क्योंकि गतिमान वायु उन पर धक्का लगाती है — पवन जिस भी पृष्ठ से टकराती है उस पर बल आरोपित करती है।
भूमि पर पड़ी पत्ती का भार बहुत कम होता है जबकि उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल बड़ा होता है। जब वायु उसके ऊपर से बहती है तो वह इसी पृष्ठ पर बल लगाती है, और थोड़ा-सा बल भी पत्ती को उठाकर बहा ले जाने के लिए पर्याप्त होता है। पेड़ कहीं अधिक भारी है, परंतु उसकी पत्तियाँ और शाखाएँ पवन के सामने बहुत बड़ा क्षेत्रफल प्रस्तुत करती हैं, अत: उन पर लगने वाला कुल बल इतना हो जाता है कि तना झुक जाए।