कुतूहल अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी विचार किया कि गिरी हुई पत्तियाँ वायु में ऊपर क्यों उठती हैं तथा पेड़ लहराते हुए झुक क्यों जाते हैं?
उत्तर

क्योंकि गतिमान वायु उन पर धक्का लगाती है — पवन जिस भी पृष्ठ से टकराती है उस पर बल आरोपित करती है।

भूमि पर पड़ी पत्ती का भार बहुत कम होता है जबकि उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल बड़ा होता है। जब वायु उसके ऊपर से बहती है तो वह इसी पृष्ठ पर बल लगाती है, और थोड़ा-सा बल भी पत्ती को उठाकर बहा ले जाने के लिए पर्याप्त होता है। पेड़ कहीं अधिक भारी है, परंतु उसकी पत्तियाँ और शाखाएँ पवन के सामने बहुत बड़ा क्षेत्रफल प्रस्तुत करती हैं, अत: उन पर लगने वाला कुल बल इतना हो जाता है कि तना झुक जाए।

करके देखिए: पंखे के सामने एक कागज की चादर और उसी कागज की मुड़ी हुई गेंद पकड़िए। चादर दूर तक धकेली जाती है, गेंद लगभग स्थिर रहती है — भार दोनों का समान है, केवल वायु के सामने आने वाला क्षेत्रफल बदला है।
प्र2.
क्या वायु गिरी हुई पत्तियों पर कोई बल लगाती है जिससे वे ऊपर उठती हैं तथा पेड़ झुक जाते हैं?
उत्तर

हाँ। गतिमान वायु जिस वस्तु से टकराती है उस पर बल लगाती है, और यही बल पत्तियों को उठाता और पेड़ों को झुकाता है।

बल की पहचान उसके प्रभावों से होती है — वह किसी विरामावस्था की वस्तु को गति दे सकता है, गतिमान वस्तु की चाल या दिशा बदल सकता है, अथवा उसकी आकृति बदल सकता है। वायु ये सभी कार्य करती है — स्थिर पत्ती चलने लगती है, लहराती शाखा दिशा बदलती है, सीधा तना झुक जाता है। दरवाजों का बंद होना, खिड़कियों का खड़खड़ाना और कपड़ों का लहराना भी इसी बल के अन्य रूप हैं।

ऐसा क्यों होता है: जिस क्षेत्रफल पर यह बल फैला होता है, उसके सापेक्ष इसे ही अध्याय वायु दाब कहता है। दाब के रूप में सोचने से यह भी समझ आता है कि एक ही पवन चौड़े दरवाजे को क्यों बंद कर देती है और संकरी खिड़की को केवल खड़खड़ाती है — समान दाब बड़े क्षेत्रफल पर लगे तो बल भी बड़ा होता है।
प्र3.
क्या पट्टियों का आकार एवं आकृति वास्तव में कोई अंतर उत्पन्न करता है?
उत्तर

हाँ — बस्ते के भार में नहीं, बल्कि उस भार से कंधों पर उत्पन्न होने वाले दाब में।

मेघा और पवन के बस्ते समान रूप से भारी हैं, अत: गुरुत्व बल दोनों को समान बल से नीचे खींचता है। परंतु यह बल कंधों तक पट्टियों के द्वारा पहुँचता है। पवन की संकरी पट्टियाँ पूरा बल त्वचा के कम क्षेत्रफल पर पहुँचाती हैं, जबकि मेघा की चौड़ी पट्टियाँ उसी बल को कहीं अधिक क्षेत्रफल पर फैला देती हैं। दाब बल में क्षेत्रफल का भाग देने पर मिलता है, अत: संकरी पट्टियों के नीचे दाब बहुत अधिक होता है — और त्वचा पर अधिक दाब ही पीड़ा देता है।

दाब = बल / क्षेत्रफल
समान बल, कम क्षेत्रफल → अधिक दाब (पवन का बस्ता)
समान बल, अधिक क्षेत्रफल → कम दाब (मेघा का बस्ता)
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