दोनों बाल्टियाँ हाथ को समान बल से नीचे खींचती हैं, परंतु चौड़ा हत्था उस बल को हथेली और अँगुलियों के अधिक क्षेत्रफल पर फैला देता है, अत: त्वचा पर दाब कम होता है।
संकरा हत्था हाथ को एक पतली रेखा के रूप में छूता है। बाल्टी का पूरा भार उसी पतली पट्टी से होकर जाता है, वहाँ दाब बहुत अधिक हो जाता है और वह त्वचा में गड़ता है। चौड़ा हत्था अँगुलियों की पूरी चौड़ाई पर टिकता है। भार वही है, क्षेत्रफल कई गुना अधिक है, अत: दाब उसी अनुपात में घट जाता है।
घड़ों या सब्जी की टोकरियों के नीचे सिर पर रखा जाने वाला कपड़े का गोला (चित्र 6.3) भी ठीक इसी प्रकार कार्य करता है। उसके बिना घड़े का किनारा सिर के छोटे-से वृत्ताकार भाग पर दबता है; उसके साथ भार कहीं अधिक चौड़े भाग पर फैल जाता है। दोनों ही स्थितियों का उद्देश्य एक है — क्षेत्रफल बढ़ाकर दाब कम करना।