोई क्षेत्र अपने आस-पास की अपेक्षा अधिक गरम होता है तो उसके ऊपर की वायु गरम और हल्की होकर ऊपर उठ जाती है और वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है। आस-पास के ठंडे, उच्च दाब वाले क्षेत्रों से वायु क्षैतिज रूप से उसका स्थान लेने आती है। यही क्षैतिज गति वह पवन है जिसे हम अनुभव करते हैं।

असमान रूप से गरम होना → गरम वायु ऊपर उठी → निम्न दाब बना
आस-पास की ठंडी वायु उच्च दाब पर
→ वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बही = पवन
प्र2.
क्या वायुदाब में अंतर पवन के बनने से संबंधित है?
उत्तर

हाँ — दाब का अंतर ही पवन का पूरा कारण है, और उसी का परिमाण यह तय करता है कि पवन कितनी तीव्र होगी।

क्रियाकलाप 6.5 दोनों बातें सिद्ध कर देता है। वायु फूले हुए गुब्बारे से बिना फूले गुब्बारे में तभी तक गई जब तक दोनों के दाब भिन्न थे; दाब समान होते ही प्रवाह रुक गया और दोनों गुब्बारों का आमाप स्थिर हो गया। पुस्तक यह भी जोड़ती है कि यदि बाहर निकलती वायु की चाल मापी जा सके तो दाब का अंतर अधिक होने पर चाल भी अधिक मिलेगी।

कक्षा 7 की पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा में पढ़े गए समुद्र समीर और स्थल समीर खुले में यही प्रभाव हैं। दिन में स्थल जल की तुलना में तीव्रता से गरम होता है, अत: स्थल के ऊपर की वायु गरम और हल्की होकर ऊपर उठती है और वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है; समुद्र के उच्च दाब वाले क्षेत्र से वायु स्थल की ओर बहती है — यही समुद्र समीर है। रात्रि में जल स्थल की तुलना में अधिक गरम रहता है, निम्न दाब अब समुद्र के ऊपर बनता है और वायु स्थल से समुद्र की ओर बहती है — यही स्थल समीर है।

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